Public sensitivity made IAS Dr Dinesh Chandra the doctor to solve the problems of the people
जनसंवेदनशीलता ने आईएएस डॉ दिनेश चंद्र को बनाया लोकसमस्याओं के समाधान का डॉक्टर
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
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सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और मशहूर लेखक-चिंतक डॉ. दिनेश चन्द्र शोषित-पीड़ित लोगों तक समावेशी विकास की किरण पहुंचाने वाले एक जनप्रिय प्रशासनिक शख्सियत के रूप में जाने जाते रहे हैं। उनका बहुआयामी व्यक्तित्व और सुसंस्कृत विचार उनके आभा मंडल से परिलक्षित होता है। जहां भगवान भास्कर की भांति उनमें ओजस्विता और परोपकारिता का भाव भरा हुआ है, वहीं उनके लोकव्यवहार में चंद्रमा की शीतलता व्याप्त है। इससे उनसे मिलने-जुलने वाले लोग लाभान्वित होते आए हैं।
सच कहूं तो अपनी सुदीर्घ 32 वर्षीय प्रशासनिक सेवा के दौरान आपने बच्चों, युवाओं, वयस्कों और बुजुर्ग लोगों का भरपूर ख्याल रखा। फिर भी बुजुर्ग, गरीब और महिलाओं के दर्द ने आपको ज्यादा द्रवित किया, जिससे आपकी पहचान एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी के रूप में बनी और विकसित हुई। शायद इसी वजह से आप उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के ज्यादा करीब हो पाए, क्योंकि उन्होंने न केवल आपके अंदर की छिपी हुई प्रशासनिक दृढ़ता और सख्ती में विवेक के तेज को पहचाना, बल्कि आपकी योग्यता और जनभावनाओं के अनुरूप यूपी के चार-चार जिलों में लगातार जिलाधिकारी रहने का सुअवसर दिया। आपने भी एक से बढ़कर एक प्रशासनिक प्रतिमान स्थापित किये।
आपके साथ कार्य कर चुके लोग बताते हैं कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ.दिनेश चंद्र सिंह जैसे जनप्रिय अधिकारी कभी रिटायर्ड नहीं होते, बल्कि अपने जनसेवी मिजाज और लंबे प्रशासनिक अनुभवों व राजनीतिक संपर्कों के चलते वे देश व समाज के आम लोगों के लिए और भी ज्यादा उपयोगी हो जाते हैं, क्योंकि पर्याप्त समय मिलने के चलते जनता से जुड़े रहते हैं। ऐसे में आपके जैसे सहज और सरल व्यक्तित्व के लिए ऐसा 30 जून 2026 को अवकाश ग्रहण करना महज एक पद का समापन है, जनसेवा के अहर्निश भाव का नहीं, क्योंकि आपके जैसे एक संवेदनशील और अनुभवी अधिकारी की असली पहचान आपके पद से नहीं, बल्कि आपके अनुभव, दृष्टि और समाज के प्रति समर्पण से होती है।
लिहाजा, अब आप अपने अनुभवों को विशिष्ट जनहितकारी कार्यों में लगाएंगे, क्योंकि यही प्रकृति की प्रेरणा है और आपके अंतःकरण की पुकार भी है। वाकई आपकी लोकप्रियता का आधार केवल आपका प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि आपका सहज व्यवहार, जनसरोकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण और कार्य के प्रति प्रतिबद्धता रही है। वास्तव में, एक अच्छे प्रशासक की पहचान आपके आदेशों से नहीं, बल्कि लोगों के आपके प्रति अटूट विश्वास से होती है। ऐसे में यदि आप जैसे वरिष्ठ अधिकारी को सेवा-काल के बाद भी लोग सम्मान और स्नेह से याद कर रहे हैं तो यही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
आपके महान व्यक्तित्व को समर्पित हैं दो पंक्तियाँ:- "पद की गरिमा से बड़ा होता है व्यक्तित्व का मान, जन-जन के दिल में बस जाए, वही होता है सच्चा सम्मान।" इस दृष्टि से आप यदि अपने दीर्घ प्रशासनिक अनुभव को जनहित, सुशासन, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और युवा मार्गदर्शन में लगाते हैं, तो यह समाज के लिए एक बड़ी पूंजी सिद्ध होगा। आपकी खिदमत में प्रस्तुत है यह शेर: सफ़र रुका है कहाँ, बस मुकाम बदला है, चराग़ वही है, फ़क़त उसका नाम बदला है। इस प्रकार से आपका नया सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन अध्याय और अधिक सार्थक, प्रेरणादायी तथा लोककल्याणकारी बनेगा। ऐसा आपके शुभेच्छु जनों को पूर्ण विश्वास है। ईश्वर आपको निरंतर ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य और समाजहित में नए आयाम स्थापित करने की शक्ति प्रदान करें।
"राजनैतिकदुनिया" के एक सवाल कि प्रशासनिक सेवा में आने की अभिप्रेरणा आपको कहां से मिली? का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि बचपन में माता-पिताजी की आकांक्षाओं, और फिर गुरुजनों के अनवरत प्रोत्साहन के चलते यूपी की पीसीएस के लिए चयनित हुआ और प्रोन्नति पाकर आईएएस बना। सबकी असीम कृपा से प्रदेश के महत्वपूर्ण जनपदों में जनसेवा का अपार अवसर मिला और निज दायित्व को कुशलता पूर्वक निभाया। महाभारत कालीन महात्मा विदुर की धरती बिजनौर जनपद के धामपुर तहसील में जन्म हुआ। समय के साथ उच्च शिक्षा हेतु गंगा, यमुना, सरस्वती की संगम भूमि और महर्षि भारद्वाज की तपोभूमि प्रयागराज चला आया और प्रयागराज विश्वविद्यालय से ही रसायन विज्ञान विभाग से ही पीजी पोस्ट ग्रेजुएट की उपाधि हासिल की।
वहीं, राज्य की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में चयनित और प्रशिक्षित होने के पश्चात सेवा का आरंभ मां गंगा के पवित्र चरणों में हरिद्वार (अब उत्तरांचल) से हुआ। इस दौरान 18 वर्षों तक श्रावण मेला कांवड़ यात्रा की प्रबंधकीय व्यवस्था का प्रशासनिक सहयोगी और साक्षी दोनों रहा। गुजश्ते समय के साथ सूबे की विभिन्न सरकारों में प्रदेश के महत्वपूर्ण जनपदों, यथा- हरिद्वार, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ, इलाहाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद, कानपुर, बहराइच, जौनपुर, लखनऊ आदि में सेवा का सुअवसर मिला। इस दौरान मैंने मनोयोग पूर्वक कार्य किया और आमलोगों को प्रशासन का सर्वश्रेष्ठ देने, दिलाने को ततपर रहा। यही मेरी पहचान भी है। हमारी कालजयी रचनाओं यथा- काल प्रेरणा, कर्म निर्णय और कर्मकुम्भ में मेरे कार्यों की कुछ झलकियां मिलेंगी।
एक पूरक सवाल कि आखिर आपकी सफलता का मूल मंत्र क्या है? का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, 'हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो/बन जाएगा।' साथ ही मेरा अटल विश्वास है कि ''सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं।'' राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की उपर्युक्त पंक्तियां सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहती हैं।
वहीं, एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल कि जिलाधिकारी के रूप में आपका सबसे यादगार कार्य कौन सा रहा और किस जनपद में आपने किया? तो उन्होंने जवाब देते हुए बताया कि जिलाधिकारी के रूप में कानपुर देहात, बहराइच, सहारनपुर, जौनपुर जैसे महत्वपूर्ण व पुराने जनपदों में लोकप्रिय और समर्पित जनसेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बतौर डीएम कार्य करते समय सबसे ज्यादा 1,00,820 बुजुर्ग महिलाओं को लाभान्वित किया। खासकर जनपद जौनपुर में जिलाधिकारी के रूप में सर्वाधिक राजस्व वादों (वार्ता) के निस्तारण का रिकॉर्ड उन्हें प्राप्त है। साथ ही आपदा प्रबंधन विकास एवं शांति व्यवस्था के अंतर्गत सर्वाधिक कांवड़ यात्राओं को सुसंपन्न कराने का श्रेय भी प्राप्त है। इसके अलावा बहराइच, सहारनपुर के बहुमुखी विकास में भी रणनीतिक उल्लेखनीय योगदान दिया हूँ।
आपकी दिलचस्पी के विषय चुनाव से जुड़ा एक सवाल कि चुनाव प्रबंधन में आपका अनुभव कैसा रहा? तो छूटते हुए उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के नेतृत्व में साल 1998 से लेकर एसआईआर 2026 के अंतर्गत कोई ऐसा सामान्य विधानसभा निर्वाचन एवं लोकसभा सामान्य निर्वाचन अस्तित्व में नहीं रहा, जिसमें मेरे द्वारा RO, ARO, Dy DEO, एवं DEO की भूमिका का निर्वहन न किया गया हो। इसके साथ ही 2012, 2014, 2016, 2017, 2019, 2022, 2024 में 6 बार राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं वर्ष 2022 के सामान्य विधानसभा निर्वाचन-2022 में उत्कृष्ट प्रबंधकीय व्यवस्था के लिए माननीय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 25 जनवरी 2023 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के कर कमल से राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर पुरस्कृत होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मेरे सेवाकाल की विशिष्ट उपलब्धि समझी जाएगी।
वहीं, पिछले महीनों में उनकी एक अनोखी उपलब्धि से जुड़ा सवाल कि युवा उद्यमियों के लिए आपने क्या क्या किया? तो उन्होंने जवाब देते हुए बताया कि उन्हें सर्वाधिक लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 24 जनवरी 2026 मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से आच्छादित कराने का रिकॉर्ड मेरे से मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी एवं माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी से सम्मानित होने का गौरव भी प्राप्त हुआ। वहीं 29,23,364 बुजुर्ग महिलाओं को वृद्धा पेंशन का लाभ ले दे रही हैं।
वहीं, उनके पैशन से जुड़ा एक सवाल कि योग और आध्यात्म को आप कैसे देखते हैं? का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि, मैं वैदिक और प्राचीन योग शास्त्रों में शीर्षासन को सर्वोच्च स्थान मानता हूं। गीता के ''योग-कर्मसु कौशलम्'' को उन्होंने आत्मसात किया है। महर्षि पतंजलि के ''योग-चित्तवृत्ति निरोध'' को अपने चिंतन में उतार लिया। वहीं, शीर्षासन से प्राप्त शीर्ष सम्मान से अप्रतिम मेधा के धनी डॉ. चंद्र की हौसला अफजाई
हुई। अध्यात्म शिखर पुरूष के हाथों पुरस्कार पाने के पल गरिमामयी और गौरवपूर्ण क्षण थे।
वहीं, अंतिम सवाल कि आपकी भविष्य की योजनाएं क्या क्या हैं? का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद सिर्फ और सिर्फ जनसेवा, ज्ञान सेवा और पर्यावरण संरक्षण के कार्य करूँगा। क्योंकि शुरू से ही समाज व राष्ट्र की सेवा में मैंने अपना भव्य व दिव्य योगदान दिया है, क्योंकि यही मेरा पारिवारिक संस्कार है।
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