The pilgrimage to Lord Pashupatinath is a bridge of faith, culture and India-Nepal friendship: Dr. Dinesh Chandra

भगवान पशुपतिनाथ की यात्रा है आस्था, संस्कृति और भारत-नेपाल मैत्री का सेतु: डॉ दिनेश चंद्र
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
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उत्तरप्रदेश के निवर्तमान आईएएस अधिकारी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद व जनसंवेदनाओं के मशहूर अभिव्यक्ति कर्ता लेखक डॉ दिनेश चंद्र ने गत दिनों नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भगवान पशुपतिनाथ तीर्थस्थल की यात्रा की। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मुख्य महंत जी का आशीर्वाद लिया और भारत राष्ट्र की ओर से बाबा काशी विश्वनाथ और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी, अयोध्या का अंग वस्त्रम उन्हें भेंट करते हुए सम्मानित किया। वहीं मुख्य महंत जी ने भी तीर्थस्थल पटका प्रदान करके डॉ दिनेश चंद्र को सम्मानित किया और अपना आशीर्वाद दिया। 
उल्लेखनीय है कि इस आशय की वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जब "राजनैतिकदुनिया" ने उनसे मोबाइल पर संपर्क किया तो अपनी परम पावन तीर्थयात्रा का अनुभव देश व समाज से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तरप्रदेश के तेजस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सनातन धर्म के उन्नयन सम्बन्धी प्रयासों को देश-विदेश की धरती पर भी सराहना मिल रही है। उनके इन अहम प्रयासों की सराहना करते हुए डॉ दिनेश चंद्र ने आगे कहा कि भगवान पशुपतिनाथ के पावन धाम की यात्रा केवल दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस अखंड परंपरा का अनुभव है जिसने सदियों से भारत और नेपाल को आध्यात्मिक सूत्र में बांध रखा है। काठमांडू स्थित यह पवित्र धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी।
बकौल डॉ दिनेश चंद्र, हाल के वर्षों में भारत और नेपाल के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास हुए हैं। विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सनातन संस्कृति, तीर्थस्थलों के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर दिए गए महत्व की मेरे साथ साथ उनके करोड़ों समर्थक सराहना करते हैं। डॉ दिनेश चंद्र का मानना है कि ऐसे प्रयासों से ही भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को नई ऊर्जा मिली है तथा धार्मिक पर्यटन और जन-जन के संपर्क को भी प्रोत्साहन मिला है। इसलिए उन्होंने प्रतिबद्धता भी जताई कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की कोशिशों को आगे और बढ़ाने की दिशा में वो अपना और अपने सम्पर्कित जनों का योगदान भी सुनिश्चित करेंगे। उनकी यह प्रतिबद्धता उनकी तीन अहम कालजयी कृतियों- काल प्रेरणा, कर्म निर्णय और कर्म कुम्भ में भी झलकती है।
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए डॉ सिंह ने आगे कहा कि भगवान पशुपतिनाथ का धाम हमें यह संदेश देता है कि सीमाएँ देशों को अलग कर सकती हैं, लेकिन आस्था, संस्कृति और सभ्यता लोगों को जोड़ने का कार्य करती हैं। भारत और नेपाल का संबंध केवल पड़ोसी देशों का नहीं, बल्कि साझा परंपराओं, श्रद्धा, संस्कृति और आत्मीयता का संबंध है। भगवान पशुपतिनाथ की यात्रा केवल एक धार्मिक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के बीच हजारों वर्षों से चले आ रहे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का सशक्त प्रतीक है। 
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच धार्मिक पर्यटन, तीर्थयात्रा सुविधाओं और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयास हुए हैं। इसलिए अनेक श्रद्धालुओं और पर्यवेक्षकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर दिए गए जोर ने भारत-नेपाल के साझा सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा प्रदान की है। भगवान पशुपतिनाथ और बाबा विश्वनाथ जैसे तीर्थ दोनों देशों के लोगों को आस्था के साथ-साथ आत्मीयता और मैत्री के सूत्र में जोड़ते हैं।
सनातन धर्म के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों की उनके समर्थक दिली सराहना करते हैं। उनका मानना है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास, आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने जैसी पहलों से भारत और नेपाल के बीच साझा धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को भी बल मिला है। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और जन-जन के रिश्तों को इन प्रयासों से नई ऊर्जा मिलने की बात भी कही जाती है।

इसलिए आइए, भगवान पशुपतिनाथ से प्रार्थना करें कि दोनों देशों के बीच मित्रता, शांति, समृद्धि और सांस्कृतिक एकता का यह पावन संबंध निरंतर मजबूत होता रहे तथा संपूर्ण मानवता का कल्याण हो।
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