Project Swasth is a community-based preventive health model: Sharda Welfare Foundation


प्रोजेक्ट स्वस्थ एक समुदाय आधारित निवारक स्वास्थ्य मॉडल है: शारदा वेलफेयर फाउंडेशन 
# राजस्थान में शारदा वेलफेयर फाउंडेशन का विस्तार हुआ, होंडा इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से टपूकड़ा में शुरू हुआ 'प्रोजेक्ट स्वस्थ'
@ कमलेश पांडेय/राजनैतिकदुनिया
नईदिल्ली/जयपुर/तिजारा। भारत आज विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। देशभर में औद्योगिक विकास, विनिर्माण और निवेश के नए अवसर नए क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। ऐसे समय में यह भी आवश्यक है कि आर्थिक प्रगति के साथ स्थानीय समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, जागरूकता और सामाजिक सुरक्षा भी समान रूप से पहुँचे। समावेशी विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब उद्योगों की प्रगति के साथ उनके आसपास रहने वाले समुदाय भी स्वस्थ, जागरूक और सशक्त बनें।
इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में गत 30 जुलाई को राजस्थान के खैरथल–तिजारा जिले के टपूकड़ा क्षेत्र स्थित मसीत गांव में होंडा इंडिया फाउंडेशन के सहयोग, ग्राम पंचायत मसीत की सहभागिता तथा शारदा वेलफेयर फाउंडेशन के क्रियान्वयन में 'प्रोजेक्ट स्वस्थ' का शुभारंभ किया गया। साथ ही उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में समुदाय एवं विद्यालय आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुभव के आधार पर शारदा वेलफेयर फाउंडेशन ने अब राजस्थान में भी अपने कार्यों का विस्तार किया है।
 शुभारंभ के अवसर पर आयोजित पहले निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 205 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त किया। शिविर के दौरान कुल 423 चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किए गए, जिनमें 147 सामान्य चिकित्सकीय परामर्श, 142 महिलाओं को स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ द्वारा परामर्श तथा 134 लोगों की नेत्र जांच एवं परामर्श शामिल रहे। साथ ही एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य गैर-संचारी रोगों की जांच कर आवश्यकता वाले मरीजों को आगे के उपचार के लिए मार्गदर्शन भी दिया गया।
प्रोजेक्ट स्वस्थ की शुरुआत के लिए टपूकड़ा का चयन भी महत्वपूर्ण है। राजस्थान के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल यह क्षेत्र मेवात अंचल से भी जुड़ा हुआ है, जहाँ बड़ी ग्रामीण आबादी के साथ औद्योगिक गतिविधियाँ भी लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2023 में खैरथल–तिजारा जिले के गठन के बाद स्वास्थ्य सहित सार्वजनिक सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। ऐसे समय में समुदाय आधारित स्वास्थ्य पहलें सरकारी प्रयासों की पूरक बनकर लोगों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
प्रोजेक्ट स्वस्थ एक समुदाय आधारित निवारक स्वास्थ्य मॉडल है। इसका उद्देश्य केवल स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन, नियमित स्वास्थ्य जांच की संस्कृति विकसित करना, एनीमिया एवं गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान सुनिश्चित करना तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार तक लोगों की पहुँच आसान बनाना है। पात्र परिवारों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मॉडल को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि भविष्य में इसे देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके।
इस पहल की आवश्यकता राजस्थान की स्वास्थ्य स्थिति से भी स्पष्ट होती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार राज्य में 15 से 49 वर्ष आयु की 54.7 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिया से प्रभावित हैं, जबकि 6 से 59 माह आयु के 71.5 प्रतिशत बच्चे एनीमिक हैं। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में समय पर जांच, प्रारंभिक पहचान और समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
आने वाले तीन वर्षों में प्रोजेक्ट स्वस्थ के अंतर्गत टपूकड़ा क्षेत्र के समुदायों और विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी। इनमें महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान, पोषण संबंधी परामर्श, दृष्टि परीक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन अभियान, गैर-संचारी रोगों की नियमित स्क्रीनिंग तथा आवश्यकता के अनुसार उपचार के लिए रेफरल जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। विद्यालयों को भी इस पहल का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाएगा, ताकि बच्चों के माध्यम से स्वस्थ व्यवहार और सही स्वास्थ्य जानकारी परिवारों तक पहुँच सके।
प्रोजेक्ट स्वस्थ का उद्देश्य केवल टपूकड़ा में एक सफल स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित करना नहीं है, बल्कि उद्योग, ग्राम पंचायत, समुदाय और स्वास्थ्य संस्थानों की साझेदारी पर आधारित एक ऐसा सहभागी सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल विकसित करना है, जिसे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य में देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके। यदि यह पहल समुदायों में नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर उपचार और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन की संस्कृति विकसित करने में सफल होती है, तो यह औद्योगिक विकास के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य को जोड़ने का एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
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