दुनियावी दांवपेंच से सतर्क है भारत! क्या ईरान पर हमला करके इजरायल उसके तल्ख अतीत को बदल पाएगा?

दुनियावी दांवपेंच से सतर्क है भारत! क्या ईरान पर हमला करके इजरायल उसके तल्ख अतीत को बदल पाएगा? 


@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

अमेरिका-चीन की परोक्ष मिलीभगत से अंतराष्ट्रीय राजनीति में आए दिन जो उलटफेर चल रहे हैं, उससे साफ है कि रूस का पकिया सपोर्टर भारत को कहीं से भी घेरा जाए और उसके बेतहाशा विकास को किसी तरह से अवरूद्ध किया जाए। चाहे यूक्रेन को शह देकर रूस के खिलाफ भड़काना हो, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध की नौबत आई। या फिर भारत के दिलअजीज दोस्त इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी आतंकवादियों को उकसाना है, जिससे दोनों  के बीच लंबे युद्ध की नौबत आई, का असली मकसद भारत को घेरना है। 

इसी तरह से चीन के खिलाफ ताइवान को भड़काना हो या भारत के हित से जुड़े तिब्बत के सवाल को पुनः लहकाना हो, इसका अमेरिकी मकसद किसी तरह से भारत को युद्ध की आग में झोंककर क्षेत्र में हथियारों की होड़ पैदा करना और भारी मुनाफा कमाना है। वहीं भारत को रूस से भी दूर करना था। लेकिन जब भारत अमेरिकी मोहपाश में नहीं बंधा और युद्ध मय परिस्थितियों से दूरी बनाकर रखा, तो उस पर पाकिस्तान को उकसा कर भारत में पुनः विभत्स व घृणित आतंकवादी हमला करवाया गया। 

इससे गुस्से में आए भारत ने जब ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान की जबरदस्त ठुकाई की तो षड्यंत्रकारी अमेरिका व चीन तथा उनके हथियारों की कलई खुल गई।साथ ही इनका चेहरा भी बेनकाब हो गया, जिससे समय रहते ही भारत सावधान हो गया। वहीं आतंकवादियों के पितृ देश अमेरिका और मातृ देश पाकिस्तान की नई  मिलीभगत के बाद अफगानिस्तान को पटाने का जो नया खेल शुरू हुआ, उसे परवान चढ़ाने के लिए इजरायल से उस ईरान के ऊपर हमला करवा दिया, जो रूस का कट्टर समर्थक है। चूंकि इजरायल और ईरान दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण है। 

इसलिए पुनः यह बात साबित हो गई कि भारत इस समय वैश्विक घात-प्रतिघात का केंद्र बिंदु बना हुआ है। लेकिन भारत इतना समझदार देश है कि उसके लिए भी राजनीतिक तटस्थता के अपने मायने हैं। अब वह इस सच्चाई को समझ चुका है कि उसको किसी अन्य के झगड़े के कारण उसमें जबरन पड़ने की आवश्यकता नहीं है। वह न तो किसी से अटूट दोस्ती रखता है और न ही किसी से खतरनाक बैर। यही वजह है कि वह गुटनिरपेक्षता और पंचशील के सिद्धांतों में विश्वास रखता है। वह पाकिस्तानी और चीनी खंजर सहने के बावजूद उनके प्रति उदारता का भाव रखता है। 

यही वजह है कि नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका, मालदीव, अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार की तमाम हरकतों के बावजूद उनके दुःख का सच्चा साथी बना रहता है। एक तरफ चीन इन्हीं देशों के मार्फ़त भारत को घेरने का स्वप्न देखता है, तो दूसरी तरफ भारत अपने दुःखदाई इतिहास से नसीहत लेने के बजाए वह आधुनिक जरूरतों के परिप्रेक्ष्य में नई रणनीति गढ़ता है। इसलिए भारत-इजरायल और भारत-ईरान की मौजूदा दोस्ती जगजाहिर है। 

बता दें कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार कहा था कि भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है, जो आपस में संघर्ष कर रही दुनिया के दोनों पक्षों से बातचीत कर सकता है। उन्होंने इसके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष में भारत के रुख का उदाहरण दिया था। इजरायल-ईरान युद्ध में भी यही बात लागू होती है। 

याद दिला दें कि एक बार बिजनेस टूडे के इवेंट 'माइंडरश 2025' में भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि, "वर्तमान में अलग-अलग समूहों में बटीं दूनिया में भारत उन कुछ देशों में से है जो रूस हो या यूक्रेन, इजरायल हो या ईरान, क्वाड हो या ब्रिक्स सभी के साथ जुड़ सकता है। सबका साथ, सबका विकास का फॉर्मूला विदेश नीति पर भी समान रूप से लागू होता है।"

ऐसा इसलिए कि भारत के सभी देशों से अच्छे संबंध हैं। यही वजह है कि पश्चिमी देशों के उलट भारत ने यूक्रेन-रूस युद्ध में किसी भी एक देश का पक्ष नहीं लिया है। पीएम मोदी ने बीते साल में रूस का भी दौरा किया और यूक्रेन का भी। इसी तरह इजरायल और ईरान के बीच मतभेदों में भी भारत निष्पक्ष रहा है। भारत ने दोनों देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को संतुलित कर रखा है। 

कहना न होगा कि भारत के लिए डिफेंस तकनीकों और उपकरणों के लिए इजरायल एक प्रमुख सोर्स है, वहीं कच्चे तेल के लिए वह ईरान पर निर्भर है। इसलिए दुनियाभर में होने वाले किसी भी संघर्ष में भारत की कोशिश दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बहाल करने की रही है।

जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दुनियाभर के नेताओं के साथ जो संबंध हैं, उससे बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। दुनियाभर में राजनीतिक बदलावों के प्रति भारत का रवैया भी इसी के तहत दिशा लेता है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को, इसके कारणों को और इसके व्यापक परिवेश को बहुत ही साफ नजरिए से देखा और इसके प्रति अपना रूख तय किया, जबकि बहुत से अन्य देश इस मामले में भावनात्मक रूप से बह गए। स्पष्ट है कि दुनियावी संघर्षों को देखने का भारत का नजरिया बिल्कुल अलग है। 

पीएम मोदी ने कहा भी है कि यह युद्ध नहीं बुद्ध यानी शांति का समय है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमित युद्ध के दौरान भी अपनी उदारता का परिचय दिया। वहीं,  इतिहासकार बताते हैं कि इजरायल का ईरान पर आक्रमण अतीतकालीन अलेक्जेंडर तृतीय के पर्शिया पर आक्रमण की पुनरावृत्ति जैसा लग रहा है। दरअसल, ईरान प्राचीनकाल से ही पूरे विश्व के लिए खतरा बना रहा है। एकेमेनी साम्राज्य के संस्थापक सायरस द ग्रेट, डेरियस प्रथम और डेरियस तृतीय के भारत पर आक्रमण के विवरण तो आधुनिक इतिहास में भी मिलते हैं। इसलिए ईरान ध्वस्त हो, ये दुनिया के कई पीड़ित देश चाहते हैं। 

जानकार बताते हैं कि फिलवक्त ईरान के साथ भारत के मधुर सम्बन्ध हैं, जिसके पीछे रूस का बहुत बड़ा हाथ है। इस बात के बावजूद कि ईरान प्राचीनकाल से ही भारत का दुश्मन रहा है। महिषासुर यानी असुर महेश (असुर सम्राट)  और कोई नहीं, बल्कि ईरान का ही सम्राट था। इसके आक्रमणों का प्रतिकार करने के लिए ही भारत की पश्चिमी सीमा पर विभिन्न दुर्गों की स्थापना की गई थी। चूंकि इन दुर्गों में सारी सैन्य सुविधाओं से लैस सैनिक रहते थे। इसलिए इन दुर्ग शक्तियों को ही मानवीकरण के तहत देवी दुर्गा के रूप में वर्णित किया जाता है। जबकि दुर्गा का दस भुजा होना इन्हीं दस दुर्गों का प्रतीक है।

वहीं, मध्यकाल में भारत पर आक्रमण करने वाला मुहम्मद गोरी भी तो ईरानी ही था। समरकंद, जहां से बाबर आया था, प्राचीन ईरान का ही प्रदेश था, जो अब अफगानिस्तान में है। इसलिए कुछ रणनीतिकार बताते हैं कि ईरान का कमजोर होना भारतवर्ष के लिए लाभदायक है। इससे पाकिस्तान में अमेरिकी जड़ें भी कमजोर होंगी।

जानकार बताते हैं कि भारत की हर आतंकवादी घटना के मूल में पाकिस्तान के साथ गुप्त रूप से ईरान तो जरूर रहता है। एक जमाने में शेरशाह सूरी से पराजित मुगल सम्राट हुमायूं ईरान के समकालीन बादशाह की मदद से ही भारत पर फिर से काबिज हुआ था। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर लिखित "संस्कृति के चार अध्याय" के अनुसार फारस के बादशाह ने ही हुमायूं को सलाह दी थी कि वह भारत के राजपूतों और ब्राह्मणों से दोस्ती करने का प्रयास करे। ईरान नहीं होता, तो पाकिस्तान की आतंकगिरी कब की बंद हो गई होती।

वहीं, इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने से अब यह बात साफ हो गई है कि अमेरिका अपने नए मित्र भारत को सबक सिखाने या उसे चिढ़ाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि पाकिस्तान को साधकर ईरान से अफगानिस्तान तक रूसी-चीनी समर्थकों को नेस्तनाबूद करने की गरज से पाकिस्तान के फेल्ड मार्शल जनरल मुनीर को बिरयानी खिलाने के लिए अमेरिका बुला रहा है। 

दरअसल, अमेरिका चाहता है कि इसराइल के द्वारा ईरान के परमाणु ठिकाने पर किए गए हमले के उपरांत उपजी वैश्विक युद्ध की परिस्थितियों में पाकिस्तान की नई स्थिति का लाभ किसी भी सूरत में ईरान, चीन, रूस या भारत ना ले पाए। क्योंकि पाकिस्तान अमेरिका वो का पुराना यार है जिसने कभी अफगानिस्तान से रूस को दूर रखने में अहम भूमिका निभा चुका है। इसलिए अमेरिका संभावित संभावनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए ही इजरायल- ईरान युद्ध के आरंभिक योजनागत दिनों में ही पाकिस्तान के फेल्ड मार्शल को अमेरिका बुला कर एक तरीके से 
'कोर्टमार्शल' कर दिया गया है। 
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सर्वविदित है कि अमेरिका अपने अनुगामी इसराइल की हर संभव कूटनीतिक सहयोग करता आया है। फिलवक्त वह पाकिस्तान की गद्दारी से भी भलीभांती परिचित है। इसलिए पाकिस्तान कहीं ईरान या चीन के हाथों बिक ना जाए,  वह चौकन्ना हो गया। चूंकि यह चिंता अमेरिका के लिए स्वाभाविक है, क्योंकि पाकिस्तान का साथ छूटते ही उसे अफगानिस्तान गंवाना पड़ा। 

वहीं चीन और रूस ने पाकिस्तान की परोक्ष सांठगांठ से अफगानिस्तान में अमेरिका और भारत की जो फजीहत तालिबानियों के हाथों करवाई है, उसे वह कदापि नहीं भूल सकता। चूंकि अफगानिस्तान मामले में पाकिस्तान भी भीतर से रूस-चीन की तरफ था, अन्यथा वहां से उल्टे पांव अमेरिका को नहीं भागना पड़ता।
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जहां तक इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने का सवाल है, ईरानी मीडिया के मुताबिक इजरायल ने अब तक शिराज और तबरीज शहरों के साथ-साथ नतान्ज न्यूक्लियर साइट पर दोबारा जोरदार हमला शुरू कर दिया। इस हमले के बाद ईरान ने अपनी वायु सीमा को अगली सूचना तक बंद कर दिया और कहा कि वह इसका कड़ा से कड़ा जवाब देगा। क्योंकि तेहरान के पश्चिमी इलाके चितगर में भारी धमाकों के बाद धुएं के गुबार देखे गए। 

खबर है कि इस हमले में ईरान के अर्द्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ के प्रमुख जनरल हुसैन सलामी की मौत हो गई। वहीं, उसके मिसाइल कार्यक्रम प्रमुख जनरल अमीर अली हाजीजादेह की भी मौत हो गई है। उल्लेखनीय है कि खामेनेई के बाद जनरल हाजीजादेह को ही देश का दूसरा सबसे बड़ा नेता माना जाता था। ये ईरान की मिसाइल रणनीति के सबसे अहम चेहरे माने जाते थे और कई सालों से देश की रक्षा नीति में अहम भूमिका निभा रहे थे। उनकी मौत को ईरान के लिए एक बड़ा सैन्य और मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है।

इन हमलों में कई शीर्ष सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक भी मारे गए हैं। इस हमले में कम से कम 20 वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडरों की मौत हो गई है। ईरान के इमरजेंसी कमांड के कमांडर व उनके 200 से अधिक लड़ाकू मारे गए। इस हमले को ईरान की सैन्य संरचना को कमजोर करने की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। इससे ईरान की जवाबी कार्रवाई की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। देश के सरकारी टेलीविजन ने अपनी खबर में यह जानकारी दी। 

वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने  कहा कि ईरान ने पूरे देश में स्टेट ऑफ इमरजेंसी घोषित कर दी है। राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और जनता से सतर्क रहने की अपील की गई है। साथ ही सभी स्कूल-कॉलेज बंद करने का भी ऐलान किया गया है। सार्वजनिक समारोह करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

वहीं, ईरान की मस्जिद पर लाल झंडा फहरा दिया गया है। पारंपरिक रूप से इसे इंतकाम यानी बदले का प्रतीक माना जाता है। यह झंडा ईरान की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था से एक बड़ा संदेश है कि जवाबी कार्रवाई अब तय मानी जा रही है। यह कदम सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के आदेश पर उठाया गया है। मस्जिदों पर लाल झंडा फहराना इस बात का संकेत है कि ईरान अब युद्ध के मोड में है और जल्द ही इजराइल को करारा जवाब दे सकता है।

वहीं, ईरान ने सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से इंटरनेट पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया है। उसके इस कदम का उद्देश्य अफवाहों को फैलने से रोकना और आंतरिक शांति बनाए रखना है। यह फैसला देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और संवेदनशील सैन्य सूचनाओं की सुरक्षा के लिए लिया गया है।

वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इजराइल के हमले पर कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि देश इस आक्रमण का ऐसा जवाब देगा कि दुश्मन को पछताना पड़ेगा। उन्होंने इसे ईरान की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया और कहा कि इस दुस्साहस का बदला जरूर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी जनता और सुरक्षा बलों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देगा।

ईरान ने दावा किया है कि उसने हाल ही में इजरायल पर किए गए हमलों में एक नई विकसित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है, जिसमें इजरायल के 10 लोगों की मौत और करीब 100 लोग घायल हो गए हैं। रविवार तड़के यरुशलम और तेल अवीव में हवाई हमले के सायरन और जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।

वहीं ईरानी संसद के सुरक्षा आयोग ने कहा कि उनका देश इजरायल के हमलों के जवाब में जलडमरूमध्य को संभावित रूप से बंद करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस जलडमरूमध्य से प्रतिदिन 18 से 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, इस प्रकार वैश्विक तेल बाजार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

उधर, ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के उद्देश्य से इजराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ प्रारंभ करने की घोषणा की और उसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को दावा किया कि नतांज स्थित ईरान के मुख्य संवर्धन केंद्र सहित अन्य ठिकानों पर हमला किया गया है। 
 नेतन्याहू ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि  "ईरान आतंकियों को परमाणु हथियार दे सकता है।"

एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि, ‘‘कुछ ही समय पहले इजराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ शुरू किया है जो इजराइल के अस्तित्व के लिए ईरानी खतरे को खत्म करने के वास्ते एक लक्षित सैन्य अभियान है। खतरे के समाप्त होने तक यह अभियान जारी रहेगा।’’ वहीं आईडीएफ ने कहा कि, "ये तीनों ईरानी अधिकारी क्रूर सामूहिक हत्यारे थे, जिनके हाथ अंतरराष्ट्रीय खून से रंगे हैं। इनके बिना दुनिया एक बेहतर जगह होगी।"

ईरान पर हमला करने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मीडिया के सामने आगे आए और उन्होंने न सिर्फ ट्रंप का शुक्रिया अदा किया, बल्कि वो इस बात का भी अंदेशा जता गए कि अब दूसरी तरफ से भी हम पर हमला किया जाएगा। इसलिए इजरायल में आपातकाल की घोषणा भी कर दी गई है। उन्होंने दुनिया भर में अपने दूतावास बंद करने का एलान किया है। इसके साथ ही इस्राइल ने अपने नागरिकों से सतर्क रहने और सार्वजनिक स्थानों पर यहूदी या इस्राइली प्रतीक न दिखाने की अपील की है। 

प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि, ‘‘दशकों से तेहरान के तानाशाह खुलेआम इजराइल के विनाश की बातें करते रहे हैं। उन्होंने जनसंहार के अपने बयानों के साथ ही परमाणु हथियार विकसित करने का कार्यक्रम भी संचालित किया। ईरान ने नौ परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त उच्च-संवर्धित यूरेनियम का हाल के वर्षों में उत्पादन किया है। हाल के महीनों में ईरान ने ऐसे कदम उठाए हैं जो उसने पहले कभी नहीं उठाए थे। जैसे संवर्धित यूरेनियम से हथियार बनाने का कदम, और अगर इसे नहीं रोका गया तो ईरान बहुत कम समय में परमाणु हथियार बना सकता है। यह एक साल में हो सकता है, यह कुछ महीनों में हो सकता है, या एक साल से भी कम समय में हो सकता है। यह इजराइल के अस्तित्व के लिए एक स्पष्ट खतरा है। उनका देश ईरानी शासन के परमाणु जनसंहार का शिकार नहीं बनेगा। इसलिए यह एहतियाती कार्रवाई शुरू की गई है।"

वहीं, इजराइल ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान कई सप्ताह तक जारी रह सकता है, जबकि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरानी नागरिकों से अपने इस्लामी मौलवी नेतृत्व के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान किया है।

वहीं, ईरान पर इजराइल के हमलों के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई वैश्विक नेताओं से बातचीत शुरू की है। पीएम कार्यालय के अनुसार, नेतन्याहू ने क्षेत्रीय और वैश्विक हालात को लेकर सहयोगियों से संपर्क किया और मौजूदा तनाव को लेकर चर्चा की। माना जा रहा है कि बातचीत का मकसद अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना और हालात को नियंत्रण में रखना है।

इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया है कि शुक्रवार के हमलों से पहले मोसाद ने तस्करी के जरिए ईरान के भीतर ड्रोन और हथियार भेजे थे। जिनका इस्तेमाल ईरान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के लिए किया गया। वहीं, तेहरान के पास बने ड्रोन बेस से मिसाइल लॉन्चर्स को निशाना बनाया गया। इजराइल ने स्ट्राइक सिस्टम और सटीक हथियार पहले ही ईरान में पहुंचा दिए थे। हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।

ईरान को तबाह करने के बाद इजराइली सेना ने पुष्टि की कि उसने पश्चिमी ईरान में एयर स्ट्राइक्स कर दर्जनों रडार और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल लॉन्चरों को तबाह कर दिया है। इजराइली एयरफोर्स ने यह हमला इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट की सटीक जानकारी के आधार पर किया। इजराइल का दावा है कि इन हमलों से ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को बड़ा नुकसान पहुंचा है। 

वहीं, आईडीएफ यानी इजराइल की सेना ने कहा है कि ईरान उस पर किए गए हमलों के जवाब में इजराइल पर लगातार ड्रोन दाग रहा है, जिसे हमारी सेना विफल कर दे रही है। इजराइल के मुख्य सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा है कि, ‘‘पिछले कुछ घंटों में ईरान ने इजराइल की ओर 100 से अधिक ड्रोन दागे हैं। लेकिन हमारी सभी रक्षा प्रणालियां इन हमलों को रोकने के लिए काम कर रही हैं।’’ डेफ्रिन ने कहा कि लगभग 200 इजराइली लड़ाकू विमान अभियान में शामिल थे और लगभग 100 लक्ष्यों पर सटीक हमला किया गया तथा हमले अब भी जारी हैं। 

वहीं, इजरायल ने रविवार को यमन में भी हवाई हमले किए। हमला एक हूती नेता के ठिकाने को निशाना बनाकर किया गया। गौरतलब है कि इजरायल के ईरान पर हमले के बाद हूतियों ने ईरान का समर्थन किया था और कहा था कि इस्राइल के हमले का जवाब देना ईरान का अधिकार है। 
इस बीच जॉर्डन के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने कहा है कि देश का हवाई क्षेत्र सभी उड़ानों के लिए बंद रहेगा। ‘जॉर्डन समाचार एजेंसी’ ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

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