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भारत और साइप्रस के बीच हुई रणनीतिक साझेदारी- समझौतों के कूटनीतिक, सामरिक और आर्थिक मायने

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भारत और साइप्रस के बीच हुई रणनीतिक साझेदारी- समझौतों के कूटनीतिक, सामरिक और आर्थिक मायने  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत और साइप्रस के बीच हाल में हुई रणनीतिक साझेदारी और विभिन्न समझौतों के कई बड़े कूटनीतिक, सामरिक और आर्थिक मायने हैं। देखा जाए तो यह केवल द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि यूरोप, भूमध्यसागर, पश्चिम एशिया और वैश्विक शक्ति-संतुलन से भी जुड़ा कदम माना जा रहा है। चूंकि तुर्की और साइप्रस के बीच गहरी दुश्मनी है, इसलिए भारत उसे तुर्किये के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है, क्योंकि तुर्किये भारत के चिर शत्रु पाकिस्तान का मित्र है। इस प्रकार भारत के रणनीतिकारों ने एक तीर से कई शिकार किये हैं। उल्लेखनीय है कि साइप्रस एक द्वीप है, इसलिए उसकी लैंड बॉर्डर तुर्की के साथ नहीं लगती है। लेकिन समुद्री मार्ग से साइप्रस और तुर्की के बीच की दूरी महज 65 से 70 किलोमीटर है। यही नहीं, साइप्रस तुर्की से 85 गुना छोटा देश है। इसलिए तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है। चूंकि तुर्की तो साइप्रस को एक देश भी नहीं म...

स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट क्या है? यह सीमा रक्षा के लिए क्यों और कहाँ कहाँ जरूरी है?

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स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट क्या है? यह सीमा रक्षा के लिए क्यों और कहाँ कहाँ जरूरी है? विस्तार से जानिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट भारत की सीमाओं को पारंपरिक तारबंदी और मानव गश्त से आगे बढ़ाकर तकनीक आधारित “इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा कवच” में बदलने की योजना है। इसे मुख्यतः कम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (CIBMS- Comprehensive Integrated Border Management System) के तहत विकसित किया गया है। हाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर बड़े स्तर पर "स्मार्ट   बॉर्डर प्रोजेक्ट" लागू किया है। # जानिए स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट क्या है? स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट एक ऐसा सिस्टम है जिसमें सीमा पर केवल बाड़ (Fence) नहीं होती, बल्कि एआई (AI) आधारित निगरानी, सेंसर नेटवर्क, ड्रोन और रडार, थर्मल कैमरे, भूमिगत सेंसर, सैटेलाइट और फाइबर नेटवर्क, रियल टाइम कमांड सेंटर आदि सभी को परस्पर जोड़कर “इंटेलिजेंट बॉर्डर” बनाया जाता है।  # स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट में अनुप्रयुक्त तकनी...

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के तीन दिवसीय भारत दौरे के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मायने अहम

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के तीन दिवसीय भारत दौरे के अहम अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने तीन दिवसीय विदेश दौरे के तहत 23-26 मई 2026 तक भारत के दौरे पर आए हैं। उनका यह दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन, इंडो-पैसिफिक रणनीति, ऊर्जा राजनीति और चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता के नजरिए से इन सबके बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वे भारत के विदेशमंत्री एस. जयशंकर समेत भारतीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की आहूत बैठक में भी भाग लेंगे।  अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ बताते हैं कि, अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो की मौजूदा यात्रा इस मायने में बेहद महत्वपूर्ण है कि भारत के पड़ोसी देश चीन की यात्रा पर गए अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ जहां तमाम चीनी प्रशंसा के पुल बांधने के बावजूद अपेक्षाकृत खाली हाथ स्वदेश लौटे हैं, वहीं उनके ठीक बाद चीन पहुंचे अमेरिका के प्रबल प्रतिद्वंद्...

भारत में जानलेवा हुई गर्मी के साइड इफेक्ट्स समझिए, इसके कारण और बचाव के उपाय जानिए

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भारत में जानलेवा हुई गर्मी के साइड इफेक्ट्स समझिए, इसके कारण और बचाव के उपाय जानिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हमारे देश का राजनीतिक तापमान तो वर्षपर्यंत उच्च रहता आया है और चुनावी इलाकों में इसके वैचारिक हीट स्ट्रोक से सिस्टम का झुलसना स्वाभाविक माना जाता है। लेकिन जब मई-जून के महीने में मौसमी तापमान जानलेवा स्तर तक खतरनाक रूप से चढ़ता जाता है तो लोग बाग परेशान हो उठते हैं। फिर अपनी राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गलतियों पर पछतावा के अलावा कुछ नहीं मिलता, क्योंकि विकास के नाम पर आधुनिक भारतीय सभ्यता विनाश की ओर बढ़ती चली जा रही है और पश्चिमी शिक्षा प्राप्त हमारे हुक्मरान तमाशबीन बने बैठे हैं, क्योंकि हरेक आपदा को अवसरों में बदलकर  अपनी कमाई बढ़ाने का धंधा उन्होंने सीख लिया है। बेशक अपवाद भी होंगे, लेकिन अल्पमत में, जिनकी लोकतंत्र में कम कद्र होती आई है। वहीं, भारत में बढ़ती खतरनाक गर्मी केवल “मौसमी बदलाव” नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, तेजी से शहरीकरण, जंगलों की कटाई और प्रदूषण का संयुक्त परिणाम बन चुकी है। हाल के वर्...

नेताओं की अराजकतावादी मानसिकता क्या है? इससे हुई राष्ट्रीय क्षति से बचाव कैसे होगा?

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नेताओं की अराजकतावादी मानसिकता क्या है? इससे क्या क्या राष्ट्रीय क्षति हुई है? बचाव कैसे होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक नेताओं की अराजकतावादी मानसिकता का अर्थ ऐसी राजनीतिक सोच और व्यवहार से है, जिसमें संविधान, संस्थाओं, कानून, सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय हितों की अपेक्षा व्यक्तिगत सत्ता, भीड़-उत्तेजना, तुष्टीकरण, हिंसात्मक राजनीति, असंयमित बयानबाजी या अराजक दबाव-राजनीति को प्राथमिकता दी जाती है। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को गद्दार कहने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एलओपी के वक्तव्य को अराजकतावादी राजनीतिक मानसिकता करार दिया है, जिससे यह सवाल पुनः मुखर हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यह मानसिकता कई रूपों में दिखाई देती है— पहला, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार अविश्वास फैलाना। दूसरा, कानून से ऊपर स्वयं को प्रस्तुत करना। तीसरा, जाति, धर्म, क्षेत्र या भाषा के आधार पर स...

बदलते बिहार की सकारात्मक छवि गढ़कर निवेश प्रवाह को आकर्षित करेगा "ब्रांड बिहार"

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बदलते बिहार की पहचान, रमणीक छवि और निवेश परिस्थिति को गढ़कर मजबूत करेगा "ब्रांड बिहार"  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक “ब्रांड बिहार नीति” का अर्थ केवल किसी सरकारी विज्ञापन अभियान से नहीं है, बल्कि बिहार की एक ऐसी व्यापक रणनीति से है जिसके जरिए राज्य की सकारात्मक पहचान बनाई जाए, ताकि बिहार को निवेश, पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति, उद्योग, कृषि और मानव संसाधन के एक बड़े केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।  माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में आगे बढ़ रहे "ब्रांड बिहार" की इस आकर्षक पहल को रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम कार्य करेगा। जबकि इस पहल को श्रद्धा शर्मा द्वारा सहयोग प्रदान किया जाएगा। बता दें कि हाल के वर्षों में बिहार सरकार ने विशेष रूप से “पर्यटन ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग नीति 2024” जैसी पहलें शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य बिहार की छवि को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मजबूत करना है।  बिहार सरकार ने "ब्रांड बिहार" की शुरुआत की...

बिहार की राजनीति के वर्तमान व भविष्य की 'सियासी धुरी' बन चुके हैं सीएम सम्राट चौधरी

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बिहार की राजनीति के वर्तमान व भविष्य की 'सियासी धुरी' बन चुके हैं सीएम सम्राट चौधरी  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार की राजनीति में जुझारू युवा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को केवल सुलझते हुए वर्तमान का एक नेता ही नहीं, बल्कि “भविष्य की राजनीतिक धुरी” के रूप में देखने वालों की संख्या पिछले 5 वर्षों में तेजी से बढ़ती ही जा रही है और यह सिलसिला निरंतर आगे भी चलता रहेगा। ऐसा इसलिए कि उनके पीछे कई राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक कारण सक्रिय हैं, जो उन्हें राजनीतिक रूप से अजेय बनाते हैं। आइए इन्हें समझते हैं विस्तार से-  पहला, बिहार में भाजपा के भीष्म पितामह कैलाशपति मिश्रा के संजोए हुए सपनों को पूरा करते हुए पार्टी के  पहले मुख्यमंत्री बनने का ऐतिहासिक महत्व है। निःसन्देह साल 2026 में सम्राट चौधरी का बिहार का मुख्यमंत्री बनना भाजपा के लिए ऐतिहासिक मोड़ माना गया, क्योंकि पहली बार बिहार में भाजपा ने मुख्यमंत्री पद अपने हाथ में लिया। इससे प्रदेशवासियों में  यह संदेश गया कि भाजपा अब बिहार में “जूनियर पार्टनर” नहीं रहना ...