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यदि प्राकृतिक जैव विविधता बची रहेगी, तभी मनुष्य और अन्य प्राणी पृथ्वी पर सुरक्षित व सुखी रहेंगे

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यदि प्राकृतिक जैव विविधता बची रहेगी, तभी मनुष्य और अन्य प्राणी पृथ्वी पर सुरक्षित व सुखी रहेंगे  "विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस की असली सफलता उस दिन नहीं मापी जानी चाहिए जिस दिन कार्यक्रम हुआ, बल्कि इस बात से तय होगी कि उसके बाद हमारे व्यवहार में प्रकृति के प्रति कितनी स्थायी जिम्मेदारी आई।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार  संपूर्ण जगत में 3 अक्टूबर को विश्व प्रकृति दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य प्रकृति के महत्व, पर्यावरणीय संतुलन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।  विश्व प्रकृति दिवस की शुरुआत 3 अक्टूबर 2010 से हुई है, जिसे विश्व प्रकृति संगठन (WNO) ने प्रारंभ किया है। इसका उद्देश्य लोगों, संस्थाओं और संगठनों को प्रकृति तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक और सक्रिय करना था। इस दिन विशेष रूप से वन और जैव-विविधता का संरक्षण, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता, वन्यजीव और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण,  प्रदूषण और...