How can AI be leveraged in the publishing business while ensuring the continued relevance of editors in the industry? (प्रकाशन व्यवसाय में एआई (AI) की मदद कैसे ली जाए कि इंडस्ट्री में संपादक की उपयोगिता बनी रहे?)
प्रकाशन व्यवसाय में एआई (AI) की मदद कैसे ली जाए कि इंडस्ट्री में संपादक की उपयोगिता बनी रहे?
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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
प्रिंट, डिजिटल या वीडियो प्रकाशन/प्रसारण व्यवसाय में एआई (Artificial Intelligence) का बढ़ता प्रभाव कई संपादकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि कहीं उनकी भूमिका समाप्त तो नहीं हो जाएगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि एआई संपादकों का विकल्प नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक उपकरण बन सकता है। जो संपादक एआई को अपनाएंगे, उनकी उपयोगिता और प्रभाव पहले से अधिक बढ़ सकता है।
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सवाल है कि प्रकाशन व्यवसाय में एआई का उपयोग कैसे करें? तो यह जान लीजिए कि निम्नलिखित प्रकार से आप इसका उपयोग कर सकते हैं:-
पहला, शोध और तथ्य-संग्रह में एआई का उपयोग कीजिए, क्योंकि एआई कुछ ही मिनटों में किसी विषय पर उपलब्ध सामग्री, रिपोर्ट, दस्तावेज और पृष्ठभूमि जानकारी जुटा सकता है। अब रही संपादक की भूमिका की बात तो तथ्यों की सत्यता जांचना, स्रोतों की विश्वसनीयता परखना, संदर्भ और निष्कर्ष तय करना उनकी जिम्मेदारी है।
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दूसरा, प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार करने में एआई का उपयोग कीजिए। मसलन, समाचार, लेख, प्रेस विज्ञप्ति या संपादकीय का पहला मसौदा एआई से तैयार कराया जा सकता है। फिर संपादक की भूमिका अहम हो जाती है-
भाषा को परिष्कृत करने में, वैचारिक संतुलन बनाए रखने में और स्थानीय और मानवीय दृष्टिकोण जोड़ने में। क्योंकि यह काम दक्ष पेशेवर इंसान ही कर सकता है, कोई मशीन कदापि नहीं।
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तीसरा, हेडलाइन और SEO में एआई की उपयोगिता की जा सकती है, क्योंकि एआई विभिन्न प्रकार की आकर्षक हेडलाइन, सब-हेडिंग और SEO-अनुकूल शीर्षक सुझा सकता है। वहीं संपादक की भूमिका इसमें यह रह जाती है कि पाठकों की संवेदनाओं और समाचार की गरिमा के अनुरूप अंतिम चयन करना सुनिश्चित करें।
चौथा, अनुवाद और बहुभाषी प्रकाशन में एआई की उपयोगिता यह है कि इसके माध्यम से हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू तथा अन्य भारतीय भाषाओं में सामग्री का त्वरित अनुवाद संभव है। जहां तक इसमें संपादक की भूमिका की बात है तो वह भाषा की शुद्धता और सांस्कृतिक संदर्भ सुनिश्चित करता है। यह कार्य मशीन कदापि नहीं कर सकता है।
पांचवां, डेटा पत्रकारिता में एआई की उपयोगिता के नजरिए से बड़े डेटा सेट का विश्लेषण, पैटर्न पहचान और ग्राफिकल प्रस्तुति में एआई उपयोगी है। जहां तक इसमें संपादक की भूमिका का सवाल है तो वह डेटा के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ समझता और समझाता है।
# सवाल है कि फिर संपादक क्यों आवश्यक रहेंगे?
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संपादक आवश्यक इसलिए रहेंगे, क्योंकि एआई के पास- अनुभव नहीं है। सामाजिक संवेदनशीलता नहीं है। नैतिक विवेक नहीं है। राजनीतिक-सांस्कृतिक संदर्भों की गहरी समझ नहीं है। समाचार मूल्य (News Sense) नहीं है। जबकि एक स्थूल शरीर वाला संपादक यह तय करता है कि कौन-सी खबर महत्वपूर्ण है। वह तथ्य और प्रचार में अंतर पहचानता है। वह संस्थान की विश्वसनीयता का संरक्षक होता है। वह कानूनी और नैतिक जोखिमों का आकलन करता है। वह समाज और पाठक के हित को प्राथमिकता देता है।
# समझिए, भविष्य का संपादक कैसा होगा?
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भविष्य में "एआई-सक्षम संपादक" (AI-Augmented Editor) सबसे अधिक सफल होगा। क्योंकि वह एआई से शोध कराएगा, एआई से ड्राफ्ट बनवाएगा, एआई से चित्र और इन्फोग्राफिक्स तैयार कराएगा, लेकिन अंतिम निर्णय स्वयं करेगा। दूसरे शब्दों में, "एआई सामग्री बना सकता है, लेकिन संपादक उसका विवेक, विश्वसनीयता और दिशा तय करेगा।"
यदि एक पंक्ति में निष्कर्ष स्वरूप कहें तो प्रकाशन उद्योग में एआई, पेशेवर संपादकों की जगह नहीं लेगा; बल्कि उन संपादकों की जगह लेगा जो एआई का उपयोग करना नहीं सीखेंगे। जहां तक विशेष सुझाव की बात है तो यदि आप राजनीतिक विश्लेषण, संपादकीय लेखन और वैचारिक विमर्श से जुड़े हैं, तो एआई का उपयोग शोध सामग्री जुटाने, तथ्य सत्यापन की प्रारंभिक प्रक्रिया, लेखों के विभिन्न ड्राफ्ट तैयार करने, सोशल मीडिया पोस्ट और ग्राफिक्स बनाने, तथा अपनी वेबसाइट/ब्लॉग के लिए SEO सुधारने में करें। लेकिन अंतिम विश्लेषण, वैचारिक दृष्टिकोण और संपादकीय निर्णय अपने पास रखें। यही वह क्षेत्र है जहाँ मानवीय संपादक की भूमिका लंबे समय तक अपरिहार्य बनी रहेगी।
# निवेदन: यदि आप "राजनैतिकदुनिया" के जनहितैषी सरकारों और विचारों को पूर्ण धार देने के पक्षधर हैं तो हमारी टीम की स्वैच्छिक मदद करें। इससे हमारी कलम को मजबूती मिलेगी। यूपीआई क्यूआर कोड निम्नलिखित है:-
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