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राष्ट्रीय पक्षी मोर के जीवन से मानव समुदाय को मिलती हैं विभिन्न प्रेरणाएं, इसका हर पहलू अनुकरणीय

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राष्ट्रीय पक्षी मोर के जीवन से मानव समुदाय को मिलती हैं विभिन्न प्रेरणाएं, इसका हर पहलू अनुकरणीय @ डॉ दिनेश चन्द्र सिंह, आईएएस, डीएम, जौनपुर, यूपी। पक्षी राज मोर या मयूर, जो भारत का राष्ट्रीय पक्षी है, इसे किन कारणों से भारत का राष्ट्रीय पक्षी स्वीकार (आत्मसात) किया गया है, इसके पीछे की एक नितांत धार्मिक कहानी है जो रोचक, ज्ञानबर्द्धक और जिज्ञासा पूर्ण है| स्कन्द पुराण में वर्णित है कि पक्षीराज मोर भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय भगवान का वाहन है| कहा जाता है कि कार्तिकेय भगवान मन के बड़े चंचल थे| उन्होंने अपने मन को साधने के लिए बहुत प्रयास किया और मन की चंचलता को जीतने के लिए केन्द्रीय कृत रूप से साधना और प्रयास किया| पिता भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद उनके ऊपर था ही|  कहा जाता है कि उनकी इसी कमी को दृष्टिगत रखते हुए भगवान शिव ने कार्तिकेय जी को वाहन के रूप में मोर पक्षी चयनित करके दिया| क्योंकि पक्षीराज मोर अपने मन की चंचलता, प्रेम और सौन्दर्य के साथ-साथ अपने नृत्य से निज मन की चंचलता को साधता है और इसे साधकर ही किसी शुभ संकेत के आने का एक संकेतक ...