विश्व सनातन हिन्दू संसद सनातन धर्म की विशेषताओं से देश-दुनिया को अवगत कराने की मुहिम चलाएगा: रौचिका अग्रवाल

विश्व सनातन हिन्दू संसद सनातन धर्म की विशेषताओं से देश-दुनिया को अवगत कराने की मुहिम चलाएगा: रौचिका अग्रवाल

कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

नई दिल्ली। दुनिया की तीसरी बड़ी आबादी सनातन मतावलम्बियों की है, जो शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और समावेशी विकास में आस्था रखते हैं। हालांकि ईसाईयत और इस्लामी जगत के बीच एक अरसे से जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्विता चल रही है, उससे सनातन धर्म के सम्मुख अस्तित्व रक्षा का एक सवाल उतपन्न हो चुका है। क्योंकि धर्म परिवर्तन द्वारा सनातन मतावलंबियों को कोई ईसाई बनने का प्रलोभन दे रहा है तो कोई मुसलमान बनाने के लिए हर दांवपेंच लगा रहा है। यही वजह है कि विश्व सनातन हिन्दू संसद ने सनातन धर्म की विशेषताओं से देश-दुनिया को अवगत कराने का निश्चय किया है, ताकि सनातन धर्म के प्रति न केवल लोगों की आस्था बनी रहे बल्कि अन्य धर्मावलम्बी भी इस ओर आकर्षित हों। 

अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वीएसएचएस समान विचारों वाले संगठनों को एक छतरी के नीचे ला रहा है, ताकि वैश्विक क्षितिज पर साम्प्रदायिक सद्भाव और हिंदुत्व की रक्षा के साथ साथ सनातन धर्म को चट्टानी मजबूती प्रदान करने की एक जोरदार मुहिम चलाई जा सके। दरअसल विश्व सनातन हिन्दू संसद (वीएसएचएस) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो भारत के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, स्कॉटलैंड, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी अपनी गहरी जड़ें जमा रहा है, ताकि सनातन धर्म के सम्मुख आसन्न संकटों से निपटा जा सके। 

इस निमित्त वीएसएचएस अपनी अनुभवी टीम बना रहा है, जिसमें प्रख्यात बुद्धिजीवी, अधिवक्ता, समाजसेवी, दिग्गज उद्यमी, अपने-अपने फील्ड के सफल पेशेवर और सनातन धर्म के प्रति आस्थावान लोग और संगठन शामिल हैं। इस सभी को साथ लेकर वीएसएचएस राष्ट्रहित में कुछ बड़ी पहल कर रहा है ताकि विश्व शांति, सहिष्णुता व समावेशी विकास के लिए खतरा बनते जा रहे साम्प्रदायिक उग्रपंथियों और उनके पूंजीवादी प्रोत्साहकों, भले ही वो कोई देश ही क्यों न हों, से समय रहते ही निपटा जा सके। 

इस दिशा में वीएसएचएस के संस्थापक अध्यक्षा रौचिका अग्रवाल से उनके साधन और साध्य को लेकर मशहूर पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पांडेय ने ओखला औद्योगिक क्षेत्र, दिल्ली स्थित उनके मुख्यालय कक्ष में उनसे विशेष बातचीत की है, ताकि उनकी भावी योजनाओं और मुद्दागत प्राथमिकताओं से राष्ट्रीय जनमानस को अवगत कराया जा सके। 

यहां प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के कुछ खास अंश:- 

सवाल:- कट्टर हिंदुत्व की सोच आपमें कैसे पैदा हुई?

जवाब:- हमारी मां, नाना, मामा आदि राष्ट्रवादी और सनातनी सोच के हैं। उन्होंने गुलाम और आजाद भारत में देश व समाज के लिए बहुत कुछ किया है। आज भी मेरी माँ समाजसेवी के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती है। इसलिए आप मान सकते हैं कि यह हमारे डीएनए में है। देश को आजाद करवाने, स्वतंत्र भारत से भ्रष्टाचार मिटाने और अयोध्या में राममंदिर बनाने के आंदोलन चलाने में हमारे परिवार के कई लोग शामिल रहे हैं।

सनातन धर्म वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे उदात्त विचारों का पालक पोषक है। लेकिन पिछले 70-80 साल में हिंदुओं के खिलाफ, धर्म के आधार पर ही विभाजित भारतीय भूमि में से हिंदुस्तान की भूमि जो हिंदुओं को उनके हिस्से के रूप में हासिल हुई है, जो साम्प्रदायिक वैमनस्यता के बीज रोप दिए गए हैं, उसने हमें फिर से अपने अस्तित्व के बारे में सोचने को विवश कर दिया है। ऐसा इसलिए कि हम हिन्दू जाति व क्षेत्र के नाम पर बिखरे हुए हैं। हमें रणनीतिक रूप से बिखेरा जा रहा है। ऐसा करने वाले बुद्धिजीवियों व नेताओं आदि को गुप्त रूप से अंतरराष्ट्रीय सहायता मिल रही है। हमारे खिलाफ चल रहे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से भी हमें अवगत होना चाहिए। यदि हमलोग नहीं संभले तो कश्मीर, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे लोमहर्षक वाकये भविष्य में भी दुहराए जा सकते हैं। क्योंकि जहां-जहां भी मुस्लिमों का संख्या बल अधिक हुआ है, वहां से हिन्दू पलायन कर जाते हैं और सरकार कागजी खाना पूर्ति के अलावा कुछ नहीं कर पाती है, पीएम मोदी व सीएम योगी जैसे कुछेक अपवादों को छोड़कर, जिन्होंने ऐसी घटनाओं के खिलाफ त्वरित एक्शन लिया। 

हमने लगभग 30 साल पहले कश्मीरी हिंदुओं पर जुल्म देखे हैं और मूकदर्शक सरकारें भी। सिर्फ एक वोट बैंक के लिए हिन्दू नेता व उनके समर्थक कितने कमजोर हो चुके हैं कि वो सच्ची बात भी नहीं रख पाते हैं। यदि कोई आपको कहे कि अपनी संपत्ति और बीबी-बच्चों को छोड़कर चले जाइए तो कैसा लगेगा। लेकिन कश्मीरी हिंदुओं ने यह दंश झेला है। लगभग तीन दशकों से वो रिफ्यूजी कॉलोनियों में हैं। तभी हमने दृढ़ निश्चय कर लिया कि जब भी मौका मिलेगा, इस हालात को बदलने के लिए अपना अभिन्न योगदान देंगे और आज दे रहे हैं। क्योंकि हमारी रगों में भी उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और हिंदुत्व सेवियों का खून दौड़ रहा है जिन्होंने देश व समाज को सुख-शांति प्रदान करने के लिए न केवल बहुतेरे यत्न किये बल्कि आजीवन निज कर्म को ही समर्पित रहे। हमारी परवरिश भी उसी मर्यादित परिवेश में हुई, इसलिए हमलोगों ने उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का निश्चय कर लिया है। अब हमें उनके हाथ मजबूत करने हैं, ताकि हिंदुओं के अन्य अधूरे अरमान पूरे किए जा सकें।

सवाल:- आपकी प्राथमिकताएं क्या-क्या हैं।

जवाब:- हमने विश्व सनातन हिन्दू संसद का निर्माण सनातन समाज को संगठित करने एवं सही दिशा दिखाने के लिए किया है। इसके अंतर्गत देश तथा विदेश के समाजसेवी सहर्ष अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य अन्य समाजसेवियों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं को एक मंच पर लाने और उन्हें विभिन्न प्रकार की सहूलियतें प्रदान करना है, ताकि भारतीयता की पुनर्स्थापना हो, हिंदुत्व को संरक्षण मिले और पारस्परिक भेदभाव को देश व समाज से दूर किया जा सके। इस कार्य के अंतर्गत यदि हमलोगों को राज्य सरकारों, केंद्र सरकार व उनके मातहत अन्य अधिकारियों से वार्तालाप करने की आवश्यकता भी होगी तो विश्व सनातन हिन्दू संसद उस कार्य को पूर्ण करने हेतु हर मुमकिन प्रयास करेगा और अपने अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करेगा। 

विश्व सनातन हिन्दू संसद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
सनातन धर्म व संस्कृति का प्रचार प्रसार करेगा। यह  सनातन सभ्यता के अतीत पर आधारित मानव धर्म की विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रचारित करेगा। ताकि आपसी हिंसा और द्वेष की आग में झुलस रही दुनिया को कुछ राहत मिल सके। इस निमित्त हमारे लोग सतत सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा कि विश्व सनातन हिंदू संसद प्रतिवर्ष जरूरतमंद कन्याओं की शिक्षा व सामूहिक विवाह का आयोजन करेगी। कोरोना प्रकोप से अनाथ हुए बच्चों के परवरिश पर फोकस करेगी। वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए गांव गांव जाकर रोजगार के साधन मुहैया कराएगा। विश्व सनातन हिन्दू संसद सरकार से समान नागरिक संहिता कानून, जनसंख्या नियंत्रण कानून, हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का कानून लाने और व्यक्ति-व्यक्ति के बीच भेदभाव लाने के लिए बने सभी कानूनों को बदलने का आग्रह करेगी।

सवाल: आगे आपकी अन्य क्या क्या योजनाएं हैं।

जवाब: आम आदमी में सनातन सभ्यता व संस्कृति को विकसित करना, उनमें हिंदुत्व की भावना जगाना, अपनी धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए मर मिटने को तैयार रहना, अपने इतिहास बोध को जागृत करते हुए अपनी प्राचीन धरोहरों की रक्षा करने व उसके प्रति सजग रहने का भाव पैदा करना ही हमारा मूल लक्ष्य है। हम शास्त्र के साथ साथ शस्त्र की शिक्षा देने के पक्षधर हैं। लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगना महिलाओं से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए।

यह तभी हो पाएगा, जब हमलोग अपने बच्चों में पूजा पाठ की ललक पैदा करेंगे। उनमें जीवन के महत्वपूर्ण सोलह संस्कारों के बीज रोपेंगे। क्योंकि आज के बच्चे ही कल देश के भविष्य बनेंगे। इसलिए हरेक गांव में मैं एक ऐसा मंदिर बनवाना चाहती हूं जिसकी आय से गौशाला, पाठशाला, अस्पताल और बागवानी के कार्य किये जा सकें। इनकी सभी सेवाएं सेवादार के माध्यम से हों और इसके फल पूरे गांव वालों खासकर जरूरतमंद परिवारों को समान रूप से मिले। इसके लिए हमें भूमि, भवन और रोटेशनल पूंजी की दरकार होगी, जिसे आमलोगों के सहयोग से ही पूरा किया जाएगा। 

मेरी इच्छा है कि ऐसे सभी मंदिरों व उनसे जुड़ी चीजों का निर्माण नो प्रॉफिट, नो लॉस के आधार पर किया जाएगा। इसके पीछे का हमारा जो उद्देश्य है, वह यह कि पुरातन गुरुकुल प्रणाली जिंदा हो, आयुर्वेद प्रतिष्ठित हो और समतामूलक समाज का निर्माण हो, जो जातीय विद्वेष और घृणा भाव से दूर रहे। यह ऐसी पवित्र भावना है जो निश्चय ही फलीभूत होगी, क्योंकि हमलोग वसुधैव कुटुंबकम के आकांक्षी हैं। मेरी अनवरत कोशिश रहेगी कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो।

सवाल:- हिंदुत्व को सशक्त बनाने के लिए आप क्या क्या करेंगी। इसको नियंत्रित करने की आर्थिक व सामाजिक प्रवृति से आप कैसे निपटेंगी।

जवाब:- हिंदुत्व को सशक्त बनाने के लिए और इसे नियंत्रित करने वाली आर्थिक व सामाजिक प्रवृतियों से निपटने की हमारी पूरी तैयारी है। यह मैं या हमलोग से नहीं, सबलोग की समुचित भागीदारी व जिम्मेदारी से निभाई जाएगी। आपको पता होगा कि अखंड भारत को सोने की चिड़ियां कहा जाता था। यहां पर दूध की नदियां बहती थीं। यहां ज्ञान की अविरल गंगा सतत प्रवाहमान रहीं। 

लेकिन मुगलों और अंग्रेजों ने यहां ऐसी नीतियों को बढ़ावा दिया और आजाद भारत में भी देश को जिस तरह से दोनों हाथों से लूटा, उससे आम भारतीयों के आर्थिक हित प्रभावित हुए। साल दर साल अमीरी-गरीबी की खाई बढ़ी। आज महज 3 प्रतिशत लोग टैक्स देते हैं, इसे बढ़ावा देने के उपाय किये जायेंगे। ताकि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के राष्ट्रीय आह्वान को पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि सनातनियों ने, हिंदुस्तानियों ने कभी भी किसी पर आक्रमण नहीं किया। हमारे राजाओं में भी आपसी एकता कभी नहीं रही। हिंदुओं के जातिवाद को विदेशियों ने और गहरा किया, कराया जिससे आपसी एकता भी कभी अटूट नहीं हो पाई। हिंदुओं में जो तथाकथित धर्मनिरपेक्ष प्रवृति पैदा करने की कोशिश की गई, उसके वास्ते हमारे एजुकेशनल सिस्टम को बदल दिया गया। हमारे इतिहास से सुनियोजित छेड़छाड़ की गई। उसे विदेशियों के हितों के अनुरूप ढाला गया, जिससे हमारी मानसिकता पंगु हुई। हमारा देश 1943 में ही आजाद हो गया होता, लेकिन आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिभा से भी कुछ लोग कुंठित हो गए और उनसे छल किया। जो किसी राष्ट्रीय छल से कम नहीं है। 

बढ़ती जनसंख्या को 70 सालों तक बर्दाश्त क्यों किया गया और अब भी स्पष्ट कानून क्यों नहीं बन पा रहे हैं, यह सोचनीय बात है। हम दो हमारे दो का कानून सब पर लागू होना चाहिए, या फिर सबको इससे छूट मिलनी चाहिए। सबसे बेहतर यह होगा कि दो बच्चे से अधिक पैदा करने वाले लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जाए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र हित में आरएसएस महान कार्य कर रहा है। संघ की सादगी और किसी भी प्रकार की आपदा में उसका सहयोगी रुख देश का सबसे बड़ा सम्बल है। पीएम मोदी और सीएम योगी के हमलोग कृतज्ञ हैं। इनकी वजह से हमारी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय छवि सुधरी है और जो लोग कानून हाथ में लेकर खेलते थे, उनलोगों में भी भय का माहौल पैदा हुआ है।

उन्होंने कहा कि धर्म के हिसाब से कानून नहीं होनी चाहिए। इसलिए हमलोग समान नागरिक संहिता को जल्द से जल्द लागू करने की मांग करते हैं। हमारी यह भी मांग है कि गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। हिन्दू मंदिरों का अधिग्रहण बन्द किया जाए और अधिग्रहित मंदिरों को शीघ्र ही मुक्त किया जाए।

सवाल:- विरासत में मिली राष्ट्रवाद और सनातन सेवा की  भावना को आप अपने जीवन आदर्शों में कितना उतार चुकी हैं? इस संगठन के माध्यम से क्या करना और करवाना है।

जवाब:- विरासत में मिली राष्ट्रवाद और सनातन सेवा की  भावना को मैंने अपने जीवन में पूरी तरह से उतार लिया है और अब इसी पुनीत उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मुझे जीना मरना है। विश्व सनातन हिंदू संसद का गठन हमने भारत और विदेशों में रणनीतिक विचारकों और समर्पित क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से, हर जगह सनातनियों के गौरव और सुरक्षा को इंजेक्ट करने के लिए  एक सकारात्मक प्रयास भर किया है। अब हम सब इसे संभव बनाने के लिए जितनी जल्दी एकजुट हो जाएं, उतना ही अच्छा होगा और देश के लिए कल्याणकारी होगा।क्योंकि विश्व सनातन हिंदू संसद सनातन हिंदुओं खासकर भारतीयों व भारतीय मूल के लोगों के लिए जाति या संप्रदाय के किसी भी फिल्टर के बिना पूरे समुदाय के लिए एक समर्थन प्रणाली बनाने का अवसर है। निकट भविष्य में यह किसी भी 'हिंदू कारण' के लिए खड़े होने के लिए एक निष्पक्ष मंच बने, यही हम सबकी तमन्ना है। चाहे वह किसी व्यक्ति, समुदाय, समाज या यहां तक ​​कि हमारे राष्ट्र के लिए ही क्यों न हो। 

हमारा उद्देश्य अन्य हिंदू संगठनों को भी एक झंडे भगवा (केसरी) ध्वज के नीचे लाना है। क्योंकि यह संगठन हिंदुओं के द्वारा और हिंदुओं के लिए एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में जाना जाता है। अतः हमारी सामूहिक दृष्टि संगठन को मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ इकाई बनाना है जो हिंदू समाज को नुकसान पहुंचाने या दबाने की इच्छा रखने वालों के लिए कांटों के साथ एकजुटता के भगवा गुलाब में खिलेगा। हम अपने सपनों को साकार करने और पूरे भारत में लाखों हिंदू भाइयों और बहनों के सपनों को पूरा करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

विश्व सनातन हिन्दू संसद हमारे धर्म, संस्कृति, हिन्दुत्व और भारतीय मूल सभ्यता एवं सिद्धांतों को विश्व पटल पर विस्तार एवं संरक्षण करने के लिए समर्पित संगठन है। विश्व स्तर पर बहुत से लोग धर्म का अर्थ कुछ और ही समझते हैं। उन्हें सनातन धर्म का अर्थ पता नहीं है। वाकई यह धर्म एक परंपरागत वैदिक धर्म है। यहां धर्म का मतलब मौलिक कर्तव्य से है। सनातन का मतलब ही होता है चिर शाश्वत, प्राचीन, स्थायी। अर्थात जो चिर शाश्वत है, जो अनंत काल से चला आ रहा हो, जिसका अस्तित्व हमेशा कायम रहेगा, जो चराचर हो, जिसका न आदि हो और न अंत, वही तो सनातन है। इस प्रकार सनातन धर्म का मतलब शाश्वत कर्तव्य से है, जिसे करने में हम सभी भारतीय आगे रहते हैं। विश्व सनातन हिन्दू संसद भी हिन्दुत्व और सनातन धर्म की रक्षा एवं संप्रभुता को बनाये रखने के लिये पूर्ण रुप से कर्तव्यनिष्ठा के साथ सदैव तत्पर है। 

विश्व सनातन हिंदू संसद का उद्देश्य हिंदुओं की संस्कृति, परंपरा और धर्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलाना व संरक्षण करना है। सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिसका न प्रारम्भ है जिसका न ही कोई अंत है, उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। वैदिक या हिन्दू धर्म को इसलिए सनातन धर्म कहा जाता है क्योंकि यही एकमात्र धर्म है जो ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्त्व और ध्यान से जानने का मार्ग बताता है। परम मुक्ति का कांसेप्ट इसी धर्म की देन है। अन्य प्रमुख धर्मों से पूर्व हजारों साल पहले वेदों में इन सिद्धांतों को प्रतिपादित कर दिया गया था। वसुधैव कुटुम्बकम और विश्व का कल्याण हो, सिर्फ हमारे सनातन धर्म में ही बताया गया है। इसलिए विश्व सनातन हिंदू संसद को मजबूत करने के लिये हमलोगों को माइक्रो लेवल पर काम करने की आवश्यकता है। जब तक हमारा संगठन मजबूत नहीं होगा तब तक हमलोगों का जो संकल्प है वो पूरा नहीं हो पायेगा। हमलोगों को जमीनी स्तर पर काम करना है, गांव गांव तक अपने संगठन से लोगों को जोड़ना है। संगठन का घोषणा पत्र उन लोगों तक पहुंचाना होगा। तभी हमलोग अपने अपने सनातनी संस्कृति को बचाने में सही योगदान दे पायेंगे। तभी हमारी बातें भी दुनिया के कोने-कोने तक सुनी जायेगी।

वैसे तो देश में कई हिंदू संगठन हैं, पर हिंदू (सनातनी) पूरे विश्व में हैं। इसलिए एक ऐसे हिंदू संगठन की बहुत आवश्यकता है जो देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी रह रहे हिंदुओं को संगठित करे। यही कार्य हमारा संगठन "विश्व सनातन हिन्दू संसद" अंतराष्ट्रीय स्तर पर कर रहा है। अब हमारे देश और धर्म के खिलाफ जो कोई भी गलत कार्य करेगा, उसके खिलाफ आवाज़ उठाना जरूरी है। कहीं भी आवाज़ उठाने का काम कोई अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता, बल्कि उसके लिए एक संगठन चाहिए। यहां पर हम सब संगठित होकर अनेक नेक कार्य करेंगे और यही कार्य हमारे संगठन "विश्व सनातन हिन्दू संसद" को लोकप्रिय बनायेगा। इसके मजबूत होने से कोई हमें नीचा दिखाने का दुस्साहस नहीं कर पाएगा। 

इस बात में कोई दो राय नहीं कि सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन एवं प्रमाणित धर्म है। वर्तमान परिस्थिति को भांपते हुए इसके संरक्षण, संचालन, पालन, विकास एवं विस्तार की पूर्ण आवश्यकता है। 

# विरासत में मिली देशभक्ति और हिंदुत्व प्रेम की  भावना को अपने उदार जीवन का आधार बना चुकी हैं रौचिका अग्रवाल

@ जीवन परिचय: रौचिका अग्रवाल, संस्थापक अध्यक्ष, वीएसएचएस

वीएसएचएस की संस्थापक अध्यक्ष रौचिका अग्रवाल
मेरठ जनपद, उत्तरप्रदेश की मूल निवासी हैं और अब नेहरू एनक्लेव, दक्षिण दिल्ली में रहती हैं। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा सोफिया गर्ल्स कॉन्वेंट स्कूल, मेरठ में हुई। फिर इन्होंने मेरठ कॉलेज, मेरठ से बीएससी की। उसके बाद इग्नू से इंजीनियरिंग की। ततपश्चात आईएमटी, गाजियाबाद से एमबीए किया। वहीं इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स इंग्लैंड से पूरा किया। इन सबके बीच देश सेवा और सनातन सेवा का जब भी मौका मिला, पूरे दिल से करती रहीं।

इनके पिता परमात्मा शरण अग्रवाल मेरठ के मशहूर पेंट कारोबारी थे, जिनकी अपनी फैक्ट्री और शो रूम हुआ करता था। उनसे मिली संपन्नता को इन्होंने राष्ट्र सेवा में लगा दिया। इनकी माता चित्रा अग्रवाल आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़ी हुई हैं। इनके नाना प्रो एस एन मित्तल 
जगदीश शरण हिन्दू कॉलेज, अमरोहा के प्रिंसिपल थे। पहले वह स्वतंत्रता सेनानी रहे और बाद में हिंदुत्व समर्थक होने के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक भी बन चुके थे। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से उनके व्यक्तिगत सम्बन्ध थे, क्योंकि दोनों कानपुर कॉलेज, कानपुर से ही पढ़ाई की थी, सिर्फ संकाय और विषय अलग अलग थे।

बहुत कम लोगों को पता होगा कि जब अटल बिहारी बाजपेयी अपने पिताजी के साथ एलएलबी की पढ़ाई कानपुर से की, तो एक ही रूम में रहने की योजना बनाई और आसपास ही रहने लगे। प्रो मित्तल को बाजपेयी जी के पिता से गहरा लगाव था, क्योंकि दोनों एक ही कमरे में कई वर्षों तक रहे और शिक्षा पूरी की। 

प्रो मित्तल को पहलवानी और तैराकी का भी शौक था। एक बार एक ट्रिप पर उन्होंने 6 डूबते शिक्षकों को भंवर से बचाया था। वो ट्रिपल एम ए थे। एम ए, एम कॉम, एलटी और डीलिट की उपाधि उन्हें हासिल थी। उनके भाई विश्व विख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ आत्मा राम, डायरेक्टर, सीएसआईआर, आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले लोगों में एक हैं और डॉ क्षेत्रपाल भी आजादी के आंदोलनों और स्वतंत्र भारत में हुए सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन एवं रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से भी जुड़े रहे। 

इनकी नानी गुरु चन्द्र किरण आर्या दुर्गा वाहिनी की स्थानीय अध्यक्ष थीं। क्लासिकल सिंगर होने के नाते उन्हें गुरु की उपाधि प्राप्त थी। वो आर्य समाज की भी लोकल प्रमुख थीं। वो अमरोहा जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में भी प्रभात फेरियां या हिंदुत्व प्रोत्साहक जुलूस निकालने से नहीं हिचकती थीं। इनके मामा सुभाष जैन राममंदिर आंदोलन  के सहयोगी रहे। वहीं इनकी मां के मामा सुखमाल चंद जैन ने आपातकाल और राममंदिर आंदोलन  के सहयोगी रहे, जिसके चलते काफी यातनाएं झेलीं, लेकिन अपने दृढ़निश्चय पर अटल रहे। 

इस तरह से इनके परिवार ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान सत्याग्रह किया, जेल भरो आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल की रोटी भी खाई। एक रुपये, एक ईंट से शुरू हुए रामजन्मभूमि आंदोलन को परवान चढ़ाने से लेकर परिणाम दिलवाने तक में इनके परिवार का अभिन्न योगदान रहा।

आपको पता होना चाहिए कि इनका पूरा परिवार आर्यसमाजी है। आपको पता होगा कि राममंदिर आंदोलन हेतु किये गए मुकदमे में आर्य समाज भी एक पार्टी बना था। आर्य समाजियों ने भी इसमें अभिन्न योगदान दिया था। अयोध्या गोली कांड की वीडियो तक घर-घर दिखाई थी। इन सब चीजों को नजदीक से देखने, सुनने, समझने और इसी दौरान अपनी छोटी छोटी भूमिका निभाने का जो मौका मिला, उसने इनको हिंदुत्व का कट्टर समर्थक और राष्ट्रवादी बना दिया। हिंदुत्व प्रेम के साथ-साथ राष्ट्र प्रेम व देशभक्ति इनमें व इनके परिजनों में कूट-कूट कर भरी हुई है।

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