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क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है?

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क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है?  समझिए इसके पीछे की बदलती कूटनीति! "अब वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के बीच एक नया समीकरण बन रहा है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ये मानते रहे हैं कि अगर वो पुतिन और शी जिनपिंग से सीधे बातचीत करें, तो दुनिया के बड़े-बड़े विवाद पलक झपकते ही सुलझ सकते हैं।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "रणनीतिक स्वायत्तता" वाली कूटनीति से जहां अमेरिका, चीन, रूस तीनों बड़े देश घबराए हुए हैं, वहीं फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश इसमें ही अपना कूटनीतिक भविष्य देख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का भी मानना है कि यदि भारत अपने मिशन में कामयाब हो जाता है तो इससे न केवल बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि अमेरिका, रूस और चीन के "हथियारों के सौदागरों" के हाथ-पांव भी ठिठक जाएंगे।  चूंकि समसामयिक वैश्विक परिदृश्य में अरब-खाड़ी देशों में अमेरिका-यूरोप की इज्जत दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि रूस-चीन...