वृद्ध व्यक्ति परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जीवित पूंजी हैं!
वृद्ध व्यक्ति परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जीवित पूंजी हैं! (अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस 1 अक्टूबर पर विशेष) @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार वृद्ध व्यक्ति परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जीवित पूंजी हैं। लिहाजा उनके लिए एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें उम्र बढ़ने का अर्थ निर्भरता और अकेलापन नहीं, बल्कि गरिमा, सुरक्षा, सक्रियता और अनुभव के सम्मान के साथ लंबा जीवन हो। यही बढ़ती हुई वैश्विक वृद्ध आबादी के लिए स्वस्थ और समावेशी समाज की दिशा है। अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस (1 अक्टूबर) केवल बुजुर्गों के सम्मान का दिन नहीं, बल्कि यह सोचने का अवसर है कि बढ़ती उम्र में हर व्यक्ति को सम्मान, स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी कैसे मिले? इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने 1 अक्टूबर को यह दिवस घोषित किया था। # जानिए आज दुनिया और भारत में वृद्धों की स्थिति क्या है? दुनिया तेजी से वृद्ध हो रही है। 2025 में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 1.2 अरब लोग थे; 2050 तक यह संख्या लगभग 2.1 अरब होने का अनुमान...