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डॉनल्ड ट्रंफ और शी जिनफिंग की मुलाकात के कूटनीतिक मायने

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डॉनल्ड ट्रंफ और शी जिनफिंग की मुलाकात के कूटनीतिक मायने शेष दुनिया के लिए अहम @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सफल कारोबारी से राजनेता बने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अपने हर रिश्ते को फायदे और नुकसान के नजरिये से देखते है, लेकिन कूटनीतिक इंजीनियर समझे जाने वाले चीन के अपने दौरे को लेकर उन्होंने केवल इतना भर कहा कि यह सिर्फ व्यापार नहीं, वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है।  चूंकि अमेरिका और चीन एक दूसरे के सहयोगी और प्रतिस्पर्धी दोनों समझे जाते हैं, इसलिए लगभग एक दशक के अन्तराल पर हुई उनकी यह यात्रा के कूटनीतिक मायने अहम समझे जाते हैं, क्योंकि उनकी इस मुलाकात की सफलता और विफलता का असर पूरी दुनिया पर निःसंदेह पड़ेगा। गौरतलब है कि पिछले साल यानी अक्टूबर 2025 में जब आखिरी बार ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात हुई थी, तब उनके बीच मुख्य मुद्दा टैरिफ था, लेकिन अब बदलते वैश्विक हालात में जाहिर तौर पर ईरान भी होगा। क्योंकि पश्चिम एशिया संकट ने दोनों देशों के लिए मुश्किलें बढ़ाई है।...

आखिर मुस्लिम देशों से भारत के संबंध कैसे अच्छे होंगे?

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आखिर मुस्लिम देशों से भारत के संबंध कैसे अच्छे होंगे?   @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हिन्दू बहुल राष्ट्र भारत और मुस्लिम बहुल देश पाकिस्तान के बीच अक्सर चलने वाले दाव-प्रतिदाव अब तलक किसी से छिपे हुए नहीं हैं। लेकिन भारत के विरोध में अक्सर गोलबंदी दिखाने वाले तुर्किये जैसे कतिपय इस्लामिक देश और उन जैसों के इशारे पर काम करने वाला अंतरराष्ट्रीय संगठन 'ओआईसी' का 'धार्मिक पक्षपाती व्यवहार' सदैव इंडियन डिप्लोमेसी के समक्ष एक दुविधा खड़ा करता आया है।  फिर भी, रणनीतिक स्वायत्तता और कूटनीतिक तटस्थता का हिमायती देश भारत सदैव बीच का रास्ता निकालकर इस्लामिक देशों से भरोसेमंद सम्बन्ध कायम रखता आया है। बावजूद इसके, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के बाद भारतीय कूटनीति की जिस तरह से फजीहत हुई और देश में तेल-गैस सहित उन तमाम वस्तुओं की किल्लत हो गई, जिनका निर्बाध आवागमन अब तक होमुर्ज़ जलडमरूमध्य, ईरान/ओमान के माध्यम से होता रहता था। इससे महंगाई बढ़ी और वैश्विक मुद्रा भंडार पर जोर पड़ा। इसलिए भारत का बौद्धिक वर्ग यह जानन...

हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा!

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हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है, जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा! @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, विशेष सचिव, पीडब्ल्यूडी, उत्तरप्रदेश सरकार "सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं।" राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की उपर्युक्त पंक्तियां सदैव मेरा मार्गदर्शन करती रहती हैं। जिलाधिकारी जौनपुर के पद से स्थानांतरण एक स्वाभाविक प्रक्रिया है परंतु इसमें एक अमूर्त यानी छिपा रहस्य है जो केवल मेरे इष्ट श्रीमान् हनुमान जी को ही पता है। 30 जून 2026 सेवानिवृत्त होने का दिवस है,  जो सेवा में आते ही समय नियत हो गया था‌।  बहरहाल यशस्वी माननीय मुख्यमंत्री श्रीमान् योगी आदित्यनाथ जी के आशीर्वाद एवं माता-पिता, गुरुजन की कृपा से प्रदेश के महत्त्वपूर्ण जनपदों में सेवा का अवसर मिला।  महात्मा विदुर की धरती बिजनौर में मेरा अवतरण (जन्म) हुआ, उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय,प्रयागराज में हुई तथा सेवा का आरंभ माॅं गंगा के पवित्र चरणों मे...

भाजपा के चाणक्य अमित शाह की सियासी सफलता के अहम सूत्र और संभावित चुनौतियों को समझिए

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भाजपा के चाणक्य अमित शाह की सियासी सफलता के अहम सूत्र और संभावित चुनौतियों को समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार अमित शाह की सियासी सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र क्या हैं, इसे समझने में अब हर किसी की दिलचस्पी बढ़ी है, क्योंकि राजनीतिक महकमें में उनको अक्सर “भाजपा का चाणक्य” कहा जाता है।  खासकर उनकी अभूतपूर्व चुनावी रणनीति और कुशल संगठनात्मक क्षमता की तोड़ आज किसी भी विपक्षी दल के पास नहीं है। पहले दिल्ली, फिर बंगाल को उन्होंने जिस चुनौती पूर्ण तरीके से जीता है और बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भाजपाई सरकार बनवाई है, उससे अब भाजपा में उनके धुर विरोधी राजनेता भी पस्त नजर आ रहे हैं। वहीं मोदी-शाह का सियासी जलवा बुलंदियों के शीर्ष पर पहुंचने को कटिबद्ध है।  स्वाभाविक सवाल है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चक्रब्यूह में लगातार घिरते जा रहे भारत ने और उसका विकल्प बनती जा रही भाजपा ने आंतरिक सियासत में जो मजबूत पकड़ बनाई है, उससे विदेशी-स्वदेशी षड्यंत्रकारी बेचै...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “विदेशी मुद्रा बचाने” के आह्वान के राजनीतिक-आर्थिक निहितार्थ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “विदेशी मुद्रा बचाने” के आह्वान के राजनीतिक-आर्थिक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी प्रकार की आपदा को अवसर में बदलना जानते हैं। पहले कृत्रिम वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19), फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब अमेरिका/इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। फिलवक्त मौजूदा वैश्विक संकट से भारत को निजात दिलाने और इससे प्रभावित हो रहे आम भारतीयों के हितों की रक्षा करने के लिए ही उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने, आयातित वस्तुओं का उपभोग मितव्ययिता पूर्वक करने और इनके मौजूद देशी विकल्प को आजमाते हुए स्थायी हल निकालने और उनपर निर्भर होने की दिशा में जनसहयोग का आह्वान करके सबको चौंका दिया है। समझा जाता है कि अमेरिका, चीन, यूरोप और अरब के कुछ देशों के द्वारा लगातार भारत विरोधी षड्यंत्र किए जा रहे हैं। कोई अपना इस्लामिक एजेंडा भारत पर थोपना चाहता है तो कोई भारत-रूस के भरोसेमंद सम्बन्धों में पलीता लगाना चाहता है और कोई भारत को पाकिस्तान, बंग्लादेश और चीन के त्रिपक्षीय कु...

शीर्षासन क्या है? शीर्षासन करने की सही विधि समझिए

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शीर्षासन क्या है? शीर्षासन करने की सही विधि समझिए @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, विशेष सचिव, पीडब्ल्यूडी, उत्तरप्रदेश सरकार शीर्षासन (Headstand) योग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उन्नत आसन माना जाता है। इसे “आसनों का राजा” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें पूरा शरीर सिर के सहारे उल्टा संतुलित रहता है। यह आसन शारीरिक, मानसिक, तंत्रिका तंत्र तथा आध्यात्मिक स्तर पर गहरा प्रभाव डालता है। शीर्षासन केवल एक शारीरिक करतब नहीं, बल्कि संतुलन, साहस, एकाग्रता और आत्मनियंत्रण का अभ्यास है। सही तकनीक, धैर्य और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के साथ किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास बन सकता है। # योगाभ्यास विद्या शीर्षासन के विभिन्न प्रकार के बारे में जानिए योगाभ्यास विद्या शीर्षासन के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:- पहला, समर्थित शीर्षासन (Supported Headstand):  हाथों और कोहनियों के सहारे किया जाता है। यह सबसे सामान्य और सुरक्षित रूप है। दूसरा, त्रिपाद शीर्षासन (Tripod Headstand): दोनों हाथ और सिर मिलाकर त्रिकोण बनाते हैं। तीसरा, पद्म शीर्षासन: शीर्षासन में रहते हुए पैरों को पद्मासन मे...

जानिए, महाराणा प्रताप वीरता की कैसे अखिल भारतीय पहचान बने, जनमानस पर अमिट छाप छोड़ी

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प्रतापी सम्राट महाराणा प्रताप भारतीय वीरता की राष्ट्रवादी पहचान बने, उनके अवदानों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में परखिए @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, विशेष सचिव, पीडब्ल्यूडी, उत्तर प्रदेश सरकार प्रतापी सम्राट महाराणा प्रताप भारत के इतिहास के सबसे वीर, स्वाभिमानी और संघर्षशील राजाओं में गिने जाते हैं। वे मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के शासक थे और मुगल सम्राट अकबर के सामने कभी झुके नहीं। उनका जीवन स्वतंत्रता, राष्ट्रगौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है। आज 9 मई भारत के इतिहास का एक गौरवशाली दिवस है। यह दिन वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जन्म जयंती के रूप में पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और गर्व के साथ मनाया जाता है।  भारत वीरो की भूमि है। भारत भूमि ने सनातन धर्मसंस्कृति से लेकर अब तक वीर सूरमाओं को जन्म देकर भारत भूमि की रक्षा के लिए ऐसे इतिहास पुरुषों को पैदा किया है, जिनको स्मरण किया जाना प्रासंगिक ही नहीं, अपितु राष्ट्र गौरव की रक्षा के लिए प्रासंगिक भी है। भारत महावीरों की धरती है और इस पवित्र धरती ने समय-समय पर ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया है जि...