हॉलमार्किंग योजना क्या है? यह कितनी सफल हुई है? विस्तार पूर्वक बताइए।
हॉलमार्किंग योजना क्या है? यह कितनी सफल हुई है? विस्तार पूर्वक बताइए। @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार स्वर्णाभूषण को अधिकांश भारतीयों की पहली पसंद समझा जाता है, फैशन के लिहाज से भी और निवेश के हिसाब से भी। लेकिन, इसकी खरीद-बिक्री में होने वाली धांधली किसी से छिपी हुई नहीं है। इसके मूल्य, नापतौल के तौर-तरीकों और इसमें होने वाली मिलावट यानी 24 कैरेट के बिस्कुट की बजाय 22 कैरेट, 20 कैरेट, 18 कैरेट और 16 कैरेट के बनने वाले आभूषणों यानी गहनों और उनके वास्तविक मूल्यों में होने वाले गड़बड़झालों की बात सरकार से छिपी हुई नहीं थी। इसलिए उसने हॉलमार्किंग योजना शुरू की। इससे इस धंधे की आड़ में होने वाली लेन-देन सम्बन्धी गड़बड़ियों और कालाबाजारी को भी रोकने में मदद मिलेगी। वस्तुतः, सोने के आभूषणों और कलाकृतियों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 16 जून 2021 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और शुरुआत में इसे 256 जिलों में लागू किया गया है। दरअसल, गोल्ड हॉलमार्किंग कीमती धातु की शुद्धता का प्रमाणीकरण है और वर्तमान में यह स्वैच्छिक है। फिर भी गत 1 जून से ज्वैलर्स को केवल 14, 18 और 22 कैरेट के सोने ...