अब तक सफल दिख रहा योगी का राजनीतिक हठयोग, आगे प्रभु राम जानें!

अब तक सफल दिख रहा योगी का राजनीतिक हठयोग, आगे प्रभु राम जानें!

@ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक, हिन्द आत्मा

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनैतिक प्रबंधन काबिले तारीफ है। अपनी बात मनवाने की उनकी सियासी अदाएं भी दिलचस्प हैं। उन्होंने प्रशासनिक सक्रियता का भी एक अद्भुत उदाहरण पेश किया और कराया है। शासन के विभिन्न जटिल आयामों को उन्होंने जिस खूबसूरती से सुलझवाया है, उसे देख-सुनकर बड़े-बड़े लोग भी दंग रह जाते हैं। 

एक संत से राजनेता बनने के बावजूद हिंदुत्व के पैमाने पर उन्होंने जिस साम, दाम, दंड और भेद की नीति को प्रश्रय दिया है, उससे उनके सारे विरोधी चित्त होते जा रहे हैं। इसे उनका सियासी हठयोग भी समझा जा रहा है। अपनी टीम का चयन उन्होंने जिस कार्यकुशलता के साथ किया है और वक्त वक्त पर उसमें जो बदलाव वो करते आ रहे हैं, उसका लाभ शासन-प्रशासन होते हुए आमजन को भी मिला है। इसलिए उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर है। 

केंद्रीय गृह मंत्री मंत्री अमित शाह का यह कहना कि 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी की तीसरी जीत सुनिश्चित करने के लिए 2022 में सीएम योगी आदित्यनाथ की दूसरी जीत सुनिश्चित करनी होगी, से पूरी राम कहानी स्पष्ट हो चुकी है। भाजपा की सियासत में ऐसा पहली बार देखा-सुना जा रहा है कि अबतक सबकी जीत सुनिश्चित करने करवाने वाले पीएम नरेंद्र मोदी की अगली जीत सीएम योगी की जीत के बगैर संभव नहीं है! इससे आप समझ सकते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनमानस पर कैसी छाप छोड़ी होगी? 

यह बात मैं नहीं बल्कि वो लोग बोल रहे हैं जो कल तक योगी आदित्यनाथ का विकल्प ढूंढ रहे थे! उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पूरा कार्यकाल ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कभी गुप्त तो कभी प्रत्यक्ष विरोध करने में गुजार दिया। यही नहीं, पीएम मोदी के करीबी नौकरशाह और अब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एमएलसी अरविंद शर्मा से जुड़ी चर्चाएं भी पुरानी नहीं हुई हैं। 

और इन सभी अटकलों से निपटने की सीएम योगी की अदाओं से भी लगभग सभी वाकिफ हैं। लेकिन अब इस प्रकार की मीडिया गॉशिप का पटाक्षेप हो चुका है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुट और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुट के बीच एक अरसे से चली आ रही सियासी रस्साकशी से भाजपा को निकट भविष्य में होने वाली क्षति का आकलन करते हुए पार्टी के दिग्गज रणनीतिकारों ने डैमेज कंट्रोल कर लिया है और पार्टी हित में दोनों नेताओं की उपयोगिता को समझते हुए उन्हें एक दूसरे के पूरक के रूप में सरेआम स्वीकृति प्रदान की है, जो सबसे अहम बात है। 

लगता है कि भाजपा और आरएसएस ने काफी मंथन के बाद यह निश्चय किया है कि योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरा मौका भी मिलना चाहिए, भले ही उनके प्रतिद्वंद्वी नेता कुछ भी तर्क दें। गौर करने वाली बात यह है कि जब देश का प्रधानमंत्री पिछड़ा वर्ग से हो तो यूपी का मुख्यमंत्री सवर्ण वर्ग से ही होना चाहिए, अन्यथा विपक्ष और पार्टी समर्थक इसकी उल्टी व्याख्या कर सकते हैं, जो भाजपा पर यूपी जैसे अहम राज्य में भारी भी पड़ सकती है।

इसलिए पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गत दिनों यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तरप्रदेश मेंं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिर्फ चेहरा ही नहीं, सीएम फेस भी हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपनी पहली ही रैली से यूपी में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मुख्यमंत्री चेहरे की तस्वीर साफ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सशक्त और कुशल नेतृत्व की तारीफ की एवं बीजेपी की सारी उपलब्धियों को गिनाने के साथ ही केंद्र में 2024 और उत्तर प्रदेश में 2022 का रोड मैप लगभग तय कर दिया। 

दरअसल, जब उनसे पूछा गया कि 2022 चुनाव में बीजेपी का चेहरा कौन होगा? क्या चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ ही मुख्यमंत्री होंगे? तो ऐसी तमाम अटकलों पर अमित शाह ने पूर्ण विराम लगा दिया। उन्होंने लखनऊ रैली में साफ कहा कि अगर 2024 में नरेंद्र मोदी को पीएम बनाना है तो 2022 में योगी आदित्यनाथ को पुनः सीएम बनाइए। उन्हें एक मौका और दीजिये। अपने इस ऐलान से उन्होंने मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पार्टी का रुख पूरी तरह से साफ कर दिया। उन्होंने यहां तक कहा कि योगी ने 90 फीसदी वादे पूरे किए हैं। अपराध पर सख्ती का परिणाम यह हुआ है कि आज यूपी में बाहुबली ढूंढे नहीं मिल रहे। 

उनकी इन बातों में दम है कि हमने उत्तर प्रदेश में लोक संकल्प के सारे वादे पूरे किए हैं, लेकिन अभी पांच साल का मौका और चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश को सभी जगह पर देश में नम्बर वन स्थान पर लाया जाए। उनका यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी घोषणापत्र के 90 फीसदी वादे पूरे किए हैं और दो महीने में बचे हुए वादे भी पूरे किए जाएंगे, ताकि जनता माने कि बीजेपी जो कहती है उसे पूरा करती है। 

उन्होंने एक और बात कही, जो महत्वपूर्ण है। वह यह कि यूपी में देश के सबसे ज्यादा युवा हैं। 53 फीसदी युवा हैं, जिनको पार्टी से जोड़ा जाना चाहिए। गरीब, महिलाओं, दलित और पिछड़े को जोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ राजनीतिक पार्टियां ऐसी होती हैं जो हमेशा के लिए समाज सेवा का कार्य करती हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक पार्टियां ऐसी होती हैं, जैसे बारिश में मेंढक बाहर आ जाता है। ऐसे चुनावी मेंढक भी चुनाव के समय ही बाहर आते हैं। 

उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा है कि यूपी में 15 सालों तक सपा-बसपा का खेल चलता रहा है, जिन्होंने यूपी को बर्बाद किया था। तब यूपी की हालत देखकर मेरा खून खौल जाता था। कैराना से पलायन हो रहे थे, लेकिन पलायन कराने वाले अब खुद पलायन कर गए हैं। किसी की हिम्मत नहीं है कि किसी का पलायन करा दें। यही नहीं, एक समय था कि हर जिले में एक दो बाहुबली थे, लेकिन आज दूरबीन में बाहुबली देखे नजर नहीं आते। यूपी की लड़की रात 12 बजे बिना डर के स्कूटी के साथ जेवर लेकर निकल सकती है।

 सच कहा जाए तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से दो कदम आगे बढ़कर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वह सबकुछ संभव कर दिखाया है, जिसे अबतक असम्भव करार दिया जाता है। इसलिए उम्र और सूझबूझ के लिहाज से वह प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के लिए भी एक अहम राजनेता हैं, जिनसे देश-प्रदेश को निकट भविष्य में बहुत कुछ हासिल हो सकता है।

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