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अगस्त 15, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

On the occasion of the 80th anniversary of independence, prominent citizens of Moradabad were sensitized about cancer.

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                                Pub-6262725213669814 आजादी की 80वीं वर्षगाँठ पर मुरादाबाद के प्रतिष्ठित लोगों को कैंसर की बीमारी के दृष्टिगत जागरूक किया # प्रेस क्लब मुरादाबाद और शारदा केयर हेल्थ सिटी ग्रेटर नोएडा की यादगार पहल @ राजनैतिकदुनिया मुरादाबाद। कहते हैं जहां चाह, वहां राह। कुछ ऐसा ही दिखा मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश में, जहां स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कैंसर की रोकथाम विषयक चर्चा हुई। इस परिचर्चा पर उक्त कहावत बिल्कुल फिट बैठती है। उल्लेखनीय है कि आजादी की 80वीं वर्षगाँठ पर प्रेस क्लब मुरादाबाद और शारदा केयर हेल्थ सिटी ग्रेटर नोएडा की एक सेवाभावी पहल के माध्यम से मुरादाबाद के प्रतिष्ठित पत्रकारों और गणमान्य लोगों को कैंसर की बीमारी के दृष्टिगत जागरूक किया गया। मिली जानकारी के मुताबिक, स्थानीय नामचीन पत्रकार स्वर्गीय "श्रीमती उषा अग्रवाल प्रेस क्लब भवन", कंपनी बाग मुरादाबाद में प्रेस क्लब  मुरादाबाद (रजिस्टर्ड), मुरादाबाद मंडल द्वारा आयोजित सम्मान एवं स्वतंत्रता दिवस समारोह 2...

Serious concern expressed over the proposed new rules for the appointment of Assistant Professors in the universities of Bihar

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बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति हेतु प्रस्तावित नई नियमावली पर जताई गई गंभीर चिंता     (client=ca-pub-6262725213669814) @ पुष्पांशु पांडेय, नागरिक पत्रकार, बिहार बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालय के अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष व कार्यकारिणी की एक आपातकाल बैठक पटना में संपन्न हुई। इसमें बिहार विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति हेतु प्रस्तावित नई नियमावली पर गंभीर चिंता जताई गई। साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ क्रांतिकारी मुहिम के तहत चरणबद्ध आंदोलन करने की तैयारी शुरू की गई।  बैठक में अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ की एकता जिंदाबाद का जयघोष करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया गया है, जो गत एक सप्ताह से जारी है। बताया जाता है कि  बिहार सरकार द्वारा सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए प्रस्तावित नई नियमावली/ड्राफ्ट को लेकर अभ्यर्थियों के बीच गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। अभ्यर्थियों को आशंका है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रचलित नियमों एवं मानकों क...

The pilgrimage to Lord Pashupatinath is a bridge of faith, culture and India-Nepal friendship: Dr. Dinesh Chandra

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भगवान पशुपतिनाथ की यात्रा है आस्था, संस्कृति और भारत-नेपाल मैत्री का सेतु: डॉ दिनेश चंद्र @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 उत्तरप्रदेश के निवर्तमान आईएएस अधिकारी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद व जनसंवेदनाओं के मशहूर अभिव्यक्ति कर्ता लेखक डॉ दिनेश चंद्र ने गत दिनों नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भगवान पशुपतिनाथ तीर्थस्थल की यात्रा की। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मुख्य महंत जी का आशीर्वाद लिया और भारत राष्ट्र की ओर से बाबा काशी विश्वनाथ और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी, अयोध्या का अंग वस्त्रम उन्हें भेंट करते हुए सम्मानित किया। वहीं मुख्य महंत जी ने भी तीर्थस्थल पटका प्रदान करके डॉ दिनेश चंद्र को सम्मानित किया और अपना आशीर्वाद दिया।  उल्लेखनीय है कि इस आशय की वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जब "राजनैतिकदुनिया" ने उनसे मोबाइल पर संपर्क किया तो अपनी परम पावन तीर्थयात्रा का अनुभव देश व समाज से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत...

Yaksha Question: Will the goal of Developed India 2047 be achieved in 2075?

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यक्ष प्रश्न: क्या विकसित भारत 2047 का लक्ष्य 2075 में हासिल होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 यदि आप विकसित भारत 2047 का स्वप्न देख रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए, क्योंकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने यह तर्क दिया है कि यदि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर, उत्पादकता और रोजगार सृजन की गति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तो भारत को "विकसित देश" बनने में 2047 के बजाय 2075 तक का समय लग सकता है।  बता दें कि यह कोई आधिकारिक सरकारी अनुमान नहीं है, बल्कि कतिपय अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए एक आर्थिक विश्लेषण पर आधारित दृष्टिकोण मात्र है, जो सत्य के निकट है या परे, यह भविष्य के गर्भ में है। हाँ, इतना जरूर है कि इससे विपक्ष को सत्तापक्ष की खिल्ली उड़ाने का एक मौका जरूर मिल गया है। दरअसल, इस संदर्भ में चर्चित अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने भी कहा कि यदि वर्तमान गति ऐसी ही बनी रही, तो विकसित भारत का लक्ष्य 2047 तक हासिल करना कठिन हो सकता ह...

Bankipur By-Election 2026: Sudden change in BJP candidate raises burning questions?

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बांकीपुर उपचुनाव 2026: भाजपा उम्मीदवार के यकायक बदलाव से उभरने लगे सुलगते सवाल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 भोजपुरी में एक कहावत है- लइका मालिक, बूढ़ दीवान, मामला बिगड़े साँझ बिहान। यानी कि जिस घर का लड़का मालिक होता है और बूढ़ा व्यक्ति दीवान मतलब सलाहकार की भूमिका में आ जाता है तो वहां अच्छे और कार्यकुशल सुझावों पर भी विलंब से निर्णय होने के चलते मामला साँझ यानी शाम से सुबह तक कभी भी उलझ यानी बिगड़ जाता है। यदि पुरानी कुछ बातों को भूला भी दिया जाए तो हाल ही में बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) का नामांकन वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की काफी किरकिरी हुई है।  चूंकि उनका चयन प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर यकायक हुआ है, इसलिए उँगली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ भी उठी। बात इतनी सी नहीं है, बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उनके चहेते मुख्यमंत...

In the world of advertising, AI has posed an exciting challenge to human creativity.

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            🌹राजनैतिकदुनिया प्रायोजित परिशिष्ट 🌹 विज्ञापन की दुनिया में एआई ने इंसानी क्रिएटिविटी के समक्ष पैदा की एक उत्साहबर्द्धक चुनौती @ डॉ. संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 विज्ञापन की लोकलुभावन दुनिया ने हमेशा से ही अपने समय की तकनीकी तरक्की को प्रदर्शित किया। यह अपने दौर में हुए बदलावों का प्रतिबिंब भी समझा गया, जो यह दिखाता रहा कि तकनीकी दुनिया कितनी तेजी से हमारे जनजीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही है। पहले मौखिक प्रचार-प्रसार में सहयोगी बने यंत्रों, फिर हाथ से बने पोस्टरों और अब अखबारों में छपने वाली चित्ताकर्षक तस्वीरों से लेकर डिफरेंट फोटोग्राफी के विभिन्न प्रासंगिक अंदाजों, टीवी विज्ञापनों और डिजिटल मार्केटिंग तक के हर नए आविष्कार ने, देश-प्रदेश के समाज के समक्ष व्यवहारिक उत्पादों और प्रासंगिक विचारों को पेश करने के तरीके को बदल दिया। बहरहाल इस बदलाव को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आगे बढ़ा रहा है।  सवाल है कि...

After all, when will you understand the role of painting and fine arts in child development in the digital AI era?

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      🌹राजनैतिकदुनिया प्रायोजित परिशिष्ट 🌹 आख़िर डिजिटल एआई युग में बाल विकास में चित्रकला एवं फाइन आर्ट्स की भूमिका को कब समझिएगा? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट, दिल्ली-एनसीआर मानव सभ्यता के विकास का इतिहास इस बात का साक्षी है कि कला ही मनुष्य की मूलभूत अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट माध्यम रही है। आदिमानव द्वारा गुफाओं की दीवारों पर बनाए गए चित्र केवल सजावट नहीं थे, बल्कि वे तत्कालीन अनुभव और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम थे। यही परंपरा समय के साथ विकसित होकर चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और अन्य ललित कलाओं के रूप में मानव संस्कृति का अभिन्न अंग बन गई। आज भी समाज की सांस्कृतिक समृद्धि का मूल्यांकन उसकी कला और साहित्य से ही किया जाता है। चित्रकला केवल मनोरंजन या अवकाश का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का आधार है। इसलिए स्वाभाविक सवाल है कि आख़िर डिजिटल एआई युग में बाल विकास में चित्रकला एवं फाइन आर्ट्स की भूमिका को कब समझ...