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जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए?

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जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए? "यदि नितिन नवीन भाजपा को युवाओं—विशेषकर Gen Z, first-time voters, college students, युवा professionals और startup/entrepreneur वर्ग—से जोड़ना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी बदलाव उन्हें यह करना होगा कि युवाओं को केवल “वोट बैंक” नहीं, बल्कि पार्टी के विचार, संगठन और नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाए।" @  कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवा नेता हैं, लेकिन युवाओं खासकर जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की उनकी मुहिम जब रंग नहीं ला पाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह कार्य अपने ही जिम्मे ले लिया और श्रीराम कॉलेज से लेकर मेट्रो तक "हनुमान कूद" करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे खुद नितिन नवीन के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोदी-शाह और भाजपा-आरएसएस में तालमेल बिठाने के चक्कर में वह खुद अप्रासंगिक होते नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो लगभग आठ महीने से वो पार्टी के राष...

गाजियाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी-वैशाली एक में गड्ढे व खड्डे की भराई शुरू

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गाजियाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी-वैशाली एक में  गड्ढे व खड्डे  की भराई शुरू # समाजसेवी  पप्पू चौपाल द्वारा हनुमान द्वार पर भगवान श्री कृष्ण की छठी के अवसर पर भंडारा का आयोजन किया गया @ राजनैतिकदुनिया  गाजियाबाद। दिल्ली की सीमा से सटे गाजियाबाद नगर निगम अंतर्गत वार्ड नंबर 72 कौशांबी में 9 सितंबर को निगम द्वारा बरसात के दौरान हुए बने हुए गड्ढे व खड्डे को भरने का अभियान चलाया गया,  ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। इस अवसर पर निगम पार्षद कुसुम मनोज गोयल द्वारा मौके पर पहुंच कर निगम के अधिकारियों को जगह जगह गड्ढे व खड्डे दिखाए गए और उन्हें अविलंब भरवाने में सहयोग किया गया। पार्षद श्रीमती कुसुम मनोज गोयल ने बताया कि उन्हें भरवाना बहुत जरूरी है। चूंकि बरसात के कारण अभी प्लांट बंद पड़ा है और नगर निगम द्वारा अभी पेच वर्क  टेंडर होना बाकी है। चूंकि लोगों की गुहार पर कल ही इसकी शिकायत निगम के अधिकारियों से पार्षद द्वारा की गई थी, इसलिए आज यह कार्य कराया जा रहा है। इससे लोगों ने जनप्रतिनिधि व निगम अधिकारियों की सराहना की।  इस अवसर पर ...

अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति?

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अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति? "समझिए, चीन, पश्चिम और UN के बीच भारत की कूटनीतिक परीक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के वास्ते  भारत अपनी जमीन की रक्षा के साथ-साथ दुनिया के नक्शे में अपनी जमीन की सही कहानी भी सुरक्षित रखे। इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सीमा पर चीन से मुकाबला जरूरी है; लेकिन भारत की सीमाओं के नैरेटिव पर दुनिया से संवाद उससे भी ज्यादा जरूरी है।” @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  क्या संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में भारतीय सीमाओं का विवादित चित्रण महज ‘कार्टोग्राफिक एनोमली’ है, या इसके पीछे बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का कोई गहरा संदेश छिपा है? दरअसल भारत को इस सवाल का जवाब भावनाओं में नहीं, बल्कि अत्यंत सतर्क कूटनीति से देना होगा। उल्लेखनीय है कि गत 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने “Correct the Map” प्रस्ताव को 164 मतों के समर्थन से पारित किया। मसलन, इस प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य दुनिया के मानचित्रों में महाद्वीपों के आकार को अधिक न्यायसंगत ढंग से प्रदर्शित करना...

नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति

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नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति # क्या नई दिल्ली दुनिया को नया शक्ति-संतुलन दिखाने जा रही है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को होने वाला 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं है। यह उस समय हो रहा है जब दुनिया एक साथ कई संकटों से गुजर रही है—युद्ध, व्यापारिक टकराव, ऊर्जा असुरक्षा, प्रतिबंधों की राजनीति, आपूर्ति-श्रृंखलाओं का दबाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई भू-राजनीति। ऐसे समय में BRICS की अध्यक्षता भारत के हाथ में होना अपने आप में महत्वपूर्ण है।  भारत ने इस वर्ष के लिए जिस दृष्टिकोण को सामने रखा है—Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability—उसमें केवल आर्थिक सहयोग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलती विश्व-व्यवस्था के बीच भारत की कूटनीतिक सोच भी दिखाई देती है। सवाल इसलिए बड़ा है कि दिल्ली सम्मेलन के बाद दुनिया भारत को किस रूप में देखेगी—एक बड़े विकासशील देश के रूप में, BRICS के संयोजक के रूप में या एक ऐसे स्वतंत्...

वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी की क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा वैशाली सेक्टर एक स्थित नेस्कॉट लाइन में हाई मार्क्स लाइट लगवाया गया

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वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी की क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा वैशाली सेक्टर एक स्थित नेस्कॉट लाइन में हाई मार्क्स लाइट लगवाया गया @ राजनैतिकदुनिया गाजियाबाद। नगर निगम अंतर्गत वार्ड 72 कौशाम्बी की क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा वैशाली सेक्टर एक स्थित नेस्कॉट लाइन में हाई मार्क्स लाइट लगवाया गया, ताकि बरसात में लोगों को इलाका साफ नज़र आए। इसका उद्घाटन समाजसेवी के एल शर्मा एवं जुगेश द्वारा नारियल फोड़ कर किया गया। इस अवसर पर पार्षद श्रीमती गोयल द्वारा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान फूल माला पहनाकर  किया गया। अपने संबोधन में निगम पार्षद श्रीमती गोयल ने  बताया कि  इस जगह पर हमेशा अंधेरा बना रहता था। इसलिए क्षेत्रवासियों की मांग पर यह कार्य कराया गया। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में ट्रिपल इंजन की सरकार में उनके क्षेत्र में विकास कार्य निरंतर चल रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहले नाले के साथ लगी ग्रीन बेल्ट पर घास और पेड़ पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने इस कार्य को करने के लिए महापौर सुनीता दयाल एवं नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक का आभार प्रकट किया। बताया जाता है कि ...

क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय?

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क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय? (Is the chapter of a 'new institutional era' beginning in Ayodhya?) "अब तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का संचालन मुख्यतः ट्रस्ट के पदाधिकारियों और धार्मिक-सामाजिक नेतृत्व के माध्यम से होता रहा। अब पहली बार पूर्णकालिक CEO का पद बनाया गया है। इसका अर्थ है कि मंदिर प्रशासन को केवल धार्मिक न्यास के पारंपरिक ढांचे में नहीं, बल्कि एक बड़े, जटिल और बहुस्तरीय संस्थान के रूप में देखने की जरूरत महसूस हुई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के सबसे शक्तिशाली धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों में बदल चुका है। इसलिए जब भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र कुमार मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाता है, तो इसे महज एक प्रशासनिक नियुक्ति मानकर छोड़ देना शायद इस घटनाक्रम के वास्तविक राजनीतिक और संस्थागत अर्थ को छोटा करके देखना होगा। इस बड़ा अभिप्राय यह है कि क्या अयोध...

आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं?

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आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं? (After all, how long will political and administrative beliefs continue to wander in the mirage of Swadeshi?) "सच कहूँ तो “स्वदेशी से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से प्रतिस्पर्धी भारत और प्रतिस्पर्धी भारत से विश्व बाजार में भारतीय नेतृत्व की पैठ बढ़ती है।” इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंस्टा पोस्ट में देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता भी बतलाई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "आर्थिक विकास दर" में उल्लेखनीय वृद्धि पर देशवासियों को बधाई देते हुए एक बार फिर से स्वदेशी का राग अलापा है और विदेशों से गैर जरूरी सोने की खरीद न करने, विदेश यात्रा से परहेज करने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की है। चूंकि ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके हैं, इसलिए सवाल उठता है कि आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में राजनीतिक आस्थाएं कबतक भटकेंगी? जब स्वदेशी ही सफलता का मूल मंत्र है तो बार-बार आह्वान करने से बेहतर है, वैधानिक प्रतिबंध लगा देना, या मात्रा...