रूस के निचले सदन स्टेट डूमा के चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी की बंपर जीत के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थ
रूस के निचले सदन स्टेट डूमा के चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी की बंपर जीत के राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय निहितार्थ
"रूस की जनता ने रूस के निचले सदन (State Duma) के चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया'द्वारा 450 में से रिकॉर्ड 355 सीटें हासिल करवाकर न केवल एक विधायी जीत दिलवाई है, बल्कि रूस की आंतरिक राजनीति और वैश्विक कूटनीति दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है। वह है मौजूदा दौर में - पुतिन इज रूस एंड रूस इज पुतिन।"
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
रूस के निचले सदन (State Duma) के चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया'द्वारा 450 में से रिकॉर्ड 355 सीटें हासिल करना केवल एक विधायी जीत नहीं है, बल्कि यह रूस की आंतरिक राजनीति और वैश्विक कूटनीति दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
इस चुनावी परिणाम के प्रमुख राष्ट्रीय और कूटनीतिक निहितार्थ निम्नलिखित हैं:
# सर्वप्रथम, राष्ट्रीय (आंतरिक) निहितार्थ:
एक, संवैधानिक और विधायी सर्वोच्चता: 355 सीटों के साथ यूनाइटेड रशिया के पास 78% से अधिक का बहुमत आ गया है। इससे क्रेमलिन (रूस सरकार) को बिना किसी विपक्षी रुकावट के संविधान में संशोधन करने, आपातकालीन कानून पारित करने और नए बजटीय प्रावधानों को मंजूरी देने का एकाधिकार मिल गया है।
दो, पुतिन की नीतियों पर जनता की मुहर का दावा: क्रेमलिन इस परिणाम का उपयोग यह साबित करने के लिए करेगा कि देश की आम जनता राष्ट्रपति पुतिन और उनकी सैन्य/आर्थिक नीतियों के साथ पूरी तरह एकजुट है।
तीन, विपक्ष की अनुपस्थिति: चुनाव में प्रमुख विपक्षी नेताओं/दलों पर लगे प्रतिबंधों के कारण संसद में कोई प्रभावी विरोधी आवाज नहीं बची है। कम्युनिस्ट पार्टी या LDPR जैसी अन्य दल भी बुनियादी नीतिगत मुद्दों पर क्रेमलिन का समर्थन करते हैं।
चार, युद्ध के दिग्गजों की राजनीति में प्रविष्टि: संसद में यूक्रेन युद्ध में भाग लेने वाले सैन्य दिग्गजों और अधिकारियों को भी स्थान मिला है, जिससे रूस के भावी राजनीतिक नेतृत्व में सेना और सुरक्षा बलों का प्रभाव और अधिक मजबूत होगा।
# द्वितीय, कूटनीतिक (अंतरराष्ट्रीय) निहितार्थ:
एक, यूक्रेन संघर्ष में कोई नरमी नहीं: इस प्रचंड बहुमत के बाद वैश्विक स्तर पर यह संकेत गया है कि रूस यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों और लक्ष्यों को पीछे खींचने के मूड में नहीं है। पुतिन बिना किसी आंतरिक राजनीतिक दबाव के लंबे समय तक युद्ध जारी रखने में सक्षम होंगे।
दो, पश्चिम के साथ तनाव में वृद्धि: अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इन चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान कराने की आलोचना की है। इस जीत से रूस और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध और गहराने की संभावना है।
# ग्लोबल साउथ और सहयोगियों के साथ संबंध:
एक, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान: इस राजनीतिक स्थिरता से रूस के इन देशों के साथ रक्षा और आर्थिक संबंधों को और गति मिलेगी।
दो, भारत पर प्रभाव: भारत के लिए रूस में राजनीतिक निरंतरता और स्थिरता का सीधा मतलब है कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक समझौते (जैसे रियायती कच्चे तेल की आपूर्ति और सैन्य पुर्जों की डिलीवरी) बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे।
तीन, वैश्विक प्रतिबंधों का मुकाबला: संसद पर पूर्ण नियंत्रण के कारण रूस सरकार पश्चिमी प्रतिबंधों से निपटने के लिए नई आर्थिक रणनीतियों और मित्र देशों के साथ डी-डॉलराइजेशन (स्थानीय मुद्राओं में व्यापार) को बढ़ावा देने वाले विधेयकों को तेजी से लागू कर सकेगी।
स्पष्ट है कि रूस की जनता ने रूस के निचले सदन (State Duma) के चुनावों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया'द्वारा 450 में से रिकॉर्ड 355 सीटें हासिल करवाकर न केवल एक विधायी जीत दिलवाई है, बल्कि रूस की आंतरिक राजनीति और वैश्विक कूटनीति दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है। वह है मौजूदा दौर में - पुतिन इज रूस एंड रूस इज पुतिन।
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