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राजनीतिक दलों को कार्यस्थल पर पॉश एक्ट, 2013 से प्राप्त वैधानिक छूट एक नैतिक विडंबना नहीं तो क्या?

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राजनीतिक दलों को कार्यस्थल पर पॉश एक्ट, 2013 से प्राप्त वैधानिक छूट एक नैतिक विडंबना नहीं तो क्या?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक दलों को महिलाओं की कार्यस्थल सुरक्षा संबंधी कानून प्रोटेक्शन ऑफ सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट (पॉश एक्ट), 2013 से प्राप्त वैधानिक छूट किसी नैतिक विडंबना से कम नहीं है, चाहे इसका विधिक कारण कुछ भी हो! यह हमारी संसद और सर्वोच्च न्यायालय दोनों की नैतिक लापरवाही या खामोशी दोनों का नतीजा है? ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह तर्क कि राजनीतिक दल और उनके सदस्यों के बीच पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध नहीं होता है, किसी के गले नहीं उतरता है। यह अनुभव की व्यवहारिक कसौटी पर भी खरा नहीं उतरता है।  यह ठीक है कि उनके बीच पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी का सम्बन्ध नहीं होता, लेकिन दफ्तर और कार्यसंस्कृति दोनों होती है। यहां तक कि टूर के दौरान ठहरने वक्त नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं का कमरा आसपास ही रखा जाता है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इससे राजनीतिक दलों व उनके नेताओं को कार्यकर्ताओं के शोषण का अंतहीन अधिकार मिल जाता है! खासकर, जब ...

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया

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शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया # डीएम साहब ने शिक्षकों और छात्रों को विभिन्न प्रकार के गृह उद्योग निर्मित आचारों के स्वाद चखाये और मिड डे मील में बच्चों को देने के निर्देश दिये। @ कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली/जौनपुर। गुरुवार को उत्तरप्रदेश के जौनपुर जनपद के यशस्वी जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने शिक्षक दिवस से पूर्व जनपद के सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया और छात्रों को "गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा:। गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः।।" का मर्म समझाते हुए कहा कि यह एक संस्कृत गुरु मंत्र है, जिसका अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (शिव) हैं और गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, उन गुरु को मेरा नमस्कार है। इसका भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मंत्र गुरु की महत्ता को दर्शाता है, जो सृजनहार ब्रह्मा के समान शिष्य में ज्ञान और जागरूकता का सृजन करते हैं, रक्षा करने वाले विष्णु के समान छात्रों में अच्छे गुणों की रक्षा करते हैं,...

सभ्यता-संस्कृति के उन्नायक व देश के भविष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा धारित अष्ट गुणों की उपादेयता

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सभ्यता-संस्कृति के उन्नायक व देश के भविष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा धारित अष्ट गुणों की उपादेयता  @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, जिलाधिकारी जौनपुर भारत के यशस्वी और सर्वाधिक लोकप्रिय संत स्वरूप माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के बाद देश व विदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, महंत एवं पीठाधीश्वर, गोरक्षनाथ पीठ, गोरखपुर, भारतीय लोकतंत्र की व्यवस्था के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता हैं। वह भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तरप्रदेश, जो सर्वाधिक जनसंख्या, संसाधनों एवं प्रगति और वैभव की अपार संभावनाओं को समेटे हुए है, विश्व के पटल पर अपनी सभ्यता-संस्कृति, सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विश्वविख्यात है।  उत्तरप्रदेश के महान सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक के रूप में श्रीराम-कृष्ण, राम-रहीम, कबीर एवं महाभारत काल से पूर्व में महाराजा दशरथ, राजा हरिश्चन्द्र, महर्षि दधीचि, महर्षि बाल्मीकि, महर्षि परशुराम जी, महर्षि विश्वामित्र आदि की अपनी महत्ता है। यह देव तथा ईश्वर की वरदान प्राप्त भूमि है, जिसके यशस्वी माननीय मुख्यमंत्री श्री यो...

उपराष्ट्रपति चुनाव को राष्ट्रवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता की सियासी लड़ाई बनाने के रणनीतिक मायने

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उपराष्ट्रपति चुनाव को राष्ट्रवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता की सियासी लड़ाई बनाने के रणनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उपराष्ट्रपति पद के लिए अब एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों तरफ से उम्मीदवारों का ऐलान हो चुका है। एनडीए ने जहां महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं उनसे मुकाबले के लिए इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बी. सुदर्शन रेड्डी को चुनाव मैदान में उतारा है। इस प्रकार एक तरफ जहां मोदी ने एनडीए उम्मीदवार की तारीफ करते हुए कहा है कि राधाकृष्णन सियासी खेल नहीं करते हैं, बल्कि सुलझे हुए राजनेता हैं। वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार रेड्डी को गैरराजनीतिक चेहरा बताते हुए कहा है कि मौजूदा चुनाव विचारधारा (संघ बनाम प्रगतिशील) की लड़ाई है। साधारण भाषा में कहें तो उपराष्ट्रपति चुनाव को भी राष्ट्रवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता की सियासी लड़ाई का नया अखाड़ा बना दिया गया है, जिसके रणनीतिक मायने भी दिलचस्प हैं। यूँ तो संख्या बल में एनडीए यानी सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी है, लेकिन यह लड़ाई आंकड़ों से ज्यादा प्...

राजनीतिक भ्रष्टाचार व अपराध को मिटाने के लिए भाजपा द्वारा लाए हुए तीन नए कानूनों के सियासी मायने समझिये

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राजनीतिक भ्रष्टाचार व अपराध को मिटाने के लिए भाजपा द्वारा लाए हुए तीन नए कानूनों के सियासी मायने समझिये @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक देश में यथार्थवादी सियासत को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रवादी स्वभाव की भारतीय जनता पार्टी अक्सर राजनीति की उन दुःखती हुई रगों पर ही हाथ डालती आई है जो इस सद्भावी देश व समरस समाज को बदलने की कुव्वत रखते हैं। इससे सोकॉल्ड सेक्यूलर्स, समाजवादियों व साम्यवादियों की बौखलाहट देखते ही बनती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित भाजपा की दशक भर से ज्यादा देशव्यापी सियासी सफलता का राज भी यही है।  इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गत बुद्धवार को एकजूट विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच सदन में जो ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ को पेश किया और उसके बाद उनके ही प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का जो निर्णय लिया, वह देश व स्वस्थ समाज की स्थापना की दिशा में एक और बहुत ही उपयोगी प...

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सर्जियो गोर को भारत में नया अमेरिकी राजदूत नामित किए जाने के कूटनीतिक मायने

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सर्जियो गोर को भारत में नया अमेरिकी राजदूत नामित किए जाने के कूटनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने खास सिपहसालार सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का नया राजदूत नामित किया है। पिछले ढाई दशकों से निरंतर मजबूत होने के बाद एक बार फिर से भारत-अमेरिका सम्बन्ध पुनः उसी चौराहे पर पहुंच चुके हैं, जहां से 20वीं सदी के अंतिम दशक में प्रारंभ हुए थे। इसलिए यह नियुक्ति केवल कूटनीतिक बदलाव भर नहीं मानी जा सकती है, बल्कि इस बात के संकेत दे रही है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों का चेहरा और चरित्र दोनों बदलने वाला है। ऐसा इसलिए कि सर्जियो गोर की छवि ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा के कट्टर समर्थक और राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में रही है। इससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब भारत के साथ अपने रिश्तों को ज्यादा लेन-देन आधारित कूटनीति के नजरिए से देखेगा।  यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जगत में इस बात की चर्चा तेज हो चुकी है कि पहले 'शत्रु' को 'म...

भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए दरार के कूटनीति मायने

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भारत-अमेरिका सम्बन्धों में आए दरार के कूटनीति मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत-अमेरिका संबंधों में गहराते दरार से दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहयोग भी प्रभावित हो सकता है। चूंकि भारत और अमेरिका के बीच संबंध 1947 में हासिल स्वतंत्रता के बाद से ही महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें जो उतार-चढ़ाव आए हैं, उसपर पूरी दुनिया की स्वार्थपरक निगाहें लगी हुई हैं। ऐसा इसलिए कि इससे अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीकरण की पूर्ववर्ती और मौजूदा दोनों कोशिशों को भी गहरा धक्का लग सकता है।  चूंकि भारत एक गुटनिरपेक्ष देश है, ऐतिहासिक पंचशील के सिद्धांतों को मानता आया है, इसलिए वह अमेरिका और रूस (यूएसएसआर) के खेमेबाजी से दूर रहने की कोशिश करता है। अमेरिका-चीन के वैश्विक रस्साकशी से खुद को दूर रखना चाहता है। लेकिन पिछले 7-8 दशक में भारत के पड़ोसी देशों- पाकिस्तान व चीन ने ऐसा सीमाई उधम मचाया कि भारत को कभी रूस से तो कभी ...