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जानिए, दलित राजनीति अब अधिक विभाजित और विभिन्न दलों के बीच सन्तुलन बनाने वाली क्यों हो गई है?

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जानिए, दलित राजनीति अब अधिक विभाजित और विभिन्न दलों के बीच सन्तुलन बनाने वाली क्यों हो गई है? "दलित राजनीति अब अधिक विभाजित और विभिन्न दलों के बीच सन्तुलन बनाने वाली हो गई है, जहां विभिन्न दल अपनी अपनी नीतियों और नैरेटिव के जरिए इस वर्ग को साधने का प्रयास करते हैं।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत में दलित राजनीति किसी एक नेता या एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग राज्यों में अलग सामाजिक समूह, दलित उप-समुदाय और राजनीतिक गठबंधन अलग नेताओं को प्रभाव देते हैं। भले ही अपने अपने जमाने में बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर, जगजीवन राम और मान्यवर कांशीराम ने दलित राजनीति की जो राष्ट्रीय साख स्थापित की, उस पर दावेदारी को लेकर दलित नेता, अन्य दलित नेताओं की राह में सियासी कांटे बिछाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जिससे राज्यवार अलग अलग नेता मजबूत हो रहे हैं और उन्हें उनके ही राज्य में दूसरे दलित नेता भी कड़ी चुनौती दे रहे हैं।  इस प्रकार  दलित राजनीति अब अधिक विभाजित और विभिन्न दलों के बीच सन्तुलन बनाने वाली हो गई है, जहां विभिन्न दल अपनी...

मुख्यमंत्री शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संस्थाएँ उससे कमजोर नहीं होनी चाहिए!

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मुख्यमंत्री शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संस्थाएँ उससे कमजोर नहीं होनी चाहिए: पंडित गोविंद बल्लभ पंत            (10 सितंबर को जन्मदिन पर विशेष) "समकालीन राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता है: विनोद पंत, भाजपा नेता व समाजसेवी, वसुंधरा, गाजियाबाद" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन राजनीति में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. गोविंद बल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता है, क्योंकि  यह केवल इतिहास को याद करने का विषय नहीं है बल्कि वर्तमान को और सुधारने का संकल्प भी हो सकता है। यह कहना है उनके पौत्र विनोद पंत का, जो खुद भाजपा नेता व समाजसेवी, वसुंधरा, गाजियाबाद  हैं। समकालीन राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता के बारे में विनोद पंत बताते हैं कि  स्वतंत्रता सेनानी से मुख्यमंत्री तक का सफर करने वाले पंत आज की राजनीति के लिए सुशासन, संघवाद, भूमि-सुधार, प्रशासनिक अनुशासन और राजनीतिक सहमति का एक उपयोगी राजनीतिक मॉडल प्रस्तुत करत...

बिहार के मुख्य सचिव-डीजीपी संग विधायक प्रशांत किशोर की वायरल फोटो देख दिल्ली के भाजपा रणनीतिकारों की बढ़ी बेचैनी

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बिहार के मुख्य सचिव-डीजीपी संग विधायक प्रशांत किशोर की वायरल फोटो देख दिल्ली के भाजपा रणनीतिकारों की बढ़ी बेचैनी  (Viral photo of Prashant Kishor with Bihar's Chief Secretary and DGP sparks anxiety among BJP strategists in Delhi.) "बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर अभी संख्या में छोटे हैं, लेकिन अपने राजनीतिक वजन को प्रशासनिक पहुंच में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।” और सरकार के लिए संदेश है कि, “एक विधायक को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक कमजोरी नहीं, बल्कि जवाबदेह शासन की ताकत है।” इसलिए इस फोटो को सत्ता में प्रशांत किशोर की एंट्री कहना अतिशयोक्ति होगी; लेकिन इसे प्रशासनिक पहुंच और राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने की उनकी शुरुआती रणनीति कहना काफी हद तक उचित है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार संग ब्राह्मण विधायक प्रशांत किशोर की वायरल फोटो देख दिल्ली के ओबीसी राजनेताओं व उनके राजदारों के होश उड़ चुके हैं। उनकी बेचैनी अब देखते-सुनते ही बनती है। बिहार में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बने कई माह बीत चु...

......तो अब सोनिया गांधी ने 'विवादास्पद' किताब लिखकर छीन ली मोदी-भागवत की चैन!

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......तो अब सोनिया गांधी ने 'विवादास्पद' किताब लिखकर छीन ली मोदी-भागवत की चैन @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पूर्व कांग्रेस अध्यक्षा और निवर्तमान यूपीए संयोजिका श्रीमती सोनिया गांधी की प्रस्तावित किताब ‘Belonging: A Journey of Love in India’ को लेकर विवाद पैदा हो गया है। यह विवाद इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि मामला सिर्फ किताब के प्रकाशन का नहीं, बल्कि मोदी सरकार, RSS, चीन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव के आरोपों तक पहुंच गया है। लिहाजा, इसके विभिन्न पहलुओं की चर्चा लाजिमी है। बता दें कि यह किताब सोनिया गांधी का संस्मरण है, जिसमें उनके जीवन, राजीव गांधी से विवाह, भारत में उनके अनुभव और लगभग छह दशकों के सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को उनके दृष्टिकोण से रखा गया है। खबर है कि अमेरिका में इसे Alfred A. Knopf से 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। इससे साफ है कि भारत विरोधी एजेंडा उसके कथित मित्र देश अमेरिका में ही तैयार होने वाला है। मुंह में राम, बगल में छुरी ही अमेरिकी विदेश नीति की सफलता का सार है, जिसके पीछे डीप ...

Bankipur By-Election 2026: Sudden change in BJP candidate raises burning questions?

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बांकीपुर उपचुनाव 2026: भाजपा उम्मीदवार के यकायक बदलाव से उभरने लगे सुलगते सवाल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 भोजपुरी में एक कहावत है- लइका मालिक, बूढ़ दीवान, मामला बिगड़े साँझ बिहान। यानी कि जिस घर का लड़का मालिक होता है और बूढ़ा व्यक्ति दीवान मतलब सलाहकार की भूमिका में आ जाता है तो वहां अच्छे और कार्यकुशल सुझावों पर भी विलंब से निर्णय होने के चलते मामला साँझ यानी शाम से सुबह तक कभी भी उलझ यानी बिगड़ जाता है। यदि पुरानी कुछ बातों को भूला भी दिया जाए तो हाल ही में बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) का नामांकन वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की काफी किरकिरी हुई है।  चूंकि उनका चयन प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर यकायक हुआ है, इसलिए उँगली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ भी उठी। बात इतनी सी नहीं है, बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उनके चहेते मुख्यमंत...

Burning questions and political implications of the Cockroach Janata Party's Parliament march

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कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च से सुलगते सवाल और राजनीतिक निहितार्थ https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का "संसद चलो" आह्वान केवल एक विरोध मार्च नहीं, बल्कि केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की एक राजनीतिक रणनीति है। खासकर जिस तरह से इस आंदोलन को छात्र आंदोलन का स्वरूप दिलवाया जा चुका है, वह डीप स्टेट के इशारे पर बनी विपक्ष की शातिर सरकार घेरो रणनीति का कमाल भी करार दिया जा रहा है। देखा जाए तो संसद के मानसून सत्र के दौरान गत 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे और कूच किया, वह बिल्कुल संगठित राजनीतिक आंदोलन के तर्ज पर हुआ।  मजे की बात तो यह कि संसद के निकट पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जो पूर्व प्रायोजित झड़प हुई और उसके बाद हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, इससे यह संसद मार्च राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियां बन गया। बड़े बड़े न्यूज़ चैनल्स और...

The political significance of the NDA MPs' 'Mangal Milan' session

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एनडीए सांसदों के सत्रीय 'मंगल मिलन' के सियासी मायने https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र में पिछले 12 वर्षों से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार इन दिनों पुनः उस एकजुट विपक्ष के निशाने पर है, जिसे वह अबतक चुनावी सियासी पाट पर पछाड़ते आई है। लेकिन जिस तरह से बहुरूपिया विपक्ष कभी मुसलमानों के छद्म वेश में, कभी किसानों के रूप में और कभी छात्रों के छद्म वेश में जिस तरह से मोदी सरकार को घेरने पर तुला हुआ है, उसके पीछे विदेशी हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी सरकार सबसे जूझ रही है! हाल ही में छात्र आंदोलन की कथित सफलता से घबराई सरकार ने जिस तरह से अपने ओबीसी रणनीतिकार शिक्षा मंत्री की राजनीतिक बलि चढ़ाई है, और इससे उत्साहित कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने जिस घमंड का प्रदर्शन किया, उससे विपक्ष उत्साहित है। यही वजह है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधे निश...