धूल भरी आंधी और बदलते मौसम की दोहरी मार झेल रहे दमा के मरीज
धूल भरी आंधी और बदलते मौसम की दोहरी मार झेल रहे दमा के मरीज
@ कमलेश पांडे/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
यदि आप दमा के मरीज हैं तो बदलते मौसम में सावधान रहिए। इस वक्त जो धूल भरी आंधी चल रही है, वह आपकी परेशानी बढ़ा सकती है। दरअसल, हाल ही में यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में तकरीबन सौ से भी ज्यादा लोगों ने अपनी फेफड़ों की स्वास्थ्य जांच एक निःशुल्क परामर्श शिविर में करवाई है, जिसके विश्लेषण के बाद यह तथ्य प्रकाश में आया है कि बदलते मौसम में धूल भरी आंधियों के चलने से श्वांस एलर्जी एवं बिगड़े हुए दमे के मरीजों की संख्या बढ़ी है, जिससे दिल्ली-एनसीआर वासियों का चिंतित होना स्वाभाविक है।
इस बारे में वरिष्ठ सांस एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के के पांडे, डॉक्टर अर्जुन खन्ना एवं डॉक्टर अंकित सिन्हा की टीम से परामर्श करने के बाद मरीजों ने फेफड़ों के संक्रमण, सांस फूलने, दमा एलर्जी एवं खर्राटे की बीमारियों से निजात पाने के उपाय पूछे एवं उपचार समझे। डॉक्टरों ने बताया कि इस शिविर के माध्यम से इन बीमारियों के कुछ नवीनतम ट्रेंड का भी पता चला है, जिसे संज्ञान में रखकर ही मरीजों को आवश्यक परामर्श आगे से दिए जाएंगे।
इस सम्बंध में हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ पी एन अरोड़ा ने कहा कि इस शिविर में अप्रैल के महीने में अचानक धूल भरी आंधियों के आने एवं हवा में धूल के कण, परागकण एवं अन्य प्रकार की गंदगियों की वजह से सांस के मरीजों में सांस फूलने और अस्थमा दमा के बिगड़ने एवं एलर्जी की समस्या पाई बढ़ी हुई पाई गयी है, जो जनस्वास्थ्य के नजरिए से राष्ट्रीय चिंता का विषय है। इसलिए मैंने निःशुल्क जांच व परामर्श शिविर के माध्यम से लोगों की श्वांस सम्बन्धी बीमारियों, एलर्जी, खर्राटे, फेफड़ा रोग, दमा रोग के मरीजों को देखा-परखा गया और बचाव के हर सम्भव उपाय समझाए गए, ताकि इन ब्याधियों के बारे में हर सम्भव जनचेतना विकसित हो सके। इसी नजरिए से लंग फंक्शन स्क्रीनिंग (स्पाइरोमीट्री) भी निःशुल्क की गयी।
इस दौरान मुरादनगर से आई नसरीन, जो काफी लंबे समय से दमे का इलाज करा रही थी और दवाइयां भी ले रही थी, किंतु उन्हें जांच के द्वारा पता चला कि उन्हें सीओपीडी की बीमारी है। इस सम्बन्ध में डॉक्टर अर्जुन खन्ना ने बताया कि इस तरह के चिकित्सा शिविरों से मरीजों को बहुत लाभ होता है। इसके माध्यम से वह अपने अंदर पनप रही बड़ी बीमारियों के बारे में पता लगा पाते हैं, जिससे मरीजों का बहुत बचाव होता है।
इस मौके पर मरीजों को निशुल्क कंप्यूटर द्वारा फेफड़ों की जांच स्पायरोमेट्री पीक फ्लो मीटर के द्वारा की गई। जबकि डाइटिशियन श्रीमती निधि आनंद एवं प्रियंका राघव द्वारा खानपान संबंधी नि:शुल्क परामर्श दिया गया।इसके अलावा, वरिष्ठ फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ डॉक्टर मुबारक ने मरीजों को फेफड़ों को स्वस्थ रखने सम्बन्धी व्यायाम चिकित्सा के बारे में बताया।
इस विषय में डॉ अंकित सिन्हा ने बताया कि इस शिविर में ऐसे भी मरीज मिले, जिन्हें सांस संबंधी बीमारियों की वजह से इन्हेंलर्स पर रखा गया था। किंतु उन्हें इनहेलर को सही तौर-तरीके से प्रयोग करने के बारे में विधिवत जानकारी नहीं थी। इसलिए ऐसे मरीजों को एक नई डिवाइस स्पेसर के माध्यम से इनहेलर को प्रयोग करना सिखाया गया। उन्होंने बताया कि इन्हेलर्स लेने के बाद कुल्ला एवं गरारा कारण अत्यंत आवश्यक होता है, अन्यथा गले में इन्फेक्शन (संक्रमण) होने का ख़तरा बना रहता है।
इस बारे में डॉक्टर के के पांडे ने बताया कि इस कैंप में हमें कुछ नए दमे के मरीज भी मिले, जिन्हें बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि उन्हें दमा है। इसके अलावा, सीजनल एलर्जी के मरीजों की भी बढ़ी हुई संख्या पाई गई। जबकि, डॉक्टर अर्जुन खन्ना ने बताया कि इस बदलते हुए मौसम में और धूल भरी आंधियों के बीच आवागमन करने वाले लोगों को एन-95 मास्क पहनकर रहना चाहिए। यही नहीं, जब धूल मिट्टी ज्यादा हो या धूल भरी आंधी चल रही हो तब घर से बाहर ना निकलें। साथ ही, अपने आप को हाइड्रेटेड रखें यानी कि खूब पानी पिएं।
यदि हम ऐसा करेंगे तो हम इस बदलते हुए मौसम के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। इन सावधानियों के बावजूद यदि तकलीफ बढ़ती है तो समय पर नियमित जांच कराएं एवं डॉक्टरी सलाह लें।
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