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शरारती दुनिया की क्षुद्र चालों को समझिए और इनकी मजबूत काट करते रहिए

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शरारती दुनिया की क्षुद्र चालों को समझिए और इनकी मजबूत काट करते रहिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भले ही अमेरिका पिछले एक सौ सालों से अंतरराष्ट्रीय महाशक्ति रहा है और उसने ग्रेट ब्रिटेन को पीछे धकेलकर यह महारत हासिल की है। वहीं, पूरी दुनिया में अपना एक छत्र राज बनाए रखने के लिए उसने हर उस देश को नष्ट कर दिया, जिसने उसे चुनौती दी, या फिर देने की हिमाकत की। उसके पूंजीपतियों की लॉबी इतनी मजबूत है कि अपने हथियार उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इनलोगों ने पूरी दुनिया में अशांति और रक्तपात बांटी है। भारत एक मात्र ऐसा देश है, जिसने रूस के सहयोग से उसे टक्कर दी और महफूज रहा। उदाहरण स्वरूप, जब बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में जब जापान ने उन्हें यानी अमेरिका-ब्रिटेन आदि की साम्राज्यवादी शक्तियों को चुनौती दी और भारत में सुभाष चन्द्र बोस जैसे उनके धुर विरोधियों को आर्थिक व सैन्य मदद दी तो उन्होंने परस्पर मिलकर जापान पर परमाणु बम गिराकर उसको घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। तब उनके इस पाप में सोवियत संघ (यूएसएसआर) भी भागीदार बना था।  लेकिन बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में जब...

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए वैश्विक प्रतिरक्षा कवच 'गोल्डन डोम' के ऐलान के प्रतिरक्षात्मक मायने को ऐसे समझिए

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए वैश्विक प्रतिरक्षा कवच 'गोल्डन डोम' के ऐलान के प्रतिरक्षात्मक मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दुनिया के थानेदार अमेरिका की थानेदारी पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस नजरिए से उसे कभी रूस की चुनौती मिल रही है तो कभी चीन की, कभी भारत ताल ठोक देता है तो कभी यूरोपीय संघ और कभी कभार ईरान, उत्तरी कोरिया जैसे सनकी देश भी। यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन की चिंता बढ़ चुकी है। इस लिहाज से कभी वह रूस को पटाने की कोशिश करता है तो कभी चीन को। वहीं उसके साथ भारत जो शातिराना खेल खेल रहा है, उस चक्रब्युह में अमेरिका दिन ब दिन उलझता जा रहा है। देखा जाए तो इराक में जो अमेरिकी रणनीति को सफलता मिली, वह अफगानिस्तान में नहीं मिली। वहीं ईरान में भी वह औंधे मुंह गिरेगा, क्योंकि उस पर रूस का बरदहस्त है जिसे चीनी समर्थन हासिल है। यही वजह है कि कभी दुनिया को युद्ध और संघर्ष बांटने वाला अमेरिका अब कथित शांति की बात करते हुए युद्ध से भाग रहा है। वहीं, अपने दुनियावी स्लीपर सेल को रूस, चीन, भारत और यूरोपीय संघ के सामने...