Mohan Bhagwat: With the message of the soil of India
मोहन भागवत : भारत की माटी का संदेश लिए
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@ कवि कमलेश पांडेय
भारत की माटी का संदेश लिए,
संस्कृति का अनुपम वेश लिए।
राष्ट्र-सेवा का भाव जगाते,
कर्तव्य-पथ पर कदम बढ़ाते।
अनुशासन का दीप जलाते,
एकता का मंत्र सिखाते।
संवादों से राह दिखाते,
जन-जन में विश्वास जगाते।
परंपरा का मान बढ़ाएँ,
नव-विचार भी साथ में लाएँ।
सेवा, समर्पण और सद्भाव,
यही रहे उनके जीवन का भाव।
मत भिन्न हों, विचार अनेक,
लोकतंत्र का यही है टेक।
राष्ट्रहित का हो हर प्रयास,
यही रहे सबके मन की आस।
भारत उन्नत, भारत महान,
यही रहे सबका अभियान।
मिल-जुलकर आगे बढ़ें सभी,
यही हो उज्ज्वल कल की दिशा अभी।
भारत की माटी का संदेश लिए,
संस्कृति का अनुपम वेश लिए।
राष्ट्र-सेवा का भाव जगाते,
कर्तव्य-पथ पर कदम बढ़ाते।
अनुशासन का दीप जलाते,
एकता का मंत्र सिखाते।
संवादों से राह दिखाते,
जन-जन में विश्वास जगाते।
परंपरा का मान बढ़ाएँ,
नव-विचार भी साथ में लाएँ।
सेवा, समर्पण और सद्भाव,
यही रहे उनके जीवन का भाव।
मत भिन्न हों, विचार अनेक,
लोकतंत्र का यही है टेक।
राष्ट्रहित का हो हर प्रयास,
यही रहे सबके मन की आस।
भारत उन्नत, भारत महान,
यही रहे सबका अभियान।
मिल-जुलकर आगे बढ़ें सभी,
यही हो उज्ज्वल कल की दिशा अभी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)
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