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शिक्षा के लिए एक समान राष्ट्रनीति क्यों नहीं? राज्यों से विमर्श कर बनाइए!

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शिक्षा के लिए एक समान राष्ट्रनीति क्यों नहीं? राज्यों से विमर्श कर बनाइए! (Why not have a uniform national policy for education? Formulate one in consultation with the states!) "भारत “एक समान शिक्षा राष्ट्रनीति” पर गंभीरता से विचार करे। लेकिन यहां ‘एक समान’ का अर्थ समझना होगा। इसका अर्थ यह नहीं कि दिल्ली में बैठकर पूरे देश के लिए एक ही पाठ्यपुस्तक, एक ही भाषा, एक ही परीक्षा और एक ही शिक्षा मॉडल तय कर दिया जाए। भारत की शक्ति उसकी विविधता में है। इसलिए शिक्षा की राष्ट्रीय नीति थोपने की नहीं, सहमति बनाने की परियोजना होनी चाहिए।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। संविधान ने देश को संघीय ढाँचा दिया है, लेकिन नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देने का संकल्प भी उतनी ही मजबूती से रखा है। फिर सवाल उठता है—जब भारत के हर बच्चे का भविष्य समान रूप से महत्वपूर्ण है, तो उसकी शिक्षा की गुणवत्ता, अवसर और दिशा राज्यों के बीच इतनी अलग-अलग क्यों हो? कहीं सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, कहीं आधारभूत सुविधाओं का अभाव है, ...