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जानिए, क्या है अंतर्देशीय जलयान विधेयक 2021, क्या रहीं विपक्ष की आपत्तियां और कैसे हुआ पास?

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जानिए, क्या है अंतर्देशीय जलयान विधेयक 2021, क्या रहीं विपक्ष की आपत्तियां और कैसे हुआ पास? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार अंतर्देशीय पोत विधेयक, 2021 भारतीय संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों- लोकसभा व राज्यसभा में पास हो चुका है। इसके बारे में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा को बताया कि यह विधेयक राज्यों द्वारा बनाए गए अलग-अलग नियमों के बजाय देश के लिए एकीकृत कानून को लागू करने का प्रयास करता है। इस नए कानून के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र पूरे देश में मान्य होगा और राज्यों से अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल पर जहाजों और उनके चालक दल के विवरण दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस बनाने का भी प्रावधान है। यह विधेयक सस्ता और सुरक्षित नौवहन को बढ़ावा देता है, यात्रियों और कार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और अंतर्देशीय जलमार्ग और नेविगेशन से संबंधित कानूनों के आवेदन में एकरूपता लाता है। वहीं, राज्‍यसभा में भी गत दिनों शोर-शराबे के बीच इस विधेयक को पारित किया गया। लोकसभा इसे प...

आरटीपीएस काउंटर संचालित नहीं करने वाले पंचायत नपेंगे: सम्राट चौधरी

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आरटीपीएस काउंटर संचालित नहीं करने वाले पंचायत नपेंगे: सम्राट चौधरी कमलेश पांडेय नई दिल्ली/पटना। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि सूबे के पंचायतों में आगामी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस से हर हाल में आरटीपीएस काउंटर का संचालन कार्य प्रारंभ कर दिया जाए। क्योंकि इसके निमित्त पंचायती राज विभाग ने प्रदेश के पंचायतों को फर्नीचर आदि के लिए समुचित धनराशि भी उपलब्ध करा चुकी है। श्री चौधरी ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि आगामी 12 अगस्त तक पंचायती राज विभाग को अपने-अपने पंचायतों की सूचना देना अनिवार्य किया गया है। साथ ही आरटीपीएस काउंटर खोलने का समय पूर्वाह्न  में 10:00 बजे से 12:30 बजे तक एवं अपराह्न में 2:00 से 5:00 बजे तक निर्धारित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के अमल में आ जाने के बाद अब गरीबों मजदूरों को जाति, आवासीय, आय एवं अन्य कार्यों के लिए प्रखंड और अनुमंडल कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना  पड़ेगा। फोटोकैप्शन:- सम्राट चौधरी,  कैबिनेट मंत्री, पंचायती राज, बिहार सरकार।

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ की

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बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ की # नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी की कोई नहीं सुनता है, इन बातों का दो टूक खंडन किया  भास्कर ब्यूरो नई दिल्ली/पटना। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें यह बताया गया है कि नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी की कोई नहीं सुनता है। मंत्री श्री चौधरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया है कि ऐसी बातें सरासर असत्य एवं मनगढ़ंत व काल्पनिक है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए एकजुट है। बिहार में लंबे समय से विकास कार्य किए जा रहे हैं। पंचायती राज विभाग में भी कई बड़े फैसले मुख्यमंत्री श्री कुमार के कुशल व प्रगतिशील नेतृत्व में ही लिए गए हैं।  बता दें कि गत 2 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में ए.एन.आई न्यूज़ के कैमरा सहायक विजय कुमार के द्वारा मुख्यमंत्री श्री कुमार से पूछा गया कि कैबिनेट मंत्री पंचायती राज विभाग सम्राट चौधरी के द्वारा कहा जा रहा है कि सरकार में मेरी कोई नहीं सुनता है। उन्...

साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा ने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए किया चुनाव शंखनाद

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साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा ने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए किया चुनाव शंखनाद # भाजपा को दिया अपने उल्लेखनीय कार्यों का श्रेय और पार्टी के पूरे कुनबे के सहयोग का आभार जताया  # सिर्फ आकार में ही नहीं, बल्कि जनहितैषी कार्यों में भी सबसे आगे है साहिबाबाद कमलेश पांडेय/भास्कर ब्यूरो गाजियाबाद। साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा ने अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों को गिनाते हुए चुनाव शंखनाद कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उन्होंने अपने उल्लेखनीय कार्यों का श्रेय अपनी पार्टी भाजपा को दिया और पार्टी के पूरे कुनबे के सहयोग का आभार जताकर सबका दिल जीत लिया। उनके कहने का सार साफ है कि सिर्फ आकार में ही नहीं, बल्कि जनहितैषी कार्यों में भी साहिबाबाद विधानसभा सबसे आगे है। बता दें कि सोमवार को सुनील कुमार शर्मा, विधायक साहिबाबाद द्वारा रॉयल पैलेस वसुंधरा में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस मौके पर भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा एवं चेयरमैन खोड़ा-मकनपुर नगरपालिका रीना भाटी मौजूद रहीं। इस दौरान "विकास की ओर अग्रसर हमारा साहिबाबाद" नाम की विकास की पत्रिका को सुनील श...

जानिए, ई-रुपी क्या है और क्या-क्या होंगे इसके फायदे?

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जानिए, ई-रुपी क्या है और क्या-क्या होंगे इसके फायदे? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और इसके तहत होने वाले लेन-देन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से पिछले सात वर्षों में कई क्रांतिकारी व युगान्तकारी कदम उठा चुके हैं। डिजिटल पेमेंट सिस्टम "ई-रूपी" उनमें से एक और बिल्कुल नया है। यह सोमवार को भारत में एक नया डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च हुआ है। इसके लिए लोगों को इंटरनेट बैंकिंग या कार्ड आदि की जरूरत नहीं होगी। पीएम मोदी ने इसे लोगों तक सरकारी सेवाओं का फायदा पहुंचने के लिए लॉन्च किया है। यह देश की अपनी डिजिटल करेंसी के रूप में भारत का पहला कदम है। डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शाम 4:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ई-वाउचर-बेस्ड डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशन ई-रुपी (e-RUPI) को लॉन्च किया। यह एक प्रीपेड ई-वाउचर है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने विकसित किया है। इस प्लेटफॉर्म को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीस...

जरा सोचिए, धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती के लिए समान नियम बनाने में विलम्ब क्यों, किसके लिए?

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जरा सोचिए, धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती के लिए समान नियम बनाने में विलम्ब क्यों, किसके लिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन यहां पर विभिन्न धर्मावलंबियों के लिए बनाए गए नियम-कानूनों में भेदभाव स्पष्ट नजर आ रहा है। सवाल है कि क्या इसके पीछे भी हमारे संविधान निर्माताओं और कानून बनाने वालों की कोई सोची समझी रणनीति रही होगी, जिसे समझने में हमलोग अब तक विफल रहते आये हैं।  या फिर, मौजूदा राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक स्थिति के बारे में सपने में भी उन्होंने परिकल्पना नहीं की होगी, जहां धार्मिक प्रबंधन और सांस्कृतिक संकीर्णताओं से सियासत प्रभावित है और इस मनःस्थिति से सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था भी अछूती नहीं बची है।  सवाल यह भी है कि इस अप्रत्याशित स्थिति-परिस्थिति के लिए किसे दोषी समझा जाए। और यदि किसी को दोषी नहीं समझा जाए तो फिर क्यों नहीं सभी धर्मों के बीच में कानूनी समानता स्थापित करने का पुनः प्रबंध किया जाए। अगर ऐसा होता है तो धार्मिक विविधताओं से भरे इस देश का काफी भला हो जाएगा...

नीतीश कुमार ने ललन सिंह पर भरोसा जताकर चकित कर दिया सियासी सुरमाभोपालियों को

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नीतीश कुमार ने ललन सिंह पर भरोसा जताकर चकित कर दिया सियासी सुरमाभोपालियों को # जदयू के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के ऊपर नीतीश कुमार के राष्ट्रीय सपनों को साकार करने का आ गया नैतिक भार @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार समाजवादी सियासत के शहंशाह और बिहार के दिग्गज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड की कमान अपने भरोसेमंद सिपहसालार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष सौंपकर वह सियासी चाल चल दी है, जिसकी उम्मीद बहुतों को भी नहीं रही होगी। लेकिन स्वभाव से नेकदिल इंसान और राजनीतिक बारीकियों को समझने वाले सियासी बादशाह 1970 के दशक से वह अप्रत्याशित फैसले लेते आये हैं, जिसकी वजह से उन्हें बिहार की सियासत का चाणक्य कहा जाता है।  आखिर एक अभियंता तमाम सियासी विद्रूपताओं व उलझनों को सहते-झेलते हुए कैसा राजनैतिक महल तैयार कर सकता है, जदयू इसका जीता जागता उदाहरण है। जब जनता पार्टी को निगलने के लिए आरएसएस पृष्ठभूमि वाले राजनेता गोलबंद हुए, जब जनता दल को कमतर दिखाने के लिए भारतीय जनता पार्टी सजग हुई और जब ...