Building a Non-violent World and India's Role

अहिंसक विश्व का निर्माण और भारत की भूमिका

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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

अहिंसा का अर्थ केवल किसी को शारीरिक कष्ट न पहुँचाना ही नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी के प्रति द्वेष, घृणा या हिंसा की भावना न रखना भी है। आज विश्व के अनेक देश युद्ध, आतंकवाद, हिंसा, जातीय संघर्ष और पर्यावरणीय संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में एक अहिंसक विश्व की स्थापना मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकता है। भारत ने प्राचीन काल से ही पूरे विश्व को शांति, प्रेम, करुणा और अहिंसा का संदेश दिया है।
भले ही हिंसा प्राकृतिक है, लेकिन अहिंसा मानवोचित सराहनीय प्रवृति है। इसलिए हिंसक भावना को हतोत्साहित करने का प्रयत्न करते रहना चाहिए। इसी परिप्रेक्ष्य में सवाल उठता है कि आखिर अहिंसक विश्व का निर्माण कैसे होगा? और इसमें भारत की क्या भूमिका होगी? तो सुस्पष्ट जवाब यह होगा कि अहिंसक विश्व का निर्माण तभी संभव है जब सभी देश शांति, प्रेम, सत्य, सहिष्णुता, आपसी सम्मान और संवाद का मार्ग अपनाएँ। 

सभी देश परस्पर मिलकर समझदारी पूर्वक हिंसा, युद्ध, आतंकवाद और भेदभाव को छोड़कर सहयोग, न्याय और मानवता की भावना को बढ़ावा दें। हर स्तर पर अहिंसक प्रवृति को बढ़ावा दिया जाए। वहीं, शिक्षा के माध्यम से नैतिक मूल्यों का विकास भी आवश्यक है। खासकर "जीवो जीवस्य भोजनम" जैसा कुतर्क नहीं किया है। हमें पता होना चाहिए कि इस दिशा में भारत की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। 

भारत के संदर्भ में सबसे बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत प्राचीन काल से ही "वसुधैव कुटुम्बकम्" (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) और अहिंसा का संदेश देता आया है। भारत विश्व में शांति, सहयोग, लोकतंत्र और मानव कल्याण का समर्थन करता है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से करने पर बल देता है तथा विश्व शांति के लिए सक्रिय योगदान देता है। ऐसे में यदि सभी देश भारत के अहिंसा, सत्य और शांति के आदर्शों को अपनाएँ, तो एक शांतिपूर्ण और अहिंसक विश्व का निर्माण संभव है।

# जानिए अहिंसक विश्व का निर्माण कैसे होगा?

पहला, शांति और संवाद को बढ़ावा देकर: देशों के बीच होने वाले विवादों का समाधान युद्ध के बजाय बातचीत, समझौते और कूटनीति से किया जाना चाहिए। संवाद से गलतफहमियाँ दूर होती हैं और स्थायी शांति स्थापित होती है।

दूसरा, शिक्षा और नैतिक मूल्यों का प्रसार: विद्यालयों और समाज में सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता, ईमानदारी, दया और मानवता जैसे मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए। संस्कारयुक्त शिक्षा से जिम्मेदार और शांतिप्रिय नागरिक तैयार होंगे।

तीसरा, समानता और न्याय की स्थापना: जब सभी लोगों को समान अधिकार, अवसर और न्याय मिलेगा, तब भेदभाव, शोषण और हिंसा कम होगी। सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करना भी आवश्यक है।

चौथा, धर्म और संस्कृति का सम्मान: प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और संस्कृति का पालन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। सभी धर्म प्रेम, दया और भाईचारे का संदेश देते हैं। आपसी सम्मान से समाज में सौहार्द बढ़ता है।

पांचवां, आतंकवाद और घृणा का विरोध: आतंकवाद, कट्टरता और नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं का मिलकर विरोध करना चाहिए। इसके स्थान पर प्रेम, सहयोग और मानवता को बढ़ावा देना चाहिए।

छठा, पर्यावरण की रक्षा: प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना भी अहिंसा का एक रूप है। पेड़-पौधों, जल, वायु और जीव-जंतुओं की रक्षा करके आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ विश्व बनाया जा सकता है।

सातवां, अंतरराष्ट्रीय सहयोग: विश्व के सभी देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, गरीबी और आपदाओं जैसी समस्याओं के समाधान के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए।

# जानिए अहिंसक विश्व निर्माण में भारत की भूमिका

भारत विश्व को प्राचीन काल से "वसुधैव कुटुम्बकम्" अर्थात "संपूर्ण विश्व एक परिवार है" का संदेश देता आया है। भारतीय संस्कृति का आधार ही सत्य, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व है।

पहला, अहिंसा का संदेश: महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। उनके विचार आज भी पूरी दुनिया को शांति और मानवता का मार्ग दिखाते हैं।

दूसरा, शांति और कूटनीति: भारत अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से करने का समर्थन करता है तथा विश्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयास करता है।

तीसरा, मानवता की सेवा: भारत प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और अन्य संकटों के समय अनेक देशों को दवाइयाँ, राहत सामग्री और मानवीय सहायता उपलब्ध कराता है। इससे विश्व में सहयोग और विश्वास की भावना मजबूत होती है।

चौथा,. लोकतंत्र और सहिष्णुता: भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। यह विविधता में एकता का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करता है।

पांचवां, योग और भारतीय संस्कृति: भारत ने योग, आयुर्वेद और भारतीय जीवन-दर्शन के माध्यम से विश्व को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति का मार्ग दिखाया है।

सच कहूँ तो अहिंसक विश्व का निर्माण तभी संभव है जब सभी देश युद्ध और हिंसा का मार्ग छोड़कर प्रेम, सहयोग, न्याय, समानता और संवाद को अपनाएँ। भारत अपनी प्राचीन संस्कृति, अहिंसा के सिद्धांत, लोकतांत्रिक मूल्यों और "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना के माध्यम से विश्व को शांति और मानवता का मार्ग दिखा सकता है। यदि संपूर्ण विश्व भारत के इन आदर्शों को अपनाए, तो एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध विश्व का निर्माण निश्चित रूप से संभव है।

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