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जमीनी स्तर के नवोन्मेषों व रचनात्मकताओं पर आधारित उत्पाद अब ऑनलाइन बिक्री के लिए होंगे उपलब्ध

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जमीनी स्तर के नवोन्मेषों, पारंपरिक ज्ञान और छात्रों की रचनात्मकता पर आधारित उत्पाद भी अब ऑनलाइन बिक्री के लिए होंगे उपलब्ध  @ कमलेश पाण्डेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार नये भारत में डिजिटल इंडिया को प्रोत्साहित करके आम आदमी के हुनर का उपयोग करते हुए उनकी आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में अपेक्षाकृत सुधार लाने का सपना संजोए हुए पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने सत्ता में आने के तत्काल बाद ही जो कुछ नूतन प्रारूप विकसित किये, उनका युगान्तकारी चेहरा अब धीरे धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। देखा जाए तो बीते लगभग साढ़े सात वर्षों से देश में जो तीव्र गति से डिजिटल परिवर्तन हो रहा है, उसे देखते हुए जमीनी स्तर के उद्यमियों के लिए अपने नवाचारों को पूरे भारत में सीधे उपभोक्ताओं तक ले जाने पर विचार करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता है।  वस्तुतः एनआईएफआईईएनटीआरईसी के साथ अमेजन की साझेदारी का उद्देश्य जमीनी स्तर के उद्यमियों और उनके उद्यमों को डिजिटलीकरण और ई-कॉमर्स का लाभ पहुंचाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की रचनात्मकता वाले उत्पादों के विपणन को भारत और पूरे विश्व में लाखों अमे...

साजिशकर्ता मीडिया इकाइयों पर अविलम्ब कार्रवाई कीजिए

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साजिशकर्ता मीडिया इकाइयों पर अविलम्ब कार्रवाई कीजिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार दुनिया के कतिपय देशों के मुकाबले भारत, जिसे इंडिया या हिन्दुस्तान भी कहा जाता है, में प्रेस अपेक्षाकृत ज्यादा स्वतंत्र है। इसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। कहने का तातपर्य यह कि लोकतंत्र के तीन स्तम्भों यथा-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के समान ही खबरपालिका, प्रेस-मीडिया को प्रमुखता देते हुए एक मजबूत चतुर्थ स्तम्भ की संज्ञा दी गई है। क्योंकि लोकतंत्र में जनता अपने शासकों के बारे में क्या राय रखती है, क्या सोचती है, क्या कहती है, ये बातें लोगों के बीच मीडिया रपटों से ही स्पष्ट होती हैं।  वैसे तो राजनीतिक कार्यकर्ता, प्रशासनिक कर्मचारी और अधिवक्तागण भी अपने-अपने संस्थानों में स्थापित तौर तरीकों के माध्यम से जनता की बात रखते आए हैं जिनपर कार्रवाई भी हुई है। हालांकि सत्ता यानी शासन-प्रशासन का स्थायी अंग होने के कारण आमलोग उनकी बातों पर हमेशा पूर्ण विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन उन्हीं की बात जब उनकी भाषा में ही आकाशवाणी, दूरदर्शन, समाचार पत्र और पत्रिकाओं, निजी टीवी व ...