साध्य कठिन हो साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह आपका संकल्प
साध्य कठिन हो साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह आपका संकल्प
@ अनुभूति/डॉ दिनेश चंद्र, आईएएस
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दोबारा इस पद पर आरूढ़ होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन इसके पीछे उनकी कार्यनिष्ठा, व्यक्तिगत समर्पण और चुम्बकीय व्यक्तित्व का बड़ा योगदान है। यद्यपि गत 23 मार्च, 2022 को उनके मुख्यमंत्री पद शपथ ग्रहण समारोह में भौतिक रूप से उपस्थिति तो संभव नहीं थी। परन्तु इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से शपथ ग्रहण समारोह की अलौकिक, अविस्मरणीय एवं गौरवशाली क्षणों को देखकर मन अत्यन्त प्रसन्नचित हुआ।
.....और इसी से प्रभावित होकर विगत दिवसों की अनुभूति को लेखनीबद्ध करते हुए मन में प्रसन्नता के भाव को लेकर आपके यशस्वी एवं ऐश्वर्यवान होने की कामना करते हुए यह अभिव्यक्त करना चाहता हूं कि 10 मार्च, 2022 का सुखद दिवस उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अग्निपरीक्षा का कठिन एवं दुर्लभ क्षण था। एक ओर राज्य में सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लोकतंत्र के महापर्व में "सामान्य विधानसभा निर्वाचन 2022" के अन्तर्गत उत्तराखण्ड में उनके चुनावी रणकौशल के परिणाम ने श्री धामी एवं भारतीय जनता पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व की कल्याणकारी योजनाओं को जनता ने मतदान करके पूर्ण बहुमत की सरकार के गठन का आशीर्वाद दिया। वहीं दूसरी ओर मतगणना के परिणामस्वरूप पार्टी के राज्य स्तरीय शीर्ष योद्धा को चुनावी समर में अप्रत्याशित पराजय मिली।
यही वजह रही जिसके कारण कुछ अति महत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञों ने श्री धामी के नेतृत्व को चुनौती देकर उनकी आलोचना करते हुए उनके परिश्रम को हर सिरे से नकारना शुरू कर दिया। ऐसे मौकापरस्त लोगों ने इस विचारधारा को बलवती बनाने की मुहिम छेड़ दी कि जो व्यक्ति अपना व्यक्तिगत निर्वाचन नहीं जीत सकता, वह प्रदेश का नेतृत्व करने की क्षमता नहीं रखता है। परन्तु ऐसे कपटी लोगों ने इतिहास के उन पराक्रमी एवं ऐतिहासिक युग पुरुषों की कथा की प्रेरणा से यह सीख नहीं ली कि पराक्रमी पुरूष प्रतिकूल तथा घनघोर पराजय एवं निराशाजनक परिस्थितियों में भी अपने आत्मबल को न गिराकर आसुरी शक्तियों से युद्ध में विजय के लिए अपनी शक्ति का मौलिक रूप से संचय करने में लगे रहते हैं और अन्ततोगत्वा विजय के रसपान को ग्रहण करने में सफल होकर मानव कल्याण के मार्ग को अमूमन एक नई राह एवं दिशा देने में सफल हुए है।
सीएम श्री धामी ने इसी सीख एवं प्रेरणा का अवलम्बन करते हुए व्यक्तिगत असफलता के दौर में भी अपने धैर्य एवं संयम को नहीं खोया तथा शक्ति की मौलिकता के संवर्धन एवं संचय के लिए मन में पीड़ा, निराशा, वेदना के भाव को चेहरे पर प्रदर्शित नहीं होने दिया। अपितु ओजस्वी प्रसन्नचित आभामण्डल के साथ उत्तराखण्ड की आवाम के विकास के लिए कार्य करने के लिए निरन्तर परिश्रमशील रहे। वो "नर हो न निराश करो मन को" के भाव को मन में धारण करते हुए आगे बढ़ने के लिए उद्यत रहे। और उसी का सकारात्मक परिणाम रहा कि व्यक्तिगत नैराश्य, अवसाद, विषाद के समय में भी आपने उत्तराखण्ड के नागरिकों के कल्याणार्थ आगे बढ़ते रहने के संकल्प को चुना तथा अखिलेश्वर के रूप में संघ परिवार एवं पीएम मोदी ने आपका दामन थामा और समस्त विवाद तथा अटकलों को विराम देते हुए जनहित में प्रदेश के विकास के लिए युवा मुख्यमंत्री के रूप में श्री धामी को ही प्रदेश के नेतृत्व की कमान पुनः सौंपी।
...और इतिहास को नये सिरे से पीएम मोदी के उर्जावान एवं राष्ट्रप्रेमी स्वरूप की ध्वनि से अभिसिंचित भाव को परिणति प्रदान की उत्तराखण्ड के कुछ वरिष्ठ राजनीतिज्ञों द्वारा भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के सर्वोच्च पद पर रहकर भी भितरघात करके कई योग्य उम्मीदवारों को जीत की यात्रा से दूर रखा और मुख्यमंत्री के पद का स्वप्न साकार करने की नाकाम कोशिश की। हालांकि उनकी अति महत्वाकांक्षी आरजू पर पीएम मोदी ने न केवल अंकुश लगा दिया बल्कि यह एहसास भी कराया कि भारतीय लोकतंत्र में सच्ची श्रद्धा एवं सेवाभाव से कार्य करने वाले को सदैव फल मिलता है। क्योंकि गीता का सूत्रभाव एवं सन्देश भी यही है कि सिर्फ कर्म करो, फल की इच्छा मत रखो। कहा गया है कि "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥"
अब बारी है सीएम श्री धामी की, जो अपने पुराने सहयोगियों के साथ प्रदेश के विकास की नई राह खोजें और संकल्प एवं प्रण से हृदय में इच्छाशक्ति, अपराजय संकल्पशक्ति के साथ जनहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करें। क्योंकि आपको नैराश्य एवं विवाद के क्षणों से उभरने के लिए जनहित के वास्ते पीएम मोदी ने आपकी निष्ठा, भक्ति व कार्यशक्ति पर विश्वास किया है। इसलिए अब उस पर खरे उतरने का समय है। मुझे आपके व्यक्तित्व पर पूर्ण विश्वास है कि आप जनता की आवाज बनकर प्रदेश व राष्ट्रहित में अनुकरणीय, उल्लेखनीय कार्य कर प्रदेश के नागरिकों के सबसे चहेते, जनप्रिय एवं लोकप्रिय जननेता बनोगे। यह मेरे भाव हैं, जो ईश्वरीय कृपा से अवश्य सार्थक होंगे।
प्रख्यात कवि मैथिलीशरण गुप्त की भावपूर्ण पंक्तियां यहां उद्धृत कर अपने भाव को अग्रसारित करता हूं:- प्रभु ने तुमको कर दान किए, सब वांछित वस्तु विधान किये। तुम प्राप्त करो उनको न अहो, फिर है यह किसका दोष कहो। समझो न अलभ्य किसी धन को, नर हो न निराश करो मन को।
निःसन्देह, यह यात्रा संघर्षपूर्ण है, चुनौतियां भी कम नहीं हैं, परन्तु उद्यम एवं परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता है। इसलिए एक सच्चा शुभेच्छु एवं शुभचिन्तक होने के नाते मुझे आपके पुरुषार्थ एवं कर्मठता पर पूरा विश्वास है। योग्य एवं निष्ठावान साथी स्वामी यतीवरानन्द, संजय गुप्ता वरिष्ठ नेता भारतीय जनता पार्टी एवं मतलूब अहमद जैसे निष्ठावान अनेक शुभचिन्तकों को अवश्य अपने साथ होने का न केवल एहसास दिलाया, अपितु पूर्व के अपने तथा आपके लिए समर्पित ऐसे निष्ठावान सहयोगियों को प्रदेश के विकास की यात्रा में उनकी जनकल्याण के प्रति आस्था व विश्वास को परखने के पश्चात अवश्य योग्यता के अनुसार सहभागी बनाने का प्रयास किया तथा गरिमायुक्त आचरण एवं मान सम्मान करते हुए यथेष्ट आवश्यक सहयोग भी प्राप्त करने का प्रयास करना। इसी भाव के साथ पुनः-
करके विधि वाद खेद करो, निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो।
बनता बस उद्यम ही विधि है, मिलती जिससे सुख की निधि है। समझो धिक निष्क्रिय जीवन को, कुछ काम करो, कुछ काम करो। नर हो, न निराश करो मन को।
कहना न होगा कि जन-जन के लिए सहजता, सरलता से सुलभ एवं चुम्बकीय आकर्षण का अभूतपूर्व व्यक्तित्व, विलक्षण कार्यशैली तथा आपकी प्रतिभा एवं नीति से ही आपको संघ परिवार एवं पीएम मोदी सहित जनमानस का हृदय से आशीर्वाद प्राप्त हुआ है और इस जन सहयोग एवं आशीर्वाद को आप जनता के कष्टों, दुःखों के निवारण तथा उनके विकास एवं कल्याण में लगायेंगे। कुछ यही मेरी शुभकामनाओं को आप अवश्य स्वीकार करेंगे।
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