शक्ति के विकेंद्रीकरण और चुनाव सुधार का यक्ष प्रश्न
शक्ति के विकेंद्रीकरण और चुनाव सुधार का यक्ष प्रश्न # कमलेश पांडे/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार शक्ति के विकेंद्रीकरण के बिना ग्राम स्वराज और चुनाव सुधार की परिकल्पना व्यर्थ है। वजह यह कि क्रिमिनल जस्टिस और विलम्बित न्याय प्रणाली से लोकतांत्रिक संवाद की प्रक्रिया न केवल धीमी, बल्कि प्रभावित भी हो रही है। लगभग सभी बुद्धिजीवी इस बात को लेकर आगाह करते रहते हैं कि सत्तागत सांठगांठ से किसी का भी हित नहीं सधेगा। जनहित तो कदापि नहीं। इसलिए हर जिम्मेदार संस्था और अधिकारियों को चुनावों में स्टेट फंडिंग या फिर समतुल्य प्रावधानों के बारे में गम्भीरता पूर्वक सोचना होगा, विचार करना होगा। ऐसा इसलिए कि धनबल और बाहुबल बहुत कम लोगों के पास है, जिससे हमारा लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। समाज में बहुत से लोग हैं जिनके पास न धन है, न बाहुबल है, जिससे एक धनी अथवा बाहुबली व्यक्ति के चुनाव जीतने की संभावना अधिक बलवती हो जाती है। लिहाजा, राजनीतिक दल भी किसी भी तरह से चुनाव जीतने और सत्ता हथियाने की गरज से ऐसे लोगों को टिकट देकर आगे बढ़ाते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था ही सवालों के घेरे में खड़ी है। सच...