Could foreign powers, uneasy with India's rapid progress, be hatching a social media conspiracy?
क्या भारत की तेज़ प्रगति से असहज विदेशी शक्तियाँ रच सकती हैं सोशल मीडिया षड्यंत्र? समझिए
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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
भारत की तेज़ प्रगति से असहज शक्तियाँ सोशल मीडिया, फर्जी अकाउंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कुछ संस्थागत माध्यमों का उपयोग करके देश में भ्रम, विभाजन और अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर सकती हैं। यह बात हमने नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही है। उन्होंने दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत के शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में पहुँचने और वैश्विक प्रभाव बढ़ने से कुछ देशों या समूहों को असुविधा हो सकती है। यही वजह है कि अब लोगों के जेहन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत की तेज़ प्रगति से असहज विदेशी शक्तियाँ सोशल मीडिया षड्यंत्र रच सकती हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संदेश मुख्यतः डिजिटल सूचना-सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित हैं, क्योंकि उन्होंने बेझिझक कहा है कि भारत की बढ़ती आर्थिक और वैश्विक शक्ति से असहज तत्व सोशल मीडिया, फर्जी अकाउंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कुछ संस्थागत माध्यमों का उपयोग कर समाज में भ्रम, जातीय, भाषाई और क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं। चूंकि उन्होंने देशवासियों को समय रहते ही आगाह कर दिया है, इसलिए सच्चे राजनीतिक अभिभावक का फर्ज निभाया है।
इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और समाज के अन्य वर्गों से ऐसी सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने और तथ्य-जांच की आदत विकसित करने का आग्रह किया है। चूंकि सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार (misinformation), फर्जी अकाउंट, बॉट नेटवर्क और समन्वित प्रचार अभियान दुनिया के अनेक देशों में देखे गए हैं। इसलिए भारत सहित कई सरकारें और विशेषज्ञ समय-समय पर चेतावनी देते आए हैं कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों का उपयोग सामाजिक तनाव, चुनावी प्रभाव या गलत सूचना फैलाने के लिए किया जा सकता है।
इसलिए, योगी आदित्यनाथ का वक्तव्य भी एक राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चेतावनी भर है, जिसके तरह तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वक्तव्य के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं: पहला, भारत की प्रगति से असहज शक्तियाँ दुष्प्रचार का सहारा ले सकती हैं। सोशल मीडिया और AI उपयोगी तकनीक हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग भी संभव है। दूसरा, फर्जी अकाउंट, डीपफेक, अफवाह और भ्रामक सामग्री के माध्यम से सामाजिक तनाव बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। और तीसरा, नागरिकों को किसी भी वायरल सामग्री पर तुरंत विश्वास करने के बजाय विश्वसनीय स्रोतों से उसकी पुष्टि करनी चाहिए।
हालाँकि, यहां पर यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ने संभावित "भारत-विरोधी शक्तियों" या "असहज तत्वों" की बात की है। इसलिए, उनके इस कथन का मूल संदेश राष्ट्रीय एकता, डिजिटल जागरूकता और सूचना के प्रति सतर्कता पर बल देना है, न कि बिना प्रमाण किसी विशेष देश या समूह को दोषी ठहराना। चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कथन एक संभावित सुरक्षा और रणनीतिक जोखिम की ओर संकेत करता है, जिसके गम्भीर राजनीतिक, प्रशासनिक व सामाजिक मायने हैं, जिन्हें समय रहते ही समझने और सचेष्ट होने की जरूरत है।
यदि इसे विश्लेषणात्मक दृष्टि से इसे देखें, तो इसके प्रमुख निहितार्थ निम्नलिखित हैं:-
पहला, सूचना युद्ध (Information Warfare): आधुनिक दौर में सैन्य शक्ति के साथ-साथ सोशल मीडिया, साइबर माध्यम और दुष्प्रचार भी प्रभाव डालने के साधन बन गए हैं। झूठी या भ्रामक सूचनाओं के जरिए समाज में भ्रम और अविश्वास फैलाने की कोशिश की जा सकती है।
दूसरा, सामाजिक ध्रुवीकरण: जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र या अन्य संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ सामग्री के माध्यम से सामाजिक तनाव बढ़ाने का प्रयास हो सकता है।
तीसरा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा: यदि कोई देश तेज़ी से आर्थिक और रणनीतिक रूप से उभरता है, तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर प्रतिस्पर्धा किसी षड्यंत्र का प्रमाण है, लेकिन आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा वास्तविक होती है।
चौथी, डिजिटल सतर्कता की आवश्यकता: नागरिकों को किसी भी वायरल पोस्ट, वीडियो या दावे की सत्यता की जांच विश्वसनीय स्रोतों से करनी चाहिए और भ्रामक सामग्री साझा करने से बचना चाहिए।
पांचवीं, राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका: सरकार, सोशल मीडिया कंपनियों, मीडिया संस्थानों और नागरिक समाज की साझा जिम्मेदारी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दुष्प्रचार से सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखें।
इसलिए, योगी आदित्यनाथ का वक्तव्य एक राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चेतावनी भर है। उनके इस कथन का मूल संदेश राष्ट्रीय एकता, डिजिटल जागरूकता और सूचना के प्रति सतर्कता पर बल देना है, न कि बिना प्रमाण किसी विशेष देश या समूह को दोषी ठहराना।
# समझिए मुख्यमंत्री के इशारे और रहिए सतर्क!
यूपी के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही किसी विशिष्ट देश या संगठन के विरुद्ध स्थापित तथ्यात्मक आरोप नहीं लगाए हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, शक की सुई पूरब में चीन की कम्पनियों की ओर और पश्चिम में अमेरिका-यूरोप की कम्पनियों की ओर तथा तुर्किये जैसे इस्लामिक देशों की ओर भी घूमती है।
ऐसा इसलिए कि प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों में से कई अमेरिकी कंपनियों के स्वामित्व में हैं, जबकि कुछ चीनी कम्पनियों के स्वामित्व में हैं, और कुछ कम्पनियों में तुर्किये जैसे भारत विरोधी पाकिस्तान समर्थक इस्लामिक देश के शेयर्स हैं। लिहाजा शक की सुई घूमना स्वाभाविक है। कुछ बातें तथ्यात्मक रूप से कही जा सकती हैं। वह यह कि प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों में से कई अमेरिकी या चीनी कंपनियों के स्वामित्व में हैं, जो सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार (misinformation), फर्जी अकाउंट, बॉट नेटवर्क और समन्वित प्रचार अभियान का हिस्सा समझी जाती हैं।
चूंकि दुनिया के अनेक देशों में इनकी नकारात्मक भूमिकाएं देखी गई हैं। लिहाजा भारत सहित कई सरकारें और विशेषज्ञ समय-समय पर चेतावनी देते रहे हैं कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों का उपयोग सामाजिक तनाव, चुनावी प्रभाव या गलत सूचना फैलाने के लिए किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपने हाल के ही एक भाषण में उपर्युक्त आशय के इशारे किए हैं।
हालांकि मुख्यमंत्री के चेतावनी भरे वक्तव्य को किसी विशेष देश, जैसे अमेरिका, चीन, तुर्किये या फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी किसी विशिष्ट संस्था के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि उसके समर्थन में सार्वजनिक और सत्यापित साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं कि किसी एक देश या समूह द्वारा भारत के विरुद्ध ऐसा संगठित अभियान चलाया जा रहा है।
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