सरकार के सक्रिय उपायों के कारण लगने लगा है बैंक घोटालों का पता
सरकार के सक्रिय उपायों के कारण लगने लगा है बैंक घोटालों का पता
# ऐसे मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग में भी दर्ज की गई है वृद्धि
@ कमलेश पांडे/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
केंद्र में दूसरी बार सत्तारूढ़ हुई मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में बैंकों की ऐसी नकेल कसी की, धीरे धीरे कई सारे गड़बड़झाले प्रकाश में आते गए। मोदी सरकार पार्ट टू में ही बैंकों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। सरकार की पूरी कोशिश होगी कि बैंकों को अभिजात्य वर्गीय लोगों के शिकंजे से निकालकर आमलोगों की चौखट तक पहुंचा दिया जाए।
गत दिनों जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों द्वारा घोटालों की संख्या में वृद्धि के आरबीआई के आंकड़ों को मीडिया के कुछ हिस्सों में हाल के वर्षों में बैंकों में बढ़ते घोटालों की एक तस्वीर के रूप में चित्रित किया गया है। जिसके लिए मोदी सरकार नहीं, बल्कि मनमोहन सरकार या उनकी पूर्ववर्ती सरकारें जिम्मेदार हैं। मौजूदा सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह आंकड़ा रिपोर्टिंग के वर्ष का है, न कि घोटालों के होने या ऋण मंजूर होने या फिर वचन-पत्र इत्यादि के वर्ष का, जो कि कई मामलों में पुरानी अवधि का है। प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि घोटाले होने की वजह वित्तीय प्रणाली में ढिलाई थी, जिसका प्रणाली गत तरीके से समाधान मौजूदा सरकार द्वारा गठित व्यापक बैंकिंग सुधारों द्वारा किया गया है, जिससे कि अंतर्निहित कारणों पर ध्यान दिया जा सके और घोटालों का पता लगाने के लिए सक्रिय जांच कराई जा सके।
वर्तमान सरकार ने इस संबंध में कतिपय महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं, जिनमें निम्नलिखित कुछ प्रमुख कदमों को शामिल किया गया है। पहला, सरकार ने दो टूक निर्देश जारी किया है कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के सभी खातों, अगर उन्हें एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया गया है, की जांच बैंकों द्वारा संभावित घोटाले के दृष्टिकोण से की जाए। साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को भी सुझाव दिया गया है कि अगर कोई खाता एनपीए में बदल जाता है तो वे केन्द्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो से उधारकर्ता पर एक रिपोर्ट मांगे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जानबूझ कर घोटाला करने वालों के खिलाफ सक्रिय कदम उठाया गया है और पीएसबी द्वारा जानबूझ कर घोटाला करने वालों में से 2,881 लोगों या संस्थाओं के खिलाफ एफआईआर कराया गया है।
दूसरा, लेखा परीक्षा मानकों को लागू करने तथा लेखा परीक्षाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान सरकार ने एक स्वतंत्र नियामक के रूप में राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण की स्थापना की है। जिसके मार्फ़त आर्थिक अपराधियों को भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने के चलते भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने की घटनाओं को रोकने के लिए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 लागू किया गया है। यही वजह है कि पीएसबी को दिए गए सरकार के सुझावों के अनुरूप, वे 50 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण सुविधाओं का लाभ उठाने वाली कम्पनियों के प्रवर्तकों व निदेशकों तथा अन्य हस्ताक्षरकर्ताओं के पासपोर्ट की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर रहे हैं और संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों व कर्मचारियों का चक्रीय स्थानांतरण सुनिश्चित कर रहे हैं।
बता दें कि इस बारे में राज्यसभा में तारांकित प्रश्न संख्या 198 पूछा जा चुका है, जिसका उत्तर 01.01.2019 को दिया गया था। इसके प्रत्युत्तर में ही पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के माध्यम से उपरोक्त स्थिति स्पष्ट की गई है, जिससे सरकार को भी काफी राहत मिली है।
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