संदेश

The eternal political message of the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा का शाश्वत सियासी संदेश https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से कद्दावर ओबीसी नेता धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल भाजपा के एक व्यक्ति का इस्तीफा मानना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि वह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नवरत्नों में शुमार किये जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्वास भी उन्हें हासिल था। बावजूद इसके भारी जनदबाव के बीच यदि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा तो इसे कई स्तरों पर भाजपा/आरएसएस के राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लोकतांत्रिक राजनीति में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रभावी शासन सबसे महत्वपूर्ण पूंजी हैं। देखा जाए तो जिस तरह से राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार कर्नाटक मूल के भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया है, उसके निहितार्थ को भी समझे जाने क...

Student Movement: Policy and Political Meaning of Prime Minister Modi's Selfie Video Dialogue

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छात्र आंदोलन: प्रधानमंत्री मोदी के सेल्फी वीडियो संवाद के नीतिगत व सियासी मायने https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब नई दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र राजनीति गरमाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया और सोशल मीडिया मंच "इंस्टाग्राम" पर किए अपने एक लगभग 2.55 मिनट के सेल्फी वीडियो पोस्ट के माध्यम से जेन-जी से संवाद स्थापित कर विपक्षी नेताओं के सियासी चक्रब्यूह को सफलतापूर्वक भेद दिया। छात्र आंदोलन के दृष्टिगत प्रधानमंत्री के सेल्फी वीडियो संवाद के नीतिगत व सियासी मायने दूरगामी प्रभाव वाले साबित होंगे। इस बात में कोई दो राय नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णायक पहल से पुनः यह स्पष्ट हो गया कि पीएम मोदी भारतीय राजनीति पर गहरी पकड़ रखते हैं और जब जब सियासी फुटबॉल सुर्खियों में आता है, तब तब वह खुद ही आगे आकर कांग्रेस के नेता प्तिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ राजनीतिक मैदान का तगड़ा गोल मारते हुए उन्हें अप्रासंगिक बना डालते हैं। ...

Is political, social, economic, cultural, administrative and judicial 'hooliganism' the Yaksha question of contemporary democracy?

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क्या राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक और न्यायिक 'गुंडागर्दी' समकालीन लोकतंत्र का यक्ष प्रश्न है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  समय के साथ-साथ जैसे-तैसे मैं बड़ा हुआ तो घर-परिवार, गांव-समाज, देश-दुनिया के हर क्षण बदलते चेहरों से वाकिफ होता रहा। कहीं भुक्तभोगी, कहीं प्रत्यक्षदर्शी की तरह और प्रायः समाचार/मीडिया माध्यमों में, जो कुछ देखा-सुना-समझा, उसने हमारे छात्र जीवन और पेशेवर जीवन को झकझोर कर रख दिया।  शायद इसी से हमारे लोक चिंतन की शुरुआत हुई, लेखन को तरह तरह की धार पर धार मिली और समकालीन विश्व का सबसे बड़ा सवाल मन में कौंधा कि आखिर में "राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और न्यायिक 'गुंडागर्दी' समकालीन लोकतंत्र का यक्ष प्रश्न क्यों बना हुआ है?"  आखिर हर बार हमारा-आपका संविधान खामोश क्यों हो जाता है? संसद, शीर्ष सचिवालय, सुप्रीम कोर्ट, और प्रसार भारती सबकुछ रफा-दफा करने के चक्कर में क्यों पड़ जाता है? आखिर इस सर्वहितकारी विषयों पर कभी राजनेताओं, नौकरशाहों, न्यायविदों, पत्रकारों, शिक्षाविदों, लोक चि...

What should be the 'protest protocol' so that there is no disturbance?

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आख़िर क्या हो 'प्रदर्शन प्रोटोकॉल' ताकि न होने पाए उपद्रव? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार और जन-जीवन की सुरक्षा—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए ऐसा प्रोटोकॉल होना चाहिए जो शांतिपूर्ण विरोध की रक्षा करे, लेकिन हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ को रोके। गत दिनों कॉकरोच जनता पार्टी/सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली या अन्य राज्यों में जो कुछ हुआ, उसे कानून का शासन कतई नहीं माना जा सकता। इससे यह प्रश्न एक बार पुनः प्रासंगिक हो चुका है।  चूंकि इससे पहले भी अनेक प्रदर्शन उग्र हुए, जिससे सरकारी व निजी संपत्ति की क्षति हुई, पर कार्रवाई वही लीपापोती वाली या फिर दलगत प्रतिशोध जैसी, जबकि दोनों अनुचित है। ऐसी कोई भी कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए। जानकारों की राय में एक संतुलित "प्रदर्शन प्रोटोकॉल" इस प्रकार हो सकता है:-  पहला, पूर्व अनुमति और उत्तरदायित्व: आयोजकों को समय, मार्ग, अनुमानित भीड़ और जिम्मे...

Ghaziabad's Dr. Vijay Pandey's robotic surgery expertise resonates in the US

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अमेरिका में गूंजी गाजियाबाद के डॉ विजय पांडेय की रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञता की अनुगूंज # डॉ. विजय एस. पांडे ने रोबोटिक सर्जरी पर प्रस्तुत किया शोध पत्र # फ्लोरिडा में सोसायटी ऑफ रोबोटिक सर्जन्स के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ता के रूप में हुए शामिल, दुनिया के विशेषज्ञों के सामने साझा किया अनुभव # रोबोटिक तकनीक से जटिल हर्निया के दीवार के पुनर्निर्माण पर उपचार और पेट की दीवार के पुनर्निर्माण पर दिया वैज्ञानिक व्याख्यान, नई शल्य चिकित्सा पद्धति की जानकारी दी  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 # अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञता का बढ़ा मान, रोबोटिक और हर्निया सर्जरी के क्षेत्र में डॉ. पांडे के योगदान को मिली नई पहचान @ कमलेश पांडेय/राजनैतिकदुनिया गाजियाबाद। चिकित्सा के क्षेत्र में गाजियाबाद के लिए गौरव की एक और उपलब्धि सामने आई है। शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजय एस. पांडे ने अमेरिका के फ्लोरिडा में आयोजित प्रतिष्ठित सोसायटी ऑफ रोबोटिक सर्जन्स (एसआरएस) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर वक...

The political significance of the NDA MPs' 'Mangal Milan' session

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एनडीए सांसदों के सत्रीय 'मंगल मिलन' के सियासी मायने https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र में पिछले 12 वर्षों से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार इन दिनों पुनः उस एकजुट विपक्ष के निशाने पर है, जिसे वह अबतक चुनावी सियासी पाट पर पछाड़ते आई है। लेकिन जिस तरह से बहुरूपिया विपक्ष कभी मुसलमानों के छद्म वेश में, कभी किसानों के रूप में और कभी छात्रों के छद्म वेश में जिस तरह से मोदी सरकार को घेरने पर तुला हुआ है, उसके पीछे विदेशी हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी सरकार सबसे जूझ रही है! हाल ही में छात्र आंदोलन की कथित सफलता से घबराई सरकार ने जिस तरह से अपने ओबीसी रणनीतिकार शिक्षा मंत्री की राजनीतिक बलि चढ़ाई है, और इससे उत्साहित कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने जिस घमंड का प्रदर्शन किया, उससे विपक्ष उत्साहित है। यही वजह है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधे निश...

Why, after all, did India call upon the international community to intervene and ensure accountability regarding the state-sponsored repression taking place in Pakistan-occupied Jammu and Kashmir?

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आखिर भारत ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही तय करने का आह्वान क्यों किया? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK/PoJK) में कथित सरकारी दमन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही की अपील केवल एक मानवीय बयान नहीं, बल्कि एक बहु-स्तरीय कूटनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है। हाल के दिनों में भारत ने पाकिस्तान से क्षेत्र में नागरिकों के साथ हुए कथित दमन पर जवाबदेही तय करने की जो मांग की है, उसके कूटनीतिक मायने तलाशे जाने लगे हैं।  दरअसल किसी भी तानाशाह देश में जब चुनाव भरोसे का संकट बन जाए, तो जनता का उद्वेलित होना स्वाभाविक है। पाक अधिकृत कश्मीर/जम्मू-कश्मीर में आजकल यही हो रहा है। वहां पर इन दिनों एक ही नारा गूंज रहा है, वह यह कि  "Justice for PoJK, End Our Exile!" अर्थात "POJK के लिए न्याय, हमारा निर्वासन समाप्त करो!" यही वजह है कि ...