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# आखिर युवाओं के बीच क्यों नहीं चमक पा रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन?

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# आखिर युवाओं के बीच क्यों नहीं चमक पा रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन?  "इतिहास में कुछ अध्यक्ष संगठन के पदाधिकारी बनकर रह जाते हैं और कुछ अपने दौर के राजनीतिक चेहरे बन जाते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को दूसरा रास्ता चुनना होगा। इसके लिए उन्हें मोदी-शाह से टकराने की जरूरत नहीं है; यह उनका स्वभाव भी नहीं है। इसलिए उन्हें मोदी-शाह की छाया के भीतर अपनी राजनीतिक धूप पैदा करनी होगी। यही उनकी वास्तविक नेतृत्व-परीक्षा है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भाजपा के राजनीतिक गलियारों में एक सवाल सबको बेचैन किए हुए है कि आखिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवाओं के बीच क्यों नहीं चमक पा रहे हैं? क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा मुखिया अखिलेश यादव, राजद सुप्रीमो तेजस्वी यादव, आप नेता अरविंद केजरीवाल, जनसुराज नेता प्रशांत किशोर आदि जैसे राजनीतिक क्षत्रपों को सियासी रूप से निपटाने के लिए नितिन नवीन के रूप में जो राजनीतिक तुरूप का पत्ता चला है, वह अब मनहूसियत की ओ...

जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए?

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जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए? "यदि नितिन नवीन भाजपा को युवाओं—विशेषकर Gen Z, first-time voters, college students, युवा professionals और startup/entrepreneur वर्ग—से जोड़ना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी बदलाव उन्हें यह करना होगा कि युवाओं को केवल “वोट बैंक” नहीं, बल्कि पार्टी के विचार, संगठन और नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाए।" @  कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवा नेता हैं, लेकिन युवाओं खासकर जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की उनकी मुहिम जब रंग नहीं ला पाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह कार्य अपने ही जिम्मे ले लिया और श्रीराम कॉलेज से लेकर मेट्रो तक "हनुमान कूद" करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे खुद नितिन नवीन के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोदी-शाह और भाजपा-आरएसएस में तालमेल बिठाने के चक्कर में वह खुद अप्रासंगिक होते नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो लगभग आठ महीने से वो पार्टी के राष...

गाजियाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी-वैशाली एक में गड्ढे व खड्डे की भराई शुरू

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गाजियाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी-वैशाली एक में  गड्ढे व खड्डे  की भराई शुरू # समाजसेवी  पप्पू चौपाल द्वारा हनुमान द्वार पर भगवान श्री कृष्ण की छठी के अवसर पर भंडारा का आयोजन किया गया @ राजनैतिकदुनिया  गाजियाबाद। दिल्ली की सीमा से सटे गाजियाबाद नगर निगम अंतर्गत वार्ड नंबर 72 कौशांबी में 9 सितंबर को निगम द्वारा बरसात के दौरान हुए बने हुए गड्ढे व खड्डे को भरने का अभियान चलाया गया,  ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। इस अवसर पर निगम पार्षद कुसुम मनोज गोयल द्वारा मौके पर पहुंच कर निगम के अधिकारियों को जगह जगह गड्ढे व खड्डे दिखाए गए और उन्हें अविलंब भरवाने में सहयोग किया गया। पार्षद श्रीमती कुसुम मनोज गोयल ने बताया कि उन्हें भरवाना बहुत जरूरी है। चूंकि बरसात के कारण अभी प्लांट बंद पड़ा है और नगर निगम द्वारा अभी पेच वर्क  टेंडर होना बाकी है। चूंकि लोगों की गुहार पर कल ही इसकी शिकायत निगम के अधिकारियों से पार्षद द्वारा की गई थी, इसलिए आज यह कार्य कराया जा रहा है। इससे लोगों ने जनप्रतिनिधि व निगम अधिकारियों की सराहना की।  इस अवसर पर ...

अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति?

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अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति? "समझिए, चीन, पश्चिम और UN के बीच भारत की कूटनीतिक परीक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के वास्ते  भारत अपनी जमीन की रक्षा के साथ-साथ दुनिया के नक्शे में अपनी जमीन की सही कहानी भी सुरक्षित रखे। इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सीमा पर चीन से मुकाबला जरूरी है; लेकिन भारत की सीमाओं के नैरेटिव पर दुनिया से संवाद उससे भी ज्यादा जरूरी है।” @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  क्या संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में भारतीय सीमाओं का विवादित चित्रण महज ‘कार्टोग्राफिक एनोमली’ है, या इसके पीछे बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का कोई गहरा संदेश छिपा है? दरअसल भारत को इस सवाल का जवाब भावनाओं में नहीं, बल्कि अत्यंत सतर्क कूटनीति से देना होगा। उल्लेखनीय है कि गत 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने “Correct the Map” प्रस्ताव को 164 मतों के समर्थन से पारित किया। मसलन, इस प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य दुनिया के मानचित्रों में महाद्वीपों के आकार को अधिक न्यायसंगत ढंग से प्रदर्शित करना...