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महिला कोटे से जुड़े संविधान बिल के लुढ़कने के सियासी निहितार्थ

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महिला कोटे से जुड़े संविधान बिल के लुढ़कने के सियासी निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इंडिया गठबंधन की विपक्षी एकजुटता ने पुनः सत्ताधारी गठबंधन एनडीए की नींद उड़ा दी है। ऐसा इसलिए कि लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लाने से जुड़ा था, 16 अप्रैल 2026 को वोटिंग में गिर गया। इसके पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, जबकि न्यूनतम दो-तिहाई बहुमत (लगभग 352 वोट) की आवश्यकता थी, जो सरकार के रणनीतिकारों ने नहीं जुटा पाए। शायद पहली बार सदन में अमित शाह की रणनीति पिट गई। इसका राजनीतिक प्रभाव यह रहा कि मोदी सरकार के लिए 12 साल में पहली बड़ी संवैधानिक हार हुई है, जो विपक्ष की एकजुटता को दर्शाता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे "संविधान पर हमला" बताकर कांग्रेस-विपक्ष की रणनीति की जीत घोषित की, जबकि भाजपा इसे विपक्ष विरोधी हथियार बनाने की योजना बना रही है। एक सत्ता विरोधी रणनीति के तहत जहां विपक्ष ने बिल को "छलावा" करार दिया, वहीं दावा किया कि यह परिसीमन और च...

आख़िर राजनीति को समाजनीति में बदलने की जरूरत क्यों है? समझिए

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आख़िर राजनीति को समाजनीति में बदलने की जरूरत क्यों है? समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक राजनीति को “समाजनीति” में बदलने की जरूरत इसलिए है क्योंकि आज राजनीति अक्सर सत्ता, वोटबैंक और व्यक्तिगत स्वार्थ के खेल में तब्दील हो गई है, जबकि असली बदलाव तभी संभव है जब समाज के भीतर ही नैतिकता, सहिष्णुता और सामूहिक जिम्मेदारी की राजनीति (समाजनीति) बन जाए। इसलिए आइए सबसे पहले राजनीति और समाजनीति में मौलिक अंतर को समझते हैं और फिर उसके अनुरूप व्यवस्था को बदलने की मुहिम छेड़ते हैं।  देखा जाए तो "राजनीति" सामान्यतः सत्ता, चुनाव, नीतियाँ और धुरंधर नेतृत्व पर केंद्रित होती है, जबकि "समाजनीति" मानवीय मूल्यों, सामाजिक सुधार और नागरिक‑स्तरीय कार्यवाही से जुड़ती है। समाजनीति का लक्ष्य नेता‑केंद्रित शासन नहीं, बल्कि समाज के भीतर जागरूकता, सहभागिता और सामाजिक न्याय की संस्थापना होती है।  यही वजह है कि राजनीति के विकृत रूप से उबरने की जरूरत आज सभी बुद्धिजीवी समझते हैं। चूंकि आज राजनीति अक्सर जाति, धर्म, भाषा और पहचान के आधार पर विभाजन को बढ़ाती है, जिससे समाज...