बिम्सटेक क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? इसकी उत्पत्ति और महत्व पर प्रकाश डालिए।
# बिम्सटेक क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
बिम्सटेक यानी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation- BIMSTEC) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे 7 सदस्य देश शामिल हैं। इस क क्षेत्रीय संगठन में दक्षिण एशिया के पाँच देश- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश- म्याँमार एवं थाईलैंड शामिल हैं। इसका गठन वर्ष 1997 में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच बहुमुखी तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। बिम्सटेक में शामिल देशों की कुल आबादी लगभग 1.5 बिलियन है तथा इनकी संयुक्त GDP 3.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
# बिम्सटेक का उद्देश्य क्या है? और इसकी उत्पत्ति कैसे हुई?
बिम्सटेक का उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच बहुमुखी तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। शुरुआत में इसमें 4 सदस्य शामिल थे, इसे BIST-EC (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1977 में म्यांमार इसमें शामिल हो गया और समूह का नाम बदलकर BIMST-EC कर दिया गया। वर्ष 2004 में नेपाल और भूटान को इसमें शामिल करने के बाद इसका नाम बदलकर 'बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल' बिम्सटेक कर दिया गया।
# बिम्सटेक का महत्त्व क्या है?
उल्लेखनीय है कि 1.7 बिलियन (विश्व की कुल जनसंख्या का 22%) की आबादी वाले बिम्सटेक देशों की संयुक्त GDP लगभग 5.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (2023) है।
इसलिए इसका विशेष महत्व है, जो इस प्रकार से है-
पहला, बिम्सटेक भारत की एक्ट ईस्ट नीति के साथ संरेखित है, जो हिंद महासागर और भारत-प्रशांत क्षेत्रों में भारत के व्यापार और सुरक्षा महत्त्व को बढ़ाता है।
दूसरा, यह क्षेत्रीय सहयोग के लिये एक उचित मंच के रूप में उभरा है, जो दक्षिण एशिया में सार्क (SAARC) के लिये एक व्यवहार्य विकल्प प्रस्तुत करता है।
तीसरा, यह दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच विशेष रूप से सुरक्षा मामलों और मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रबंधन में गहन सहयोग को बढ़ावा देने के लिये एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है। यह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिये क्षेत्रीय सहयोग के एक मंच के रूप में भी कार्य करता है। चतुर्थ, अमूर्त संस्कृति को बढ़ावा देने के तहत नालंदा विश्वविद्यालय में बंगाल की खाड़ी अध्ययन केंद्र (CBS) जैसी भारत की पहल का उद्देश्य क्षेत्र की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है, जबकि बिम्सटेक क्षेत्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।
पंचम, बिम्सटेक भारत की एक्ट ईस्ट नीति के अधिक अनुरूप है। यह भारत को हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद-प्रशांत में व्यापार एवं सुरक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।
छठा, उरी आतंकी हमलों के प्रत्युत्तर में वर्ष 2016 के दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान को अलग-थलग करने के भारत के प्रयासों के बाद, बिम्सटेक (BIMSTEC) एक बेहतर क्षेत्रीय सहयोग मंच के रूप में उभरा है, जो दक्षिण एशिया में सार्क का विकल्प प्रस्तुत करता है।
सप्तम, जैसे-जैसे चीन दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का विस्तार कर रहा है, भारत इस बढ़ती उपस्थिति को अपने क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिये एक चुनौती के रूप में देखता है। लिहाजा इसका विरोध करने के लिये, भारत बिम्सटेक में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और इसे क्षेत्रीय सहयोग के वैकल्पिक मंच के रूप में बढ़ावा दे रहा है। अष्टम, यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को एक साथ लाता है तथा क्षेत्रीय सहयोग के संवर्द्धन हेतु एक मंच प्रदान करता है।
# बिम्सटेक से संबंधित देशों के समक्ष क्या-क्या चुनौतियाँ हैं?
जहां तक बिम्सटेक से संबंधित देशों के समक्ष उतपन्न चुनौतियाँ की बात है तो ये निम्नलिखित हैं-
पहला, बिम्सटेक को असंगत नीति-निर्माण, कम परिचालन बैठकों और अपने सचिवालय के लिये पर्याप्त वित्तीय एवं मानव संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दूसरा, सीमित अंतर-क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी के तहत बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल की "BBIN कनेक्टिविटी परियोजना" को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है, जबकि कोशिशें जारी हैं। वहीं, वर्ष 2004 में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने के बावजूद, बिम्सटेक इस लक्ष्य से बहुत दूर है। क्योंकि FTA के लिये आवश्यक सात घटक समझौतों में से अब तक केवल दो ही लागू हुए हैं। बिम्सटेक के आर्थिक सहयोग के लक्ष्य के बावजूद, क्षेत्रीय व्यापार में कमी बनी हुई है। वर्ष 2020 में बिम्सटेक देशों के साथ भारत का व्यापार उसके कुल विदेशी व्यापार का केवल 4% था। भारत-म्याँमार सीमा को ‘एशिया की सबसे कम खुली सीमा’ (Asia's least open) कहा जाता है। बिम्सटेक सदस्य एक-दूसरे के मुकाबले गैर-सदस्य देशों के साथ अधिक व्यापार करते हैं।
तीसरा, समुद्री व्यापार और मात्स्यिकी क्षेत्र में चुनौतियाँ व्याप्त हैं। बंगाल की खाड़ी एक समृद्ध मत्स्यग्रहण क्षेत्र है, जहाँ वर्ष रूप से 6 मिलियन टन (विश्व के कुल के कुल का 7%) मत्स्यग्रहण किया जाता है। इसके अलावा, यहाँ व्यापक रूप से प्रवाल भित्तियाँ भी पायी जाती हैं। FAO के अनुसार, बंगाल की खाड़ी एशिया-प्रशांत में अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मत्स्यग्रहण हॉटस्पॉट में से एक है।
चतुर्थ, सदस्य देशों के बीच अन्य मुद्दे भी हैं, जो किसी चुनौतियों से कम नहीं हैं। जहां बांग्लादेश और म्याँमार के बीच रोहिंग्या शरणार्थी संकट व्याप्त है, वहीं भारत-नेपाल सीमा विवाद भी अहम है। उधर, सैन्य तख्तापलट के बाद म्याँमार में घरेलू राजनीतिक अस्थिरता व्याप्त है।
# बिम्सटेक की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिये सुझाए गए उपाय यानी आगे की राह क्या हैं?
जहां तक बिम्सटेक की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिये सुझाए गए उपाय यानी आगे की राह की बात है तो ये निम्नलिखित हैं- पहला, बिम्सटेक चार्टर को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसमें बिम्सटेक के उद्देश्य, संरचना और कार्यप्रणाली को परिभाषित करने वाला एक आवश्यक विधिक ढाँचा प्रदान किया गया है। यह सहयोग प्रयासों में स्थिरता एवं पूर्वानुमेयता को बढ़ावा देगा। दूसरा, बिम्सटेक मास्टर प्लान फॉर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के तहत इसे अंतिम रूप दिये जाने से क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे (सड़क, रेलवे, बंदरगाह आदि) में सुधार के लिये 10 वर्षीय रणनीति की रूपरेखा तैयार होगी। जिससे पारस्परिक कनेक्टिविटी बढ़ने से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, रोज़गार सृजन होगा तथा लोगों एवं वस्तुओं की आवाजाही सुगम होगी।
तीसरा, आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर बिम्सटेक कन्वेंशन के तहत इस समझौते में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये बड़े खतरों तथा अंतर्राष्ट्रीय अपराध से निपटने में सहयोग को बढ़ावा देने की क्षमता है। जो सूचना साझाकरण और साक्ष्य एकत्र करने की सुविधा प्रदान करके, यह कानून प्रवर्तन क्षमताओं को मज़बूती प्रदान करेगा। चतुर्थ, आईयूयू (IUU) मत्स्यग्रहण पर अंकुश लगाने के लिये एफएओ (FAO) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) की बंगाल की खाड़ी बड़े समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (BOBLME) जैसी परियोजनाओं को लागू करने की आवश्यकता है। पंचम, बिम्सटेक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा (TTF) के तहत सदस्य देशों के बीच तकनीकी अंतराल को समाप्त करने के लिये श्रीलंका स्थित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा (TTF) क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देते हुए प्रमुख क्षेत्रों में ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करने की सुविधा प्रदान करेगा।
छठा, राजनयिक अकादमियों/प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग आपसी राजनयिक संबंधों को बढ़ाएगा और भविष्य के नेतृत्त्वकर्त्ताओं के बीच क्षेत्रीय चुनौतियों तथा अवसरों की साझा समझ को बढ़ावा देगा। यह क्षेत्रीय एकता एवं सामुदायिक भावना को प्रोत्साहित करता है।
सातवां, संस्थागत ढाँचा विकसित करने की योजना के तहत भारत को क्षेत्र में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिये संगठनात्मक व्यवस्था बनाने पर विचार करना चाहिये। इस दृष्टि से सार्क के अंतर्गत दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU) के समान बिम्सटेक हेतु सफल संस्थान स्थापित करना भी आवश्यक है। आठवां, नागरिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक पार्लियामेंटेरियन फोरम, छात्र विनिमय कार्यक्रम और बिज़नेस वीज़ा योजना जैसी पहल घनिष्ठ संबंधों तथा क्षेत्रीय समुदाय की भावना को बढ़ावा दे सकती हैं।
# बिम्सटेक चार्टर की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल ने गत वर्ष 20 मई, 2024 को समूह के चार्टर के लागू होने के साथ ही एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है, जो इस प्रकार है:- पहला, अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के तहत बिम्सटेक को एक विधिक इकाई के रूप में आधिकारिक दर्ज़ा प्राप्त है, जिसके परिणामस्वरूप इसे कूटनीति एवं सहयोग के मामलों पर अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ प्रत्यक्ष तौर पर वार्ता करने का अधिकार है। दूसरा, साझा लक्ष्य के दृष्टिगत यह चार्टर, बिम्सटेक के उद्देश्यों को रेखांकित करता है, जो सदस्य देशों के बीच विश्वास एवं मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने तथा बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास व सामाजिक प्रगति में तेज़ी लाने पर केंद्रित है। तीसरा, संरचित संगठन के तहत बिम्सटेक के संचालन हेतु एक स्पष्ट रूपरेखा स्थापित की गई है, जिसमें शिखर सम्मेलन, मंत्रिस्तरीय और वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर नियमित बैठकों की रूपरेखा तैयार की गई है।
चतुर्थ, सदस्यता का विस्तार रणनीति के तहत यह चार्टर नए देशों को बिम्सटेक में शामिल होने और अन्य देशों को पर्यवेक्षकों के रूप में भाग लेने की अनुमति देकर भविष्योन्मुखी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। पंचम, सहयोग के क्षेत्रों का पुनर्गठन करते हुए इनकी संख्या घटाकर 7 कर दी गई है और प्रत्येक सदस्य-राज्य एक क्षेत्र के लिये नेतृत्वकर्त्ता के रूप में कार्य करेगा। जो इस प्रकार है:- पहला, व्यापार, निवेश और विकास के लिये बांग्लादेश। दूसरा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के लिये भूटान। तीसरा, ऊर्जा के साथ-साथ सुरक्षा के लिये भारत। चतुर्थ, कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिये म्याँमार। पंचम, पीपल-टू-पीपल कनेक्ट के लिये नेपाल। छठा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिये श्रीलंका। सप्तम, जुड़ाव (कनेक्टिविटी) के लिये थाईलैंड। इस प्रकार बिम्सटेक चार्टर का लागू होना समूह के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, जो इसे एक कानूनी स्वरुप और संरचित राजनयिक संवाद में शामिल होने की क्षमता प्रदान करता है। यह विकास बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के आर्थिक और भूराजनीतिक एकीकरण के लिये आवश्यक है तथा अपने पड़ोस एवं एक्ट ईस्ट नीति को मज़बूत करने के भारत के प्रयासों के अनुरूप है।
# आखिर सार्क से कैसे अलग है बिम्सटेक ?
बिम्सटेक की शुरुआत वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा द्वारा हुई। इसके सदस्य देश में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्याँमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड शामिल हैं। बिम्सटेक भौगोलिक से रूप से केंद्रित अंतर्क्षेत्रीय (दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया) संगठन है। इसके अंतर-क्षेत्रीय व्यापार में एक दशक में लगभग 6% की वृद्धि हुई है। इसकी प्रमुख शक्तियाँ यह है कि यह सार्क देशों को आसियान से जोड़ता है, और सदस्यों के बीच यथोचित मैत्रीपूर्ण संबंध को बढ़ावा देते हुए 14 क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग कायम करता है। इसका सचिवालय ढाका, बांग्लादेश है। इसका नेतृत्व समूह में थाईलैंड और भारत की उपस्थिति के साथ शक्ति का संतुलन है।
वहीं, सार्क की शुरुआत 1985 में ढाका में सदस्यों द्वारा चार्टर को अपनाने के साथ हुई। इसके सदस्य देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं। यह भौगोलिक से रूप से केंद्रित क्षेत्रीय (दक्षिण एशिया) संगठन है। जिसका अंतर-क्षेत्रीय व्यापार इसकी स्थापना के बाद से लगभग 5% की वृद्धि पर सिमटा हुआ है। इसकी प्रमुख शक्तियाँ लंबे समय से चला आ रहा क्षेत्रीय मंच है, जो कई समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुका है। इसका सचिवालय- काठमांडू, नेपाल में है। इसका नेतृत्व छोटे सदस्य देशों द्वारा भारत को 'बिग ब्रदर' मानकर किया जाता है।
इस बात में कोई दो राय नहीं कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग के लिये प्राथमिक मंच के रूप में सार्क की जगह लेने में बिम्सटेक की क्षमता इस मायने में महत्वपूर्ण है कि भारत का पूरा सहयोग इसे प्राप्त है। यही वजह है कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग के अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में बिम्सटेक प्रभावी साबित हुआ है। उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय सहयोग के लिये बिम्सटेक का महत्त्व जगजाहिर है।क्योंकि बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल यानी बिम्सटेक को बढ़ावा देकर भारत ने भारत-प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के दांवपेचों से इतर एक बड़ी व सकारात्मक पहल तेज कर दी है। बिम्सटेक अपने सदस्य देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता की ओर बढ़ रहा है।
इस बात में कोई दो राय नहीं कि बिमस्टेक भारत-प्रशांत क्षेत्र और हिन्द महासागर क्षेत्र में सार्क की तरह ही एक समानांतर संगठन है, जिसे भारत का वरदहस्त प्राप्त है। इन दोनों संगठनों के बीच बहुत सारी समानताएँ और असमानताएँ हैं? लेकिन बिम्सटेक नामक नए संगठन के बनाए जाने से भारतीय विदेश नीति ने अपने उस निहित उद्देश्य को प्राप्त कर लिया है, जिसका मतलब पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे देशों को भारत के पड़ोसी देशों से अलग थलग करना है। इसलिए भारत के नेतृत्व में क्षेत्रीय सहयोग के लिये बिम्सटेक का महत्त्व जगजाहिर है।
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