गिग अर्थव्यवस्था क्या है? गिग वर्कर क्या हैं? इनसे कितनी लाभान्वित है गिग अर्थव्यवस्था?

गिग अर्थव्यवस्था क्या है? गिग वर्कर क्या हैं? इनसे कितनी लाभान्वित है गिग अर्थव्यवस्था?

@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझी जाने वाली कम्पनियों में गिग वर्करों की मांग बढ़ती जा रही है, जिससे देश की गिग अर्थव्यवस्था को नए पंख लगने के आसार बढ़ चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक, देश की गिग अर्थव्यवस्था में 2.4 करोड़ लोगों को सेवा क्षेत्र में रोजगार देने की क्षमता है। जबकि, कोरोना के बाद से नौकरी-पेशा के क्षेत्र में उपजे असमंजस पूर्व माहौल के बावजूद 80 लाख गिग वर्कर अभी देश में उपलब्ध हैं। देखा जाए तो देश की जीडीपी में 1.25 प्रतिशत का योगदान गिग अर्थव्यवस्था दे सकती है। जबकि, गिग अर्थव्यवस्था से 9 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा किये जा सकते हैं। 
कहना न होगा कि गिग अर्थव्यवस्था मतलब कुछ समय के लिए नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों की व्यवस्था ने कोरोना के बाद नए कार्य अवसर पैदा किए हैं। खास बात यह कि इससे काम के बदले तत्काल भुगतान के चलते आय का नया जरिया मिल रहा है, जिससे पेशेवर पूरी तरह तो नहीं, फिर भी संतुष्ट नजर आ रहे हैं। वहीं, स्थाई कर्मचारियों की तुलना में गिगवर्कर कंपनियों के लिए लागत के पैमाने पर फायदेमंद साबित हो रहे हैं। यह पूरी बात  कंसल्टिंग फर्म बीसीजी और माइकल फाउंडेशन के सर्वे में  सामने आई है। जिसके बाद से लोगों की अभिरुचि गिग अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गिग वर्करों में बढ़ चुकी है। लोग इस बारे में अपने जानकारों से पूछताछ भी कर रहे हैं।

# जानिए, गिग वर्कर क्या होते हैं, कैसे काम करते हैं और कितनी सुविधाएं लेते हैं?

दरअसल, काम के बदले भुगतान के आधार पर रखे गए कर्मचारियों को गिग वर्कर कहा जाता है। कोरोना काल में गिग वर्कर्स की मांग बढ़ी है, क्योंकि गिग वर्कर्स के लिए काम के कोई समय तय नहीं होता है। ये घर से भी आवंटित कार्य को पूर्व निर्धारित समय के मुताबिक भेज सकते हैं। ये  गिग अर्थव्यवस्था का हिस्सा होते हैं और समय की स्वतंत्रता के चलते इस ओर युवा पीढ़ी का रुझान भी तेजी से बढ़ रहा है। 

मसलन, गिग अर्थव्यवस्था से तातपर्य रोजगार की ऐसी व्यवस्था से है, जहां स्थाई तौर पर कर्मचारियों को रखे जाने के बजाय अल्प अवधि के लिए ही अनुबंध पर रखा जाता है। एक आकलन के मुताबिक, गिग अर्थव्यवस्था को नूतन प्रौद्योगिकी के साथ ही तेजी से अपनाया जा रहा है। क्योंकि यह लागत घटाने में मददगार साबित हो रही है।

सच कहा जाए तो कोरोना के बाद से बढ़ रहे कामकाज ने कंपनियों के लिए दोहरा संकट खड़ा कर दिया है। एक तरफ काम बंद होने से जहां उन्हें भारी मात्रा में छंटनी करनी पड़ी। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना के बाद कारोबार शुरू होने पर उनके लिए फिर से बड़ी मात्रा में स्थाई कर्मचारी रखना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए ही कोरोना के बाद 70 प्रतिशत कंपनियों ने गिग वर्कर से लागत घटाने के लिए काम लेना शुरू किया है। यदि यह प्रचलन बढ़ा तो स्थाई रोजगार तलाश रहे युवाओं के समक्ष अवसर और सीमित हो जाएंगे।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि स्थाई कर्मचारियों को आवागमन के लिए भत्ता, ईपीएफ, मेडिकल सुविधा के साथ कई अन्य तरह के भत्तों का भुगतान करना पड़ता है। जबकि, गिग वर्कर के मामले में कंपनियों को यह राशि नहीं देनी पड़ती और केवल काम के बदले ही भुगतान करना पड़ता है। इससे कंपनियों का खर्च बचता है। जिसका सीधा असर कंपनियों के शुद्ध लाभ पर पड़ता है।

जानकर बताते हैं कि कंसल्टिंग फर्म बीसीजी और माइकल फाउंडेशन के सर्वे में उपर्युक्त बातों का खुलासा हुआ है। इसके सर्वे रिपोर्ट के मुुुताबिक, उसका अनुमान विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के प्रकार के विस्तृत अध्ययन पर आधारित है। दरअसल, यह निष्कर्ष बड़ी और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों समेत विभिन्न कंपनियों से बातचीत के आधार पर निकाला गया है। इसको लेकर शहरी परिवार के बीच सर्वे किया गया। 

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि गिग वर्कर को तरजीह देने वाली गिग अर्थव्यवस्था से गैर कृषि क्षेत्रों में 9 करोड़ रोजगार सृजन में मदद मिल सकती है। जबकि, अल्पावधि से दीर्घावधि में कुशल, कम कुशल और साझा सेवा के क्षेत्र में करीब 2.4 करोड़ रोजगार सृजित हो सकते हैं। वहीं, सर्वाधिक सात करोड़ अस्थाई नौकरियां निर्माण, विनिर्माण, परिवहन और लॉजिस्टिक तथा व्यक्तिगत सेवा क्षेत्र में हैं। साथ ही, इससे दीर्घकाल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है।

 यह सच है कि कोरोना महामारी के बाद कम्पनियों में गिग वर्कर की मांग बढ़ी है। लेकिन, इसके बढ़ते प्रचलन से स्थायी और तीन वर्षीय अनुबंध के अवसर घटेंगे, जबकि अल्पावधि श्रम बाजार बढ़ेगा। इससे कम्पनियों को लाभ होगा, लेकिन कर्मचारियों को अपेक्षाकृत घाटा। लेकिन कोरोना प्रकोप काल में घर बैठे काम करने की स्वतंत्रता बड़ी बात है, कम सही लेकिन आय की निरंतरता बरकरार रहेगी।

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