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Samrat Model in Bihar (बिहार में सम्राट मॉडल)

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बिहार में सम्राट मॉडल (अभी तक अपने मोदी मॉडल, योगी मॉडल और नीतीश मॉडल आदि की बात सुनी थी, लेकिन मोदी मॉडल के गुजरात की तरह ही अब सम्राट मॉडल से बिहार को आशातीत लाभ मिल रहा है। तो प्रस्तुत है बिहार के सम्राट मॉडल पर एक कविता....... https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 बिहार में सम्राट मॉडल @ ,कमलेश पांडेय/कवि बदल रही है सोच यहाँ, बदल रहा परिवेश, जनसेवा का नया अध्याय, लिख रहा नया संदेश। गाँव-गाँव तक पहुँच रही अब, विकास की उजली किरण, जनता के विश्वास से खिलती, आशाओं की नई धरण। न टालमटोल, न कोई बहाना, काम बने पहचान, जनहित को सर्वोपरि रखकर, मिले सभी को सम्मान। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, हर क्षेत्र में नई उड़ान, संकल्पों को कर्म बनाकर, बढ़ता बिहार महान। युवा शक्ति को अवसर देकर, सपनों को आकार मिला, मेहनत, साहस और समर्पण से, नव बिहार का द्वार खुला। सम्राट मॉडल यही सिखाता, सेवा ही सबसे बड़ा धर्म, जनता के सुख-दुख में सहभागी, यही न...

Collaboration Camp: The Identity of a New Bihar (सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान)

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                सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान कवि : कमलेश पांडेय https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 न टालमटोल, न कोई बहाना, अब बदला है शासन का तराना। जनता के द्वार स्वयं प्रशासन, यही है सेवा, यही सुशासन। फाइलों की धूल झाड़ दी गई, लालफीताशाही हार गई। बिचौलियों के टूटे जाल, जनता को मिला अधिकार विशाल। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सहयोग शिविर बना विश्वास, जन-जन को मिला नया प्रकाश। अधिकारी बैठे गाँव-गाँव, सुनते हर पीड़ा, हर घाव। अब नहीं महीनों का इंतजार, तुरंत समाधान, तुरंत विचार। न्याय पहुँचता घर के द्वार, यही है विकास का असली सार। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कड़क नेतृत्व, दृढ़ संकल्प, जनहित जिसका सर्वोत्तम विकल्प। सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में, बिहार बढ़ रहा नव सृजन में। सत्ता नहीं केवल सम्मान, जनसेवा ही है उनकी पहचान। साफ नीयत, ईमानदार विचार, बना र...

I am a word merchant! (मैं शब्दों का दुकानदार हूँ!)

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मैं शब्दों का दुकानदार हूँ! https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 ✍️  कवि: कमलेश पांडेय मैं शब्दों का दुकानदार हूँ, विचारों का सौदागर समझो, मन की मिट्टी से गढ़ता हूँ, मुझको भावों का आगर समझो। मेरी पूँजी अक्षर-अक्षर है, सपनों का व्यापार नहीं, सच की लौ से दीप जलाता, झूठों का बाजार नहीं। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कभी कलम तलवार बन जाती, कभी मरहम का काम करे, कभी सवालों की आंधी बन, सत्ता से सीधा संवाद करे। मैं बेचूँ नहीं जमीर किसी का, न ही सत्य गिरवी रखता हूँ, जनमन की पीड़ा को सुनकर, शब्दों में उसको लिखता हूँ। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 मेरी दुकान सजी रहती है, अनुभव, संघर्ष, विश्वासों से, कुछ गीतों की खुशबू लेकर, कुछ आँसू के इतिहासों से। जो चाहे ले जाए मुझसे, आशा, चेतन, नई उमंग, मैं शब्दों का दुकानदार हूँ, विचारों का सौदागर संग। कलम मेरी पहचान बने, जनहित मेरा धर...