नवाचार, निर्माण और वितरण जैसी वैश्विक त्रिशक्ति को साधकर विकसित बनेगा भारत

नवाचार, निर्माण और वितरण जैसी वैश्विक त्रिशक्ति को  साधकर विकसित बनेगा भारत
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक 

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश, और उनमें भी सर्वाधिक युवा तादात वाला देश भारत और उसकी सरकार की 21वीं सदी की चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। लेकिन भाजपा नीत एनडीए की मोदी सरकार जिस तरह से ठोस रणनीति पूर्वक आगे बढ़ रही है, वह इस जनसंख्या वृद्धि वाली 'आपदा' को भी कामकाजी 'अवसर' में बदल देगी। भले ही भारत के राष्ट्रीय संसाधन सीमित हैं, लेकिन सुरसा मुख की भांति लगातार बढ़ती जा रही जनसंख्या की चिंता सरकार को है। 
लिहाजा, केंद्र सरकार अमेरिका, रूस-चीन, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान, सिंगापुर आदि विकसित देशों से बहुत कुछ सीख रही है, ताकि वह खुद अपनाकर न केवल विकसित बने, बल्कि हर हाथ को काम और हर व्यक्ति को भोजन सुरक्षा प्रदान कर सके। विकसित भारत 2047 के रूप में यही लक्ष्य लिए हुए सरकार आगे बढ़ रही है। इसके लिए वह तकनीकी कुशलता का सहारा लेकर  अकुशल मानव श्रम को कुशल मानव श्रम में बदलना चाहती है ताकि देश-दुनिया को लाभान्वित किया जा सके। 

इस हेतु मोदी सरकार ने नवाचार, निर्माण और अंतरराष्ट्रीय वितरण जैसी त्रिशक्ति हासिल करने पर जोर दिया है, ताकि  शिक्षित और अशिक्षित पर हुनरमंद मानव बल तैयार किया जा सके। यही प्रशासनिक दूरदर्शिता का ही तकाजा भी है और सामाजिक न्याय का ध्येय भी, जो पारस्परिक सद्भाव का मूल है। इस निमित्त दुनियावी प्रगतिशीलता का अध्ययन करने से पता चलता है कि निरंतर हाईटेक होती जा रही 21वीं सदी में किसी भी महत्वपूर्ण देश को सम्मान केवल सैन्य शक्ति से नहीं मिल रहा है, बल्कि दुनिया अब उन देशों को सबसे अधिक महत्व देती है जो “नया सोचते हैं, नया बनाते हैं और दुनिया तक पहुंचाते हैं। 
शायद इसीलिए अमेरिका विचारों की शक्ति है जिसे वकील चलाते हैं, चीन उत्पादन की शक्ति है जिसे इंजीनियर चलाते हैं, जर्मनी-जापान गुणवत्ता की शक्ति हैं जिसे टॉप प्रोफेशनल चलाते हैं, और भारत उभरती संभावनाओं की शक्ति बनता जा रहा है जिसे त्याग व बलिदान की प्रतिमूर्ति कहलाने वाले सामाजिक स्वयंसेवक से नेता बनी जमात और नौकरशाह चलाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा भी है कि दुनिया वास्तव में उन्हीं देशों का सबसे अधिक सम्मान करती है जो केवल संसाधनों के भरोसे नहीं, बल्कि नवाचार (Innovation) करते हैं, निर्माण (Manufacturing) करते हैं, और अपने उत्पादों/तकनीक का वैश्विक वितरण (Distribution & Exports) करते हैं। यानी जो देश नई तकनीक बनाते हैं,उसे बड़े पैमाने पर उत्पादन में बदलते हैं, और फिर दुनिया तक पहुंचाते हैं, वही वैश्विक शक्ति बनते हैं।

दुनियादारी पर बरीकीपूर्वक नजर डालने से पता चलता है कि आज के दौर में इस पैमाने पर कुछ देश सबसे ज्यादा खरे उतर रहे हैं- 

पहला, संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) नवाचार का वैश्विक केंद्र समझा जाता है। वह आज भी एआई (AI). सेमीकंडक्टर डिजाइन,
अंतरिक्ष तकनीक, बायोटेक, रक्षा तकनीक, और डिजिटल प्लेटफॉर्म में अग्रणी है। एप्पल (Apple), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), नवीडिया (Nvidia), टेस्ला (Tesla), गूगल (Google) जैसी कंपनियां केवल उत्पाद नहीं बनातीं, बल्कि पूरी दुनिया की तकनीकी दिशा तय करती हैं।
अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत "डिसरूपटिव इनोवेशन" (Disruptive Innovation) मानी जाती है। लेकिन बड़े पैमाने के उत्पादन में अमेरिका का कुछ हिस्सा एशिया पर निर्भर भी है।

दूसरा, चीन (China) दुनिया की फैक्ट्री और उभरता नवाचार केंद्र बन चुका है। वह आज दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता, सबसे बड़ा निर्यातक, और तेजी से बढ़ता तकनीकी नवाचार केंद्र है। चीन इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (EV), सोलर, बैटरी, ड्रोन, और औद्योगिक मशीनरी में विशाल क्षमता रखता है। बीवाईडी (BYD), हुअवेई (Huawei), सिओमी (Xiaomi) जैसी कंपनियां अब वैश्विक प्रतिस्पर्धी बन चुकी हैं। एआई (AI) और हाई-टेक निर्माण में भी चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन बौद्धिक संपदा, पारदर्शिता, और भू-राजनीतिक अविश्वास उसकी चुनौतियां हैं।

तीसरा, जर्मनी (Germany) इंजीनियरिंग और गुणवत्ता की शक्ति समझा जाता है। जर्मनी को दुनिया "प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग पावर" (Precision Manufacturing Power) मानती है। उसकी पहचान ऑटोमोबाइल, मशीन टूल्स, औद्योगिक इंजीनियरिंग, केमिकल, और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग है। बीएमडब्ल्यू (BMW), मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz), सीमेंस (Siemens), बोस्च (Bosch) जैसी कंपनियां गुणवत्ता का वैश्विक प्रतीक हैं। जर्मनी नवाचार और निर्माण दोनों में संतुलित मॉडल माना जाता है। 

चौथा, जापान (Japan) अनुशासन, तकनीक और उच्च गुणवत्ता का प्रेरक बन चुका है। जापान रोबोटिक्स,
ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और औद्योगिक तकनीक में लंबे समय से अग्रणी है। टोयोटा (Toyota), सोनी (Sony), पैनासोनिक (Panasonic) जैसी कंपनियां दुनिया की औद्योगिक संस्कृति बदल चुकी हैं। इकोनॉमिक कॉम्प्लेसिटी इंडेक्स (Economic Complexity Index) में जापान शीर्ष देशों में गिना जाता है। जापान की ताकत “कम संसाधनों में उच्च गुणवत्ता वाला निर्माण है।

पांचवां, दक्षिण कोरिया (South Korea) टेक्नोलॉजी और निर्यात की सुपरपावर समझा जाता है। दक्षिण कोरिया ने सैमसंग (Samsung), हुंडई (Hyundai), एलजी (LG), एसके हयनिक्स (SK Hynix) जैसी कंपनियों के दम पर तकनीकी और औद्योगिक शक्ति हासिल की। यह देश सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले, बैटरी, और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में विश्व नेता है। कोरिया की सबसे बड़ी ताकत “तेजी से नवाचार को बड़े पैमाने पर उत्पादन में बदलना है।”

छठा, ताइवान (Taiwan) चिप निर्माण का वैश्विक राजा है। वह दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था का छुपा हुआ आधार है। टीएसएमसी (TSMC) जैसी कंपनियां दुनिया के सबसे उन्नत चिप्स बनाती हैं, जिन पर एआई (AI), स्मार्टफोन और रक्षा तकनीक निर्भर है। इसी कारण ताइवान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है। 

सातवां, सिंगापुर (Singapore) छोटा देश है, लेकिन विशाल वैश्विक वितरण शक्ति बन चुका है। सिंगापुर:
लॉजिस्टिक्स, हाई-टेक व्यापार, वित्त, और वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र है। यह नवाचार और वैश्विक वितरण क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। 

आठवां, भारत (India) उभरती हुई निर्माण और नवाचार शक्ति है। भारत तेजी से डिजिटल नवाचार, स्टार्टअप, फार्मा,
स्पेस टेक, मोबाइल निर्माण, और एआई (AI) सेवाओं में आगे बढ़ रहा है। यूपीआई (UPI), आधार (Aadhaar) और डिजिटल सार्वजनिक ढांचा भारत की बड़ी ताकत बने हैं। भारत की निर्माण क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन भारत अभी:गहरे तकनीकी अनुसंधान,सेमीकंडक्टर, उच्च स्तरीय मशीन निर्माण, और वैश्विक ब्रांड निर्माण में पीछे है।
यदि भारत नवाचार, कौशल, अनुसंधान, और गुणवत्ता निर्माण पर जोर बढ़ाता है, तो वह अगले 15–20 वर्षों में शीर्ष औद्योगिक शक्तियों में शामिल हो सकता है।

सवाल है कि कौन देश सबसे संतुलित मॉडल पर खरा उतरता है? यदि तीनों पैमानों- नवाचार (Innovation), निर्माण (Manufacturing), वैश्विक वितरण 
(Worldwide Distribution) को साथ देखें, तो आज सबसे प्रभावशाली देश क्रमशः हैं: अमेरिका अत्यंत मजबूत, मजबूत और अत्यंत मजबूत है। चीन तेजी से बढ़ता, सबसे मजबूत और अत्यंत मजबूत है। जर्मनी उच्च गुणवत्ता, अत्यंत मजबूत और मजबूत है। जापान अत्यंत मजबूत, अत्यंत मजबूत और मजबूत है। दक्षिण कोरिया अत्यंत मजबूत, मजबूत और मजबूत है। ताइवान, चिप नवाचार, अत्यंत मजबूत और रणनीतिक है। भारत तेजी से उभरता, तेजी से बढ़ता और विस्तारशील है।

निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि 21वीं सदी में सम्मान केवल सैन्य शक्ति से नहीं मिल रहा, बल्कि दुनिया अब उन देशों को सबसे अधिक महत्व देती है जो:“नया सोचते हैं, नया बनाते हैं और दुनिया तक पहुंचाते हैं।” इसीलिए:
अमेरिका विचारों की शक्ति है, चीन उत्पादन की शक्ति है,
जर्मनी-जापान गुणवत्ता की शक्ति हैं,और भारत उभरती संभावनाओं की शक्ति बनता जा रहा है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ

जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया