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आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं?

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आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं? (After all, how long will political and administrative beliefs continue to wander in the mirage of Swadeshi?) "सच कहूँ तो “स्वदेशी से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से प्रतिस्पर्धी भारत और प्रतिस्पर्धी भारत से विश्व बाजार में भारतीय नेतृत्व की पैठ बढ़ती है।” इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंस्टा पोस्ट में देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता भी बतलाई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "आर्थिक विकास दर" में उल्लेखनीय वृद्धि पर देशवासियों को बधाई देते हुए एक बार फिर से स्वदेशी का राग अलापा है और विदेशों से गैर जरूरी सोने की खरीद न करने, विदेश यात्रा से परहेज करने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की है। चूंकि ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके हैं, इसलिए सवाल उठता है कि आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में राजनीतिक आस्थाएं कबतक भटकेंगी? जब स्वदेशी ही सफलता का मूल मंत्र है तो बार-बार आह्वान करने से बेहतर है, वैधानिक प्रतिबंध लगा देना, या मात्रा...

शारदा हॉस्पिटल समूह: आगरा चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला में किडनी ट्रांसप्लांट की बारीकियां समझाई

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शारदा हॉस्पिटल समूह: आगरा चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला में किडनी ट्रांसप्लांट की बारीकियां समझाई # शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल द्वारा आगरा में आयोजित चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला में किडनी ट्रांसप्लांट की बारीकियां समझाई @ कमलेश पांडेय/राजनैतिकदुनिया आगरा: शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा ने 'दिल्ली डायलिसिस टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन' के साथ मिलकर 5 सितंबर 2026 को आगरा में एक दिवसीय चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला (Medical Education Workshop) का भव्य आयोजन किया। इस कार्यशाला में नई दिल्ली, गाजियाबाद, मथुरा, अलीगढ़ और आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए वरिष्ठ डायलिसिस तकनीशियन (Senior Dialysis Technicians) शामिल हुए और  किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ीं बारीकियां समझाई। किडनी ट्रांसप्लांट और आधुनिक तकनीकों पर चर्चा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शारदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ किडनी रोग एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. कुणाल गांधी तथा वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अहमद कमाल मौजूद रहे। इस मौके पर मुख्य वक्ता डॉ...

जानिए ISRO की सफलता का वैज्ञानिक मॉडल और कीजिए NASA, SpaceX और चीन से तुलना

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जानिए ISRO की सफलता का वैज्ञानिक मॉडल और कीजिए NASA, SpaceX और चीन से तुलना "समझिए, आखिर कैसे संभव हुई इसरो की सफलता-दर-सफलता वाली उपलब्धि? क्या इसके पीछे टीम नरेंद्र मोदी यानी पीएमओ से जुड़े लोगों के राष्ट्रीय समर्पण का भी बड़ा योगदान है? जी हां, सच्चाई यही इशारे करती है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जन्माष्टमी की शुभ घड़ी यानी 4 सितंबर 2026 की रात जब श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 ने उड़ान भरी और EOS-05 को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया, तब यह केवल एक और रॉकेट लॉन्च नहीं था, बल्कि यह भारत की चार दशक से अधिक पुरानी अंतरिक्ष-यात्रा में तकनीकी परिपक्वता, संस्थागत अनुशासन और असफलताओं से सीखने की वैज्ञानिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रमाण था। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के आधिकारिक रिकॉर्ड में GSLV-F17/EOS-05 को 4 सितंबर 2026 के सफल मिशन के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि, इस सफलता का मूल्यांकन केवल राष्ट्रवादी उत्साह से करना वैज्ञानिक दृष्टि से अधूरा होगा। असली सवाल यह है— आखिर ISRO बार-बार कठिन अंतरिक्ष अभियानों...