जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए?
जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए?
"यदि नितिन नवीन भाजपा को युवाओं—विशेषकर Gen Z, first-time voters, college students, युवा professionals और startup/entrepreneur वर्ग—से जोड़ना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी बदलाव उन्हें यह करना होगा कि युवाओं को केवल “वोट बैंक” नहीं, बल्कि पार्टी के विचार, संगठन और नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाए।"
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवा नेता हैं, लेकिन युवाओं खासकर जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की उनकी मुहिम जब रंग नहीं ला पाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह कार्य अपने ही जिम्मे ले लिया और श्रीराम कॉलेज से लेकर मेट्रो तक "हनुमान कूद" करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे खुद नितिन नवीन के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोदी-शाह और भाजपा-आरएसएस में तालमेल बिठाने के चक्कर में वह खुद अप्रासंगिक होते नजर आ रहे हैं।
देखा जाए तो लगभग आठ महीने से वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन पार्टी पर अभी तक अपनी कोई छाप नहीं छोड़ पाए हैं। यही वजह है कि भाजपा को मोदी, शाह, योगी के अलावा क्षत्रपों देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र), सम्राट चौधरी (बिहार), शुभेंदु अधिकारी (पश्चिम बंगाल), हिमंता विश्व सरमा (असम) जैसे नेताओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है। चाहे लगभग छह माह बाद बनी उनकी राष्ट्रीय टीम हो, ये टीम लीडर नितिन नवीन, इनके राजनीतिक तेवरों को देखकर ऐसा नहीं लगता कि 2027 और 2028 में विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव 2029 में भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन भी दोहरा पाएगी।
ऐसा इसलिए कि भाजपा से जेन-जी खफा हैं। सवर्ण युवा भी नाराज हैं। भगवा पार्टी, विपक्ष की राजनीतिक पीच पर खेलते-खेलते अपने हार्ड कोर समर्थक गंवाती जा रही है। पीएम मोदी अपने सामने किसी को उभरने नहीं दे रहे हैं, इससे शाह न्यूट्रल गियर में चल रहे हैं। मोदी जहां योगी, फडणवीस, रेखा, पुष्कर धामी को मैनेज किए हुए हैं, वहीं शाह को सम्राट चौधरी, शुभेंदु अधिकारी, हिमंता विश्व सरमा, नायब सिंह सैनी, मोहन यादव जैसों से उम्मीद है। इन सबके बीच तालमेल बिठाते-बिठाते नितिन नवीन पशोपेश में पड़ जाते हैं।
ऐसे में यदि नितिन नवीन भाजपा को युवाओं—विशेषकर Gen Z, first-time voters, college students, युवा professionals और startup/entrepreneur वर्ग—से जोड़ना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी बदलाव उन्हें यह करना होगा कि युवाओं को केवल “वोट बैंक” नहीं, बल्कि पार्टी के विचार, संगठन और नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाए। दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक परस्ती जरूरी है, लेकिन जागरूक सवर्णों की कीमत पर नहीं। क्योंकि दलित अपने संगठन के इशारे पर वोट करेंगे, ओबीसी क्षेत्रीय दिलों में बंटेंगे, मुस्लिम उन्हें वोट करेंगे जो भाजपा को हराएंगे, ऐसे में यदि सवर्ण दुविधा में पड़ेंगे तो भाजपा का विजय रथ सियासी कुरूक्षेत्र में फंसना तय है। क्योंकि विपक्ष चतुराई से खुद को जोड़ रहा है और भाजपा समर्थकों को तोड़ रहा है।
ऐसे में यह युवा मुद्दा ही है, जेन-जी ही है जो अभी भाजपा के लिए खास तौर पर प्रासंगिक है यदि उसे चुनाव जीतना है तो। यह ठीक है कि नितिन नवीन ने हाल में Gen Z और युवाओं के लिए पार्टी की रणनीति पर बैठक की है, जिसमें युवाओं की समस्याओं को सुनने के लिए भरोसेमंद तंत्र और छोटे संवाद कार्यक्रमों पर जोर दिया गया। इसलिए मेरा सुझाव है कि नितिन नवीन को निम्नलिखित 12 कदम अवश्य उठाने चाहिए, ताकि उनके नेतृत्व पर कोई सवाल नहीं उठा पाए।
पहला, “युवा सुनो” अभियान शुरू करें: हर जिले में महीने में एक दिन ऐसा हो जिसमें भाजपा नेता सिर्फ युवाओं को सुनें—न भाषण, न राजनीतिक प्रचार। नारा होना चाहिए: “पहले सुनेंगे, फिर बोलेंगे।”
दूसरा, First-Time Voter Parliament बनाएं:18–23 वर्ष के युवाओं के लिए जिला और प्रदेश स्तर पर “First Voter Parliament” हो। उनसे स्पष्ट पूछा जाए: रोजगार चाहिए या entrepreneurship? शिक्षा में सबसे बड़ी समस्या क्या है? सरकारी परीक्षाओं में क्या सुधार चाहिए? AI से अवसर ज्यादा दिखते हैं या खतरे? राजनीति में आने में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
तीसरा, भाजपा में “Young Policy Fellows” बनाए जाएं: हर राज्य से प्रतिभाशाली युवाओं को 6–12 महीने के लिए नीति-अध्ययन से जोड़ा जाए। वे शिक्षा, रोजगार, AI, climate, defence, startups, agriculture आदि पर policy papers तैयार करें।
चौथा, सोशल मीडिया को प्रचार से संवाद में बदलें: युवा केवल पोस्टर और भाषण नहीं चाहते। पार्टी को Instagram, YouTube, X और short-video platforms पर real-time Q&A, podcasts और open debates करने चाहिए।
पांचवां, Campus Politics से आगे “Campus Public Policy”: विश्वविद्यालयों में केवल छात्र राजनीति पर ध्यान देने के बजाय Hackathon, Debate, Model Parliament, Policy Challenge, Startup Challenge, AI Innovation Challenge कराए जाएं। भाजपा के प्रस्तावित youth outreach में hackathons, marathons और campus activities जैसी योजनाओं की खबरें भी सामने आई हैं।
छठा, “एक युवा–एक कौशल–एक अवसर” अभियान:
भाजपा संगठन को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने से आगे बढ़कर युवाओं को skill, internship, apprenticeship, startup और रोजगार अवसरों से जोड़ने का नेटवर्क बनाना चाहिए। सरकार का MY Bharat मॉडल भी volunteering, skills, internships और leadership opportunities को जोड़ रहा है।
सातवां, पार्टी में उम्र की नहीं, क्षमता की सीढ़ी हो: युवा कार्यकर्ता को बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश तक ऊपर आने का स्पष्ट career path मिले। “10 साल काम करो, फिर मौका मिलेगा” वाली संस्कृति के बजाय performance-based promotion हो।
आठवां, “युवा नेतृत्व 2035” मिशन: भाजपा को अभी से 25–35 वर्ष आयु के हजारों संभावित नेताओं की पहचान करनी चाहिए। उन्हें public speaking, policy,
governance, media handling, digital communication चुनाव प्रबंधन का प्रशिक्षण मिले।
नौवां, युवा महिलाओं के लिए अलग राजनीतिक नेतृत्व कार्यक्रम:कॉलेज, startups, civil society, professional sectors और पंचायतों से युवा महिलाओं को पार्टी की मुख्यधारा में लाने की विशेष पहल हो।
दसवां, बेरोजगारी और परीक्षा व्यवस्था पर खुला संवाद:
युवा राजनीति में सबसे ज्यादा रोजगार, competitive exams, paper leaks, education fees और career uncertainty जैसे मुद्दों को लेकर संवेदनशील हैं। इसलिए भाजपा को इन मुद्दों पर रक्षात्मक प्रतिक्रिया के बजाय खुली सुनवाई और measurable solutions देने चाहिए।
ग्यारहवां, “Disagree with BJP” मंच भी बनाएं: यह शायद सबसे बड़ा बदलाव होगा। हर प्रदेश में साल में कम-से-कम दो बार ऐसा मंच हो जहाँ युवा भाजपा की नीतियों की आलोचना कर सकें और नेता उन्हें जवाब दें। क्योंकि जो युवा पार्टी से असहमत होकर भी पार्टी से संवाद कर सकता है, वह उससे ज्यादा लंबे समय तक जुड़ा रह सकता है।
बारहवां, युवा कार्यकर्ता को सिर्फ चुनाव के समय याद न करें: यह सबसे महत्वपूर्ण है। चुनाव के छह महीने पहले membership drive और rally करने से स्थायी युवा आधार नहीं बनेगा। खुद भाजपा की हालिया रणनीति में youth outreach को continuous process और छोटे gatherings के जरिए करने पर जोर बताया गया है।
इसलिए मैं नितिन नवीन के लिए “5Y Model” का सुझाव देता हूँ, जिसे मैं एक सरल राजनीतिक मॉडल में रखूंगा:
जैसे: Youth - लक्ष्य
1. Youth Listen - युवाओं की बात सुनना
2. Youth Learn - कौशल और नीति प्रशिक्षण
3. Youth Lead - युवाओं को नेतृत्व देना
4. Youth Innovate - Start-up, AI, technology
5. Youth Govern - नीति और शासन में भागीदारी
इससे युवाओं के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह जाएगा कि नितिन नवीन के सामने असली चुनौती युवाओं को भाजपा का समर्थक बनाना नहीं, बल्कि उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि भाजपा में उनका भविष्य है। अगर भाजपा युवा को सिर्फ यह बताएगी कि “देश के लिए काम करो”, तो संदेश अधूरा रहेगा। उसे यह भी कहना होगा— “देश के भविष्य के फैसले लेने की मेज पर तुम्हारी कुर्सी भी होगी।”
यही अंतर युवा मतदाता और युवा राजनीतिक कार्यकर्ता के बीच है। और यदि नितिन नवीन इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करते हैं, तो भाजपा की युवा राजनीति केवल चुनावी outreach नहीं रहेगी, बल्कि 2026–2035 के लिए एक नई पीढ़ी का नेतृत्व निर्माण अभियान बन सकती है।
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