फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए, समझिए कैसे बनेगा?
फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए, समझिए कैसे बनेगा? Make the Farakka Agreement a boon for Bihar-Jharkhand, not a curse. Understand how this will be done? "असली सवाल “फरक्का रहे या हटे?” से आगे है—“फरक्का के कारण पैदा हुए जल, गाद और बाढ़ के लाभ-हानि का न्यायपूर्ण बंटवारा कौन सुनिश्चित करेगा?” और यही बिहार की सबसे मजबूत दलील बन सकती है। इसलिए फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक “फरक्का समझौता बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप है” यह कहना एक राजनीतिक व क्षेत्रीय तर्क के रूप में तो समझ में आता है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से एक जरूरी फर्क यह भी है कि वास्तविक समस्या केवल 1996 के भारत-बांग्लादेश जल-बंटवारा समझौते की नहीं, बल्कि फरक्का बैराज की जल-प्रवाह व्यवस्था, गाद (silt) जमाव और उससे पैदा हुए नदी-भूगोल की भी है, जिस पर गहन चिंतन मनन आवश्यक है ताकि बिहार को बाढ़ के मामले में 1972 के बाद से ही जिस अप्राकृतिक और अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, उससे मुक्ति मिले। ...