राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना क्या है? सरकारी संपत्तियों में कैसे बढ़ेगा निजी क्षेत्र का निवेश? क्या विदेशी निवेशकों को भी मिलेगा कमाने का मौका? जानिए विस्तार से
राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना क्या है? सरकारी संपत्तियों में कैसे बढ़ेगा निजी क्षेत्र का निवेश? क्या विदेशी निवेशकों को भी मिलेगा कमाने का मौका? जानिए विस्तार से
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
सरकार ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना के जरिये बुनियादी ढांचा योजनाओं पर खर्च के लिए पैसे जुटाने का चार साल का एक रोडमैप बनाया है, जिससे सरकारी बुनियादी ढांचा संपत्तियों में न केवल निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा, बल्कि ढेर सारे रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। यही नहीं, इस योजना के तहत विदेशी निवेशकों को भी मुनाफा कमाने का एक और अवसर मिलेगा। जानकारों की राय में, सरकार ऐसी संपत्तियों को ही निजी क्षेत्र या विदेशी कंपनियों को सौंपेगी, जिनका सुचारू रूप से संचालन वह खुद भी नहीं कर पा रही है। इस प्रकार से ऐसी संपत्तियों से कमाई राशि में भी सरकार को हिस्सा मिलेगा, जिससे उसकी आय बढ़ेगी।
केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने गत दिनों जब ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन एनएमपी खंड 1 और 2’ का शुभारंभ किया, तो स्पष्ट किया कि जो केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन है, वह नीति आयोग द्वारा अवसंरचना से संबंधित मंत्रालयों के परामर्श से विकसित की गई है, जो केंद्रीय बजट 2021-22 के तहत ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण’से जुड़े अधिदेश पर आधारित है। इसलिए, एनएमपी के तहत वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक की चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्य परिसंपत्तियों के जरिए 6.0 लाख करोड़ रुपये की कुल मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया गया है।
वास्तव में, एनएमपी पर रिपोर्ट के खंड 1 और 2 को गत दिनों जब उपाध्यक्ष नीति आयोग, सीईओ नीति आयोग और पाइपलाइन के तहत शामिल अवसंरचना से संबंधित मंत्रालयों यथा सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग, रेलवे, बिजली, पाइपलाइन व प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, पोत परिवहन, पत्तन एवं जलमार्ग, दूरसंचार, खाद्य व सार्वजनिक वितरण, खनन, कोयला और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालयों के सचिवों के साथ-साथ सचिव आर्थिक कार्य विभाग और सचिव निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग की उपस्थिति में जारी किया गया तो, इससे इनके सामूहिक लक्ष्यों का पता चलता है।
खास बात यह कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने परिसंपत्ति मुद्रीकरण कार्यक्रम का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि उनके विजन से ही यह सटीक स्वरूप ले पाया है, जो सदैव भारत के समस्त आम नागरिकों के लिए बेहतरीन और किफायती बुनियादी ढांचागत सुविधाओं तक पहुंच में विश्वास करते हैं। मुद्रीकरण के माध्यम से सृजन के दर्शन पर आधारित परिसंपत्ति मुद्रीकरण का उद्देश्य नई बुनियादी ढांचागत सुविधाओं या अवसंरचना के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश का उपयोग करना है। यह रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है जिससे आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ समग्र जन कल्याण के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को निर्बाध रूप से एकीकृत करना भी संभव हो सकेगा।
वहीं, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बताया कि इस आकर्षक निवेश योजना के तहत प्रति वर्ष 1.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। सिर्फ गुजर रहे वित्त वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना के जरिये 88 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। दरअसल, इस योजना से जुटाई समस्त धनराशि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा क्षेत्र को मजबूत बनाने में होगा, जिससे प्रति वर्ष लाखों रोजगार भी पैदा किए जा सकेंगे। जबकि, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि, चूंकि राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना की जिम्मेदारी हमें दी गई है। इसलिए मैं यहां पर यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि इस योजना में किसी भी संपत्ति को बेचा या उसका निजीकरण नहीं किया जाएगा। बल्कि यह पूरी तरह अनुबंध के आधार पर काम करेगा और जनता तक संपत्तियों से जुड़ी सेवाएं पहुंचाने का काम सरकार करेगी। इस बात में कोई दो राय नहीं कि यदि ऐसा है तो यह सरकार और आमलोगों, दोनों के लिए एक अच्छी बात होगी। क्योंकि सरकारी संसाधनों पर उनका प्रत्यक्ष नियंत्रण रहेगा।
बता दें कि नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2021-22 में 88 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार को विश्वास है कि इस आकर्षक योजना के तहत 1.5 लाख करोड़ रुपये हर साल जुटाए जा सकेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, बुनियादी ढांचा परियोजना और बुनियादी ढांचा संपत्तियां अलग-अलग हैं। इसलिए बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक ऐसी संपत्तियों में पैसे लगाने की मंशा रखते हैं। सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पिछले 24 महीने में टोल ऑपरेट ट्रांसफर के जरिये लगभग 17,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसके अतिरिक्त, 5 हजार करोड़ रुपये बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट से भी मिला है। इस योजना में प्रति वर्ष 1.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन ने भी पिछले कुछ महीनों में करीब 7,700 करोड़ रुपये की पूंजी जुटा ली है। इसलिए इस बात में कोई संशय नहीं है कि यह योजना निजी क्षेत्र से बड़ा निवेश खींचने में सफल होगी। वहीं, सरकार ने विभिन्न विभागों-उपक्रमों के लिए यह लक्ष्य भी निर्धारित कर लिया है कि किस क्षेत्र में निवेश से कितना धन मिलेगा। जैसे, सड़क क्षेत्र में 26,700 किलोमीटर के राजमार्ग और सड़कों को ठेके पर देकर 1.6 लाख करोड़ जुटाए जाएंगे। वहीं, रेलवे क्षेत्र में 400 रेलवे स्टेशन, 90 यात्री ट्रेनें, 741 किलोमीटर का कोंकण रेलमार्ग और 15 रेलवे स्टेडियम व कॉलोनी में निवेश के जरिये 1.2 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र में 28,608 सर्किट किलोमीटर की बिजली आपूर्ति लाइन के बदले 45,200 करोड़ व 6 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन संपत्तियों के बदले 39,832 करोड़ रुपये मिलेंगे।
वहीं, दूरसंचार क्षेत्र में 2.86 किलोमीटर के भारतनेट फाइबर, बीएसएनएल और एमटीएनएल के 14,917 सिग्नल टॉवर के मुद्रीकरण से 35,100 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, खनन क्षेत्र में 160 कोयला खदानों के बदले 29,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, भंडारण के क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा भंडारगृहों से भी 29,000 करोड़ मिलने की उम्मीद है। वहीं, गैस क्षेत्र में 8,154 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के मुद्रीकरण से 24,462 करोड़ और 3,990 किलोमीटर अन्य पाइपलाइन से 22,504 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, हवाईअड्डे क्षेत्र से 25 हवाईअड्डों से 20,782 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं, बंदरगाह क्षेत्र से दर्जनों बंदरगाहों के बदले 12,828 करोड़ मिलेंगे। स्टेडियम क्षेत्र में दिल्ली, बंगलूरू के स्टेडियम ठेके पर देकर 11,450 करोड़ मिलेंगे। इसी प्रकार, दिल्ली की कॉलोनियों से भी 15,000 करोड़ मिलेंगे। बता दें कि एनएमपी योजना के तहत दिल्ली की आवासीय कॉलोनियों को पुनर्विकसित कर 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत सरोजिनी नगर, नौरोजी नगर और घटोरणी में 240 एकड़ भूमि पर आवासीय और वाणिज्यिक इकाइयां विकसित की जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि एनएमपी के अंतर्गत चिह्नित संपत्तियां और लेनदेन कई साधनों के माध्यम से कार्यान्वित होने का अनुमान है। इनमें सार्वजनिक निजी भागीदारी छूट जैसे प्रत्यक्ष अनुबंधित साधन और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इन्विट) जैसे पूंजी बाजार साधन आदि शामिल हैं। साधन का चयन सेक्टर, संपत्ति की प्रकृति, लेनदेन के समय (बाजार स्थितियों सहित), लक्षित निवेशक विवरण और परिचालन के स्तर व संपत्ति के स्वामी द्वारा रखे जाने वाले निवेश नियंत्रण आदि के द्वारा तय किया जाएगा।
इस बात में कोई संदेह नहीं कि संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया के माध्यम से सार्वजनिक संपत्ति के स्वामी को अनुमानित रूप से मिलने वाला मूल्य, या तो अग्रिम स्रोत के रूप में हो सकता है या निजी क्षेत्र निवेश के रूप में मिल सकता है। एनएमपी के अंतर्गत तय संभावित मूल्य सामान्य नियमों पर आधारित सिर्फ एक उच्च स्तरीय अनुमान है। यह संबंधित क्षेत्र के लिए लागू और उपलब्ध बाजार या लागत या बहीखाते या उपक्रम मूल्य आदि जैसे विभिन्न दृष्टिकोणों पर आधारित हैं। कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था समग्र रणनीति के रूप में, संपत्ति आधार का बड़ा हिस्सा सरकार के पास रहेगा।
वास्तव में, संपत्ति मुद्रीकरण को कुशलता के साथ और प्रभावी प्रक्रिया के तहत सुनिश्चित करने के क्रम में सरकार द्वारा आवश्यक नीति और नियामकीय हस्तक्षेप के माध्यम से इस कार्यक्रम को समर्थन दिया जाएगा। इसमें संचालन के तौर-तरीकों को व्यवस्थित करना, निवेशक भागीदारी को प्रोत्साहन और व्यावसायिक क्षमता को सुगम बनाना आदि शामिल है। संपत्ति मुद्रीकरण डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय पर निगरानी को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा, जैसी आम बजट 2021-22 में कल्पना की गई थी।
निर्विवाद रूप से इस पहल का मुख्य उद्देश्य ‘मुद्रीकरण के माध्यम से अवसंरचना निर्माण’ को संभव बनाना है, जिसमें क्षमता के लिहाज से अपने-अपने क्षेत्रों के उत्कृष्ट सार्वजनिक और निजी क्षेत्र सहयोग करें, जिससे सामाजिक आर्थिक विकास को संभव बनाया जा सके और देश के नागरिकों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। इसलिए राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) में नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और संबंधित मंत्रालयों द्वारा विभिन्न हितधारकों के साथ किए गए परामर्शों के माध्यम से संचित की गई अंतर्दृष्टि, प्रतिक्रिया और अनुभवों का चरमबिन्दु है। नीति आयोग ने विभिन्न हितधारकों के साथ कई दौर की चर्चा की है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक में इस पाइपलाइन के बारे में विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है। इसलिए यह पूरी तरह से एक सरकारी पहल है, जो स्वागत योग्य निर्णय है।
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