सरकारी दृष्टांत के सहारे लोगों को निःस्वार्थ कर्म के लिए प्रेरित करने का प्रेरणा पुष्प है कर्मकुम्भ
सरकारी दृष्टांत के सहारे लोगों को निःस्वार्थ कर्म के लिए प्रेरित करने का प्रेरणा पुष्प है कर्मकुम्भ @ कमलेश पांडेय/संपादक की कलम से... समकालीन दुनिया में सनातन सभ्यता व संस्कृति के आलोक में 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की अवधारणा को पुनः प्रतिष्ठापित करने के उदेश्य से 'कर्म-कुंभ' नामक इस पुस्तक की परिकल्पना की गई, जिसमें न केवल महाकुम्भ 2025 से जुड़े महत्वपूर्ण पलों को रेखांकित करने का एक विनम्र प्रयास किया गया है बल्कि एक प्रशासनिक अधिकारी के व्यक्तिगत/टीमगत कार्यों से उपजने वाली सामूहिक चेतना के सकारात्मक पहलुओं को भी दर्शाने की एक अदद कोशिश की गई है, ताकि समस्त मानवता को अनुप्राणित करने वाले शासक-सेवक वर्ग की अन्तरात्मा को झंकझोरा जा सके। आईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र सिंह द्वारा मौलिक रूप से लिखित तथ्यों व मौखिक रूप से प्रेषित स्वर संग्रह रूपी वाक्यों को संपादित करना निःसंदेह एक जटिल कार्य रहा है। लेकिन जब उद्देश्य व्यक्ति नहीं समष्टि हो तो फिर पेशेवर दक्षता अपने आप ही छाप छोड़ने लगती है। मेरे द्वारा संपादित यह पुस्तक लेखक की तीसरी...