शीर्षासन क्या है? शीर्षासन करने की सही विधि समझिए

शीर्षासन क्या है? शीर्षासन करने की सही विधि समझिए
@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, विशेष सचिव, पीडब्ल्यूडी, उत्तरप्रदेश सरकार

शीर्षासन (Headstand) योग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उन्नत आसन माना जाता है। इसे “आसनों का राजा” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें पूरा शरीर सिर के सहारे उल्टा संतुलित रहता है। यह आसन शारीरिक, मानसिक, तंत्रिका तंत्र तथा आध्यात्मिक स्तर पर गहरा प्रभाव डालता है। शीर्षासन केवल एक शारीरिक करतब नहीं, बल्कि संतुलन, साहस, एकाग्रता और आत्मनियंत्रण का अभ्यास है। सही तकनीक, धैर्य और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के साथ किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास बन सकता है।

# योगाभ्यास विद्या शीर्षासन के विभिन्न प्रकार के बारे में जानिए

योगाभ्यास विद्या शीर्षासन के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:- पहला, समर्थित शीर्षासन (Supported Headstand): 
हाथों और कोहनियों के सहारे किया जाता है। यह सबसे सामान्य और सुरक्षित रूप है।
दूसरा, त्रिपाद शीर्षासन (Tripod Headstand): दोनों हाथ और सिर मिलाकर त्रिकोण बनाते हैं।
तीसरा, पद्म शीर्षासन: शीर्षासन में रहते हुए पैरों को पद्मासन में बांधा जाता है।
चतुर्थ, एकपाद शीर्षासन: एक पैर ऊपर और दूसरा नीचे नियंत्रित स्थिति में रखा जाता है।

# शीर्षासन करने की सही विधि समझिए

प्रारम्भिक तैयारी: खाली पेट अभ्यास करें। सुबह ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के समय सर्वोत्तम। समतल स्थान पर योगा मैट बिछाएँ। अभ्यास की चरणबद्ध प्रक्रिया:- चरण 1- वज्रासन में बैठें। चरण 2- दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फँसाकर सामने रखें। चरण 3- कोहनियों को जमीन पर टिकाकर त्रिकोण बनाएं। चरण 4- सिर के अग्रभाग (crown portion) को हथेलियों के बीच जमीन पर रखें।
चरण 5- घुटनों को उठाकर शरीर का भार धीरे-धीरे सिर और हाथों पर लाएं। चरण 6- पहले घुटनों को मोड़ते हुए ऊपर उठाएं। चरण 7- धीरे-धीरे दोनों पैरों को सीधा ऊपर करें। चरण 8- सांस सामान्य रखें और संतुलन बनाए रखें।
चरण 9- वापस आते समय धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं।
चरण 10- कुछ समय तक बालासन में विश्राम करें।

# शीर्षासन के वैज्ञानिक आधार के बारे में जानिए

जब शरीर उल्टा होता है, तब गुरुत्वाकर्षण के कारण रक्त का प्रवाह मस्तिष्क की ओर बढ़ता है। इससे:मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है
संतुलन क्षमता बढ़ती है। हार्मोनल प्रणाली प्रभावित होती है
हालाँकि “रक्त पूरी तरह सिर में भर जाता है” जैसी अतिशयोक्तियाँ वैज्ञानिक रूप से सही नहीं मानी जातीं; शरीर स्वयं रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है।

# शीर्षासन के प्रमुख लाभ ये ये हैं- 

1. मानसिक लाभ:- एकाग्रता बढ़ती है। स्मरण शक्ति बेहतर हो सकती है। तनाव और चिंता कम करने में सहायक
आत्मविश्वास बढ़ता है।
2. शारीरिक लाभ: कंधे, हाथ और कोर मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। शरीर का संतुलन सुधरता है। रीढ़ की स्थिरता में मदद मिलती है। शरीर की न्यूरो-मस्कुलर समन्वय क्षमता बढ़ती है।
3. योगिक एवं आध्यात्मिक लाभ: योग दर्शन के अनुसार यह सहस्रार चक्र को सक्रिय करने वाला आसन माना जाता है। चेतना और ध्यान की गहराई बढ़ाने में सहायक माना जाता है। प्राण प्रवाह को संतुलित करने में उपयोगी समझा जाता है।

# जानिए कितनी देर करें?
स्तर- अवधि- शुरुआती-5–10 सेकंड। 
स्तर- मध्यम- 30 सेकंड-1 मिनट।
उन्नत- 3–5 मिनट, अत्यधिक देर तक करना आवश्यक नहीं है।

# शीर्षासन सीखने की तैयारी ऐसे कीजिए

शीर्षासन से पहले इन आसनों का अभ्यास उपयोगी है:
अधोमुख श्वानासन, डॉल्फिन पोज, प्लैंक, भुजंगासन,
ताड़ासन, शीर्षासन में सामान्य गलतियाँ, पूरा भार सिर पर डाल देना, कोहनियों को फैलाना, झटके से पैर ऊपर फेंकना, गर्दन मोड़ना, सांस रोकना, बिना वार्म-अप के अभ्यास करना।

# आखिर किन लोगों को शीर्षासन नहीं करना चाहिए?

यदि निम्न समस्याएँ हों तो विशेषज्ञ सलाह के बिना न करें:
उच्च रक्तचाप, ग्लूकोमा, गर्दन की चोट, स्लिप डिस्क, हृदय रोग, मस्तिष्क संबंधी विकार, कान में संतुलन समस्या, 
गर्भावस्था (विशेषज्ञ मार्गदर्शन के बिना)।

# शीर्षासन के बाद कौन-से आसन करें?

संतुलन हेतु: बालासन, शवासन, मकरासन। 

# शीर्षासन के लिए क्या दीवार का सहारा लेना चाहिए?

शुरुआती अवस्था में दीवार का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक आदत न बनाएं। संतुलन विकसित करना आवश्यक है। प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख सर्वोत्तम रहती है।

# योग दर्शन में शीर्षासन

पतंजलि के योग सिद्धांतों के अनुसार योग केवल शरीर नहीं, बल्कि चित्त की स्थिरता का माध्यम है। शीर्षासन:
भय पर नियंत्रण, मन की स्थिरता, धैर्य, आंतरिक अनुशासन
इन गुणों को विकसित करने में सहायक माना जाता है।
हालांकि महत्वपूर्ण सावधानियाँ भी बताई गई हैं, जैसे- 
हमेशा धीरे करें, गर्दन पर दबाव न डालें, दर्द होने पर तुरंत रोकें, भोजन के तुरंत बाद न करें, शुरुआती लोग अकेले अभ्यास न करें।

निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि शीर्षासन केवल एक शारीरिक करतब नहीं, बल्कि संतुलन, साहस, एकाग्रता और आत्मनियंत्रण का अभ्यास है। सही तकनीक, धैर्य और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के साथ किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास बन सकता है।

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