When reservation and the principle of creamy layer become political weapons, then what option will be left for the neglected section?
जब आरक्षण और क्रीमीलेयर का सिद्धांत राजनीतिक हथियार बन जाएं तो फिर उपेक्षित तबके के पास आखिर क्या रास्ता बचेगा? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी तथाकथित बहुमत आधारित लोकतंत्र में जब आरक्षण (एससी-एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस) और क्रीमीलेयर का सिद्धांत (ओबीसी) राजनीतिक हथियार बन जाएं तो फिर एससी-एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के अन्य वंचित या उपेक्षित तबके के पास अपना नैसर्गिक हक पाने के लिए आखिर क्या रास्ता बचेगा, यक्ष प्रश्न है? उससे भी बड़ी बात यह है कि यदि इतिहास के उत्पीड़न को आधार बनाकर किसी के वर्तमान और भविष्य को सजा दी जाएगी, तो प्रभावित लोग इसे कब तलक बर्दाश्त कर पाएंगे, सुलगता वक्त ही बताएगा, हम नहीं! चूंकि भारतीय समाज में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के गलियारों में गूंजता दिखाई दे रहा है। जिस तरह से अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर (समृद्ध वर्ग को बाहर करने का नियम) लागू करने को लेकर ...