सभ्यता-संस्कृति के उन्नायक व देश के भविष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा धारित अष्ट गुणों की उपादेयता


सभ्यता-संस्कृति के उन्नायक व देश के भविष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा धारित अष्ट गुणों की उपादेयता 

@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, जिलाधिकारी जौनपुर

भारत के यशस्वी और सर्वाधिक लोकप्रिय संत स्वरूप माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के बाद देश व विदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, महंत एवं पीठाधीश्वर, गोरक्षनाथ पीठ, गोरखपुर, भारतीय लोकतंत्र की व्यवस्था के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता हैं। वह भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तरप्रदेश, जो सर्वाधिक जनसंख्या, संसाधनों एवं प्रगति और वैभव की अपार संभावनाओं को समेटे हुए है, विश्व के पटल पर अपनी सभ्यता-संस्कृति, सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विश्वविख्यात है। 

उत्तरप्रदेश के महान सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक के रूप में श्रीराम-कृष्ण, राम-रहीम, कबीर एवं महाभारत काल से पूर्व में महाराजा दशरथ, राजा हरिश्चन्द्र, महर्षि दधीचि, महर्षि बाल्मीकि, महर्षि परशुराम जी, महर्षि विश्वामित्र आदि की अपनी महत्ता है। यह देव तथा ईश्वर की वरदान प्राप्त भूमि है, जिसके यशस्वी माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी हैं। वह एक महान संत के साथ-साथ उत्कृष्ट राजनेता और सर्वोत्कृष्ट व्यवस्थापक भी हैं, ऐसा मेरा मत है। यह अनुभूत सत्य है। 

कहना न होगा कि किसी महान उद्देश्य को साधने के लिए  उत्तरप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने "विकसित उत्तरप्रदेश 2047", जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने "विकसित भारत 2047" की परिकल्पना की है, उसको साकार रूप देने के लिए उत्तरप्रदेश के यशस्वी माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा प्रदेश के सेवानिवृत्त प्रशासनिक, पुलिस, न्यायिक और अन्य सेवाओं के योग्य अधिकारियों को विकसित भारत के स्वप्न को पूर्ण करने के लिए उत्तरदायित्व दिया है, तथा जो कार्यरत वैज्ञानिक हैं उनको भी विभिन्न जनपदों के विकास के लिए अपनी टीम में सम्मिलित किया है।

 उल्लेखनीय है कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रथम वर्ष में ही कृषकों की समस्या के समाधान करने के लिए ऋण मोचन योजना, भारतीय संस्कृति का आधार और धर्म के आधार पर स्वीकार्य व पूज्य गोवंश को संरक्षण प्रदान करने के लिए निराश्रित गौशालाओं के साथ साथ इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग और अन्य विषयों पर, जो उल्लिखित किये गए हैं, उल्लेखनीय कार्य को करते हुए उस कर्तव्य को सिद्ध किया है जिसके अंतर्गत यहां पर वर्णित किया गया है। यह इसी बात का प्रयास और प्रमाण है कि माननीय मुख्यमंत्री जी विकसित भारत वर्ष 2047 के साथ-साथ ही विकसित उत्तरप्रदेश 2047 को भी लक्ष्य में रखकर कार्य कर रहे हैं और सभी के सहयोग से उनके अनुभवों का लाभ उठाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास किया गया है, उसकी मैं हृदय से प्रशंसा करता हूँ।

यदि उपमा स्वरूप सच कहा जाए तो माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी विभिन्न अर्थों में अनुकरणीय व्यक्तित्व रखते हैं। कहा भी गया है कि अणिमा, लघिमा, महिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व और कामावसायित्व- इन आठ गुणों को प्राप्त व्यक्ति ही योगी होता है। इसलिए माननीय मुख्यमंत्री इन आठों गुणों से परिपूर्ण हैं। इन आठों गुणों का अर्थ निम्नवत है-

1. अणिमा- सूक्ष्म से भी सूक्ष्म रूप धारण करना। माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने जीवन में इस प्रयास को योग से अंगीकृत किया है। यह क्षमता उन्हें हासिल है।

2. लघिमा- शीघ्र से शीघ्र कोई काम कर लेना। वह सभी कार्य ततपरता पूर्वक करते, करवाते हैं। जिस तरह से उन्होंने अपने प्रथम वर्ष में ही उत्तरप्रदेश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था, अराजकता और शांति एवं कानून व्यवस्था को सुधारा, सुधरवाया है, वह उन्हें 'लघिमा' से संपृक्त गुण से संपन्न करती है।

3. महिमा- सबके लिए पूजनीय हो जाना। माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी आज भारतीय लोकतंत्र के साथ साथ विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता और पूजनीय व्यक्ति बन चुके हैं। यह विषय विवाद का नहीं, बल्कि शोध समझ विकसित करने का है क्योंकि उन्होंने जनकल्याणकारी शासन दिया है।

4. प्राप्ति- जब कोई भी वस्तु अप्राप्य नहीं रहे तो वह उस गुण से परिपूर्ण है। माननीय योगी जी को किसी भी भौतिक चीज की प्राप्ति की इच्छा नहीं है। इसलिए उनके भविष्य के मनोरथ की "प्राप्ति" भी उनके सदकर्मों, श्रेष्ठ विचारों से होगा।

5. प्राकाम्य- सर्वत्र व्याप्त यानी व्यापक होने से माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को "प्राकाम्य" नामक सिद्धि की प्राप्ति होती है। चूंकि योगी जी के नाम एवं कार्य की चर्चा सकल विश्व में है। अतः इस गुण से भी माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी परिपूर्ण हैं।

6. ईशित्व- जब वह सब कुछ करने में समर्थ-ईश्वर हो जाता है, तो उसकी वह सिद्धि 'ईशित्व' कहलाती है। श्री योगी जी जन्म से ही क्षत्रिय कुल में पैदा हुए हैं, इसलिए ईश्वर के रूप में वह कभी नहीं अपने को स्थापित करते हैं। तभी तो ईश्वर की असीम कृपा उन पर व्याप्त है।

7. वशित्व- सबको वश में कर लेना, यह वशित्व सिद्धि है। यद्यपि क्षत्रिय कुल में जन्मे व्यक्ति श्री योगी आदित्यनाथ जी योगी होकर भी कभी किसी को वशीभूत करना नहीं चाहते, फिर भी उनके कार्य से अधिकांश व्यक्ति उनके वश में हो जाते हैं। अतः यह गुण भी प्राप्ति की प्रक्रिया में है।

8. कामावसायित्व- इच्छा के अनुसार कहीं भी रहना आदि। सब काम हो सके, उसका नाम "कामावसायित्व" है। यह गुण माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी में पूर्ण निष्ठा के साथ भरा हुआ है, क्योंकि माननीय योगी जी ने उत्तरप्रदेश के उन जनपदों में रात्रि निवास किया, यथा- गौतमबुद्ध नगर, बिजनौर, हस्तिनापुर (धार्मिक स्थल) एवं अन्य जहां यह धारणा थी कि मुख्यमंत्री का इन जनपदों में रात्रि विश्राम एवं भ्रमण पुनः उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने देता है। लेकिन योगी जी ने सैकड़ों बार इस धारणा को मिथ्या क़रार देकर विश्राम किया और निरंतर 9 वर्षों से मुख्यमंत्री बने हुए हैं। इसलिए इस गुण से परिपूर्ण हैं।

8. ऐश्वर्य- यह साधनभूत है। 25 वर्ष की आयु से ही वह इसे प्राप्त कर चुके हैं। 

दरअसल, लेखक अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी है जिनको कई गुणों में सिद्धता और सिद्धहस्तता प्राप्त है, परन्तु सेवा में रहकर उपर्युक्त मौलिक गुणों की प्राप्ति कठिन है। ऐसा इसलिए कि सेवा में रहकर सेवक ही रहना पड़ता है। परंतु मैं ईश्वरीय कृपा और अपने ईष्ट आराध्य श्री हनुमानजी की असीम कृपा से कह सकता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी भारत के भविष्य हैं। उनको भी सही अर्थों में सदाशयी अर्थात अपने योग्य व्यक्तियों की जरूरत पड़ेगी। महाराज जी इस ओर निरंतर प्रयासरत हैं और लगातार कार्य कर रहे हैं। वह अपने जनकल्याणकारी उद्देश्य में, सनातन समाज के साधना में सफल हों, यही समस्त भारतीयों की इच्छा है। जय श्री राम जी, जय श्री हनुमानजी, जय भोलेनाथ जी।

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