ट्रंफ व नेतन्याहू के खिलाफ ईरान के शीर्ष शिया मौलवी के इस्लामिक फतवे के अंतरराष्ट्रीय मायने को ऐसे समझिए
ट्रंफ व नेतन्याहू के खिलाफ ईरान के शीर्ष शिया मौलवी के इस्लामिक फतवे के अंतरराष्ट्रीय मायने को ऐसे समझिए
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
इस्लामिक गणतंत्र ईरान के शीर्ष शिया मौलवी नासेर मकारेम शिराजी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को "अल्लाह के दुश्मन" बताया है। उन्होंने दुनियाभर के मुस्लिमों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए एक फतवा जारी किया है, जिसमें दो टूक कहा है कि कोई भी शख्स या सरकार जो वैश्विक इस्लामिक समुदाय के नेतृत्व के लिए खतरा बनेगा, उसका माकूल जवाब दिया जाएगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई को धमकी देने या उनकी हत्या की कोशिश करने वालों को अल्लाह के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। इस तरह की हरकत को अल्लाह की तौहीन के तौर पर देखा जाएगा और उसे अल्लाह के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखा जाएगा।
लिहाजा उनके ताजा इस्लामिक फतवे के अंतरराष्ट्रीय मायने को समझना बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए कि इस्लाम पर खतरे की दुहाई देकर समय-समय पर ढेरों फतवे जारी किए गए हैं। कई फतवों में तो इस्लाम की खिलाफत करने वाले को जान से मार देने तक की बातें शामिल थीं। ऐसे में देश-दुनिया को हिला देने वाले कुछ फतवों के बारे में जिक्र करना भी यहां जरूरी हो जाता है। कारण कि दुनिया के दो सबसे पुराने धर्म यहूदी धर्म और हिन्दू धर्म से इस्लाम मतावलंबियों का बैर स्वाभाविक है। पारसी धर्म की भी यही स्थिति है। वहीं, हिन्दू धर्म से अलग हुए सिख धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म आदि से भी इस्लाम मतावलंबियों का बैर और सबको काफिर ठहराने वाली सोच भी पूर्वाग्रह से ज्यादा कुछ नहीं।
हालांकि, अब्राहम परिवार के ही यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म की ये आपसी रस्साकशी दुनिया की समझ से बाहर है। इसलिए गाहे बगाहे निकलने वाले इन फतवों के समानांतर यदि सभी धर्म गुरु ऐसे ही पूर्वाग्रह प्रेरित फतवे जारी करने लगे तो फिर सर्व धर्म समभाव की पवित्र सोच की ही बलि चढ़ जाएगी। बता दें कि फतवा एक अरबी लफ्ज़ है जिसका अर्थ है मुस्लिम कानून के अनुसार किसी निर्णय पर दी जाने वाली राय। इस्लाम धर्म में फतवा मजहब के मुफ्ती द्वारा दिया गया राय है।
बताया जाता है कि 13 जून 2025 को शुरू हुए 12 दिवसीय ईरान-इजरायल युद्ध के 25 जून को रुकने के कुछ दिन बाद ही यह इस्लामिक फतवा आया है। इसके आसपास ही 56 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी की इस्ताम्बुल बैठक तुर्किये में हुई है, जिसमें पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए भारत पर अनर्गल आरोप मढ़े गए हैं। ऐसे में ईरानी फतवे की टाइमिंग गौर करने वाली है। लोगों को शक है कि इसके पीछे भी ओआईसी का हाथ हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि ईरान की सरजमीं से वहां के शीर्ष शिया मौलवी ग्रैंड अयातुल्ला नासेर मकारेम शिराजी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जो फतवा जारी किया है, उसमें आप अघोषित रूप से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम समझ सकते हैं, क्योंकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने जो पाकिस्तान की दुर्गति की है, उससे दुनिया के मुसलमानों के एक गुट में रोष इसलिए है कि अमेरिका-चीन उन्हें भारत के खिलाफ उकसाते रहते हैं।
गौरतलब है कि ईरानी फतवे में मुसलमानों से अमेरिकी और इजरायली नेताओं को गिराने का आह्वान किया गया है। वहीं, इस्लामी राज्यों द्वारा दुश्मनों का समर्थन हराम बताया गया है। फतवे में मुसलमानों को कर्तव्यों का पालन करने पर अल्लाह की राह में पुरस्कृत होने का आश्वासन दिया गया। लेकिन जिस तरह से इजरायल व अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला करने से पहले और उसके बाद भी पाकिस्तान अपने दोगलेपन से बाज नहीं आया और पुनः अमेरिका के गोद में जा बैठा। इससे चीन और इस्लामिक देशों का चिंतित होने स्वाभाविक है।
बता दें कि13 जून को इजरायल ने ईरान में बमबारी अभियान शुरू किया जिसमें ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर और उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिक मारे गए। वहीं, तेहरान ने इजरायली शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से जवाब दिया। इजरायल ने कहा कि उसका उद्देश्य इस्लामी गणतंत्र को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। इस दावे को तेहरान ने लगातार नकारा है। वहीं, ईरान की तीन परमाणु सुविधाओं पर हमला करने के लिए अमेरिका भी जंग में कूद गया था, जिससे तनाव और बढ़ गया। इसके बाद ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बमबारी की। यूँ तो अभी जंग रुकी हुई है और सीजफायर लागू है। लिहाजा ऐसा सख्त फतवा जारी करने के सियासी मायने स्पष्ट हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है कि ईरानी मौलवियों ने ऐसा फतवा जारी किया है जिससे हिंसा को बल मिल सकता है।
एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, माकारेम ने फतवे में कहा, "कोई भी व्यक्ति या शासन जो नेता या मरजा को धमकी देता है, उसे 'वॉरलॉर्ड' या 'मोहरेब' माना जाता है।" वहीं, एक टीवी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहरेब वह है जो अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ता है, और ईरानी कानून के तहत, मोहरेब के रूप में पहचाने जाने वाले लोगों को फांसी, सूली पर चढ़ाए जाने, अंग काटने या निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है। इस फतवे में कहा गया है कि "मुसलमानों या इस्लामी राज्यों द्वारा उस दुश्मन के लिए कोई भी सहयोग या समर्थन हराम या मना है। दुनिया भर के सभी मुसलमानों के लिए यह आवश्यक है कि वे इन दुश्मनों को उनके शब्दों और गलतियों पर पछतावा कराएं।" इसमें यह भी कहा गया है कि यदि "अपने मुस्लिम कर्तव्य का पालन करने वाले मुस्लिम को अपने अभियान में कठिनाई या हानि का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें अल्लाह की इच्छा से, अल्लाब की राह में एक योद्धा के रूप में पुरस्कृत किया जाएगा।" अल्लाह के दुश्मनों को हमलोग नेस्तनाबूद कर देंगे।
हाल के दिनों में हमने देखा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति और इजरायल के नेताओं ने किस तरह बार-बार ईरान के सुप्रीम लीडर को धमकी दी है। सुप्रीम लीडर की हत्या की धमकी को लेकर इस्लामी समुदाय और उसके नेतृत्व का कर्तव्य क्या है? अगर अमेरिकी सरकार या कोई और इस तरह की गतिविधियों में लिप्त रहता है तो ऐसे में दुनियाभर के मुसलमानों की जिम्मेदारी क्या है? इसलिए फतवे में कहा गया कि जो भी ईरान के सुप्रीम लीडर या धार्मिक नेताओं की हत्या की योजना बनाएगा। इस्लामिक कानून के तहत वह कड़ी से कड़ी सजा का हकदार होगा। दुनियाभर के सभी मुसलमानों के लिए जरूरी है कि वे इन दुश्मनों को पहचानें और ताकत के साथ बदला लें। अगर उन्हें कड़ी सजा नहीं दी गई तो जिहादी प्रतिशोध का इनाम अल्लाह के पास है। अल्लाह सुप्रीम लीडर की हिफाजत करे। उन पर कृपा बनाए रखें। फतवे में कहा गया कि जो भी इस्लामिक उम्माह के नेतृत्व और उसकी एकजुटता के लिए खतरा बनेगा, उसे अल्लाह की अवहेलना माना जाएगा।
बताते चलें कि जब इस्लामिक फतवा निकलता है तो अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाती है, क्योंकि इसका स्पष्ट मतलब होता है कि जिसके खिलाफ यह फतवा जारी हुआ है, अब उसकी खैर नहीं। चाहे व्यक्ति हो या संस्था, दुर्गति तय है। ऐसा इसलिए कि समूचा मुस्लिम समाज अब एकजूट होकर सम्बन्धित व्यक्ति या संस्था से बदला लेगा, या फिर उनमें से जिस किसी के हाथ वह लगेगा, वही उनका काम तमाम कर देगा। हालांकि इस्लामिक फतवा का मतलब किसी की जान लेना भर ही नहीं होता है, बल्कि यह किसी संगठन के खिलाफ एकजूट होने का आह्वान भी हो सकता है। जैसे भारत में जामा मस्जिद से सियासी फतवा जारी करने का प्रचलन 1990 के दशक में जोर पकड़ने लगा था। तब कांग्रेस व जनता दल में इस बात की होड़ मची रहती थी कि अपने पक्ष में फतवा जारी करवा लें। बाद में जनता दल से अलग होकर बने विभिन्न क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने भी यही रवैया अपनाया।
मौजूदा आक्सफोर्ड डिक्शनरी में फतवा शब्द को 'इस्लामी कानून के मुताबिक एक अधिकारिक आदेश' के रूप में परिभाषित किया गया है। हालांकि वर्ष 1988 में कानसाइज आक्सफोर्ड डिक्शनरी का सातवां संस्करण प्रकाशित हुआ। लेकिन उसमें भी फतवा शब्द के बारे में कुछ नहीं लिखा था। ऐसे भारत में भी फतवे की बात कोई नई नहीं है। पहले भी ऐसे कई फतवे सुर्खियों में रहे हैं। हमने कुछ ऐसे फतवों पर एक नजर डाली है।
# जानिए ऐसे ऐसे फतवे जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया!
पहला, सलमान रश्दी के खिलाफ फतवा: विवादस्पद लेखक सलमान रश्दी को पुस्तक 'द सैटनिक वर्सेस' के आपत्तिजनक अंशों के चलते फतवे की मार झेलनी पडी थी। ईरानी नेता अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी ने 14 फरवरी 1989 को रश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया था। रश्दी के खिलाफ जब फतवा जारी किया तो बहुतों को यह भी पता नहीं था कि फतवा होता क्या है। लेकिन जल्द ही पूरी दुनिया में इस फतवे और उसकी गूंज साफ़ सुनाई देने लगी।
दूसरा, तसलीमा नसरीन के खिलाफ फतवा: बंगलादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन द्वारा लिखित "लज्जा" और "द्विखंडिता" जैसी उनकी पुस्तकें इस्लामिक जगत में तूफ़ान ला चुकी हैं।1994 में लिखी उनकी किताब ‘लज्जा’ के विरोधस्वरूप मुस्लिम संगठनों ने उनकी हत्या का फतवा जारी कर रखा है। वे तब से अपना ढाका स्थित अपना घर छोड़कर स्वीडन,फ्रांस, अमेरिका, भारत, सहित अनेक देशों में घूम रही हैं।
तीसरा, गुडिया के खिलाफ फतवा: भारतीय सेना में काम कर रहे आरिफ से ब्याही गुडिया नामक युवती के खिलाफ भी मौलानाओ ने फतवा जारी किया था। इस फतवे के चलते पूरे देश में बवाल की स्थिति निर्मित हो गई थी। दरअसल पति के युद्ध में अचानक गायब होने पर गुडिया को नये घर में ब्याह दिया गया था, जहां उसकी एक सन्तान भी हुई। लेकिन पाकिस्तान की जेल में बन्द आरिफ जब अचानक लौट आया तो मौलवियों ने फतवा दिया कि गुड़िया को आरिफ के साथ ही रहना होगा। उत्तरप्रदेश के इस बहुचर्चित मामले ने भारत में फतवे को लेकर भारी बवाल मचाया था।
चतुर्थ, वीना मलिक के खिलाफ फतवा: रियलिटी शो बिग बॉस का हिस्सा बनकर चैनल की टीआरपी बढ़ा रहीं पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक अपने देश में इस्लाम के लिए ‘खतरा’ बनी हुई हैं। पाकिस्तानी धर्मगुरुओं की नजर में वीना ने भारतीय टीवी शो में अभिनय कर गैरजिम्मेदाराना हरकत की है। पाकिस्तान के धर्मगुरू मुफ्ती अब्दुल कावी ने इन पर ‘बेहयाई’,‘बेशर्मी’ और ‘बेगैरती’ का आरोप लगाया जबकि वीना को भारत के टीवी चैनलों पर गैरजिम्मेदाराना व्यवहार कर इस्लाम कर इस्लाम का अपमान करने का आरोपी बताया गया है। माना जा रहा है की इस्लाम के पैरोकार दायर सवेर इनपर भी फतवा जारी कर सकते हैं।
पंचम, डाई को ना मेहंदी को हां: देवबंद ने मुस्लिम समुदाय के पुरुष और महिलाओं से हेयर डाई का इस्तेमाल करने से भी रोका है। इस संबंध में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए देवबंद ने इसे 'धोखा' कहा और महंदी को ही उपयुक्त बताया है।
षष्टम, सानिया-शोएब की नजदीकियों पर फतवा: काफी दिनों तक चर्चा में रही टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा और पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक की शादी को लेकर भी एक फतवा जारी हुआ था। सुन्नी उलेमा बोर्ड को सानिया और शोएब के शादी से पहले साथ एक घर में रहने और मिलने जुलने पर आपत्ति थी। बोर्ड के अनुसार निकाह के पहले एक छत के नीचे रहना गैर इस्लामिक है। ये फतवा उस वक्त जारी हुआ था जब शोएब हैदराबाद में बंजारा हिल्स स्थित मिर्जा हाउस में एक हफ्ते से रह रहे थे।
सप्तम, वंदे मातरम के खिलाफ फतवा: जमात ए उलेमा हिंद ने मुसलमानों के वंदेमातरम गाने के खिलाफ फतवा जारी किया था। जमात के अनुसार वंदेमातर गाना इस्लाम के खिलाफ है। देवबंद द्वारा इस बात को मंजूरी भी दी गई थी। इस फतवे के पीछे तर्क ये था कि वंदेमातरम गाने में कुछ लाइनें इस्लाम के खिलाफ हैं।
अष्टम, महिलाओं के मॉडलिंग के खिलाफ फतवा: दारूल उलूम देवबंद ने मुसलमाम महिलाओं द्वारा मॉडलिंग को शरियत कानून के खिलाफ बताया है। उन्होंने महिलाओं के रैम्प पर शारीरिक प्रदर्शन को गैर इस्लामिक बताया है।
नवम, एयरपोर्ट पर बॉडी स्कैनर के खिलाफ फतवा: एक इस्लामिक संगठन ने एयरपोर्ट पर मुसलमानों द्वारा फुलबॉडी स्कैनर के खिलाफ फतवा जारी किया है। दारूल उलूम देवबंद और उलेमा काउंसिल ने भी इस फतवे का समर्थन किया था। उनके अनुसार फुलबॉडी स्कैन इस्लामिक कानून और मानव गरिमा के खिलाफ है। जबकि कुछ संगठनों के अनुसार यदि सुरक्षा कारणों के लिए जरूरी हो तो उन्हें फुलबॉडी स्कैन से कोई आपत्ति नहीं।
दशम, फ्रांस के सामान के खिलाफ फतवा: पिछले समय में फ्रांस में बुर्के को लेकर काफी बवाल हुआ। जिसके बाद दारूल उलूम देवबंद ने फ्रांस में बना सामान खरीदने के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की बुर्के के खिलाफ टिप्पणियों के बाद मुसलिम धर्मगुरू खासे नाराज थे।
ग्यारह, भारत हमला करे तो जेहाद के लिए फतवा: पाकिस्तान में मुसलिम धर्मगुरूओं ने फतवा जारी किया था कि यदि भारत उनके देश पर हमला करता है तो जेहाद के लिए फतवा जारी किया जाएगा। जिसके अंतगर्त सभी लोगों के लिए जेहाद में शामिल होना अनिवार्य किया जाएगा। उलेमाओं द्वारा लाहौर में पाकिस्तान की सुरक्षा को लेकर आयोजित एक मीटिंग में ये फतवा जारी किया गया।
बारह, फेसबुक के खिलाफ फतवा: फेसबुक को गैरइस्लामिक बताते हुए मुस्लिम संगठन ने इसके इस्तेमाल के खिलाफ फतवा जारी किया था। संगठन के अनुसार फेसबुक परिवार को बिगाड़ता है। संगठन ने घोषणा कर दी की जो भी मुसलमान फेसबुक का इस्तेमाल करता है वह पापी है। उनके अनुसार फेसबुक का इस्तेमाल करने से मिस्त्र में कुछ जोड़ों का तलाक फेसबुक अकाउंट के कारण हुआ।
इन फतवों से साफ है कि दुनियाभर में काफिरों के खिलाफ इस्लामिक कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन आशंका इस बात की भी है कि यदि पादरी, पंडित, ग्रंथी आदि भी इसी तरह से पलटवार करते रहें तो फिर भारत संघर्ष भूमि बनकर रह जाएगा। शेष दुनिया की भी यही अधोगति होगी। इसलिए इनकी धार्मिक महत्वाकांक्षाओं से बचने की जरूरत है।
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