सुशासन पुरूष अटल बिहारी बाजपेयी की दूरदर्शिता भरी नीतियों से भारत-भाजपा को मिली मुकम्मल उड़ान

सुशासन पुरूष अटल बिहारी बाजपेयी की दूरदर्शिता भरी नीतियों से भारत-भाजपा को मिली मुकम्मल उड़ान
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

कवि मिजाज के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व व कृतित्व की अनुगूंज अब तलक देश-प्रदेश के हर कोने में सुनाई देती है। इसलिए भारत सरकार उनकी जयंती को सुशासन दिवस (25 दिसम्बर) के रूप में मनाती है, क्योंकि उनके जीवन का शाश्वत संदेश अटूट संकल्प, अनवरत संघर्ष, लोकनिष्ठ ईमानदारी, पारस्परिक एकता और मनःस्थित शांति पर केंद्रित हैं। निर्विवाद रूप से उनके विचारों ने राजनीति, समाज और व्यक्तिगत जीवन को प्रेरित तथा अनुप्राणित किया है। सच कहूं तो ये संदेश उनकी कविताओं, भाषणों और नीतियों से निकले हैं। 

परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों ने समकालीन राजनीति को गहनता पूर्वक प्रभावित किया, विशेष रूप से भाजपा की उदार छवि, आर्थिक सुधारों और विदेश नीति में। उनके शांति-केंद्रित राष्ट्रवाद ने विपक्षी दलों को भी प्रभावित किया। ये प्रभाव आज भी मोदी सरकार की नीतियों में दिखते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रमुख राजनीतिक सिद्धांत राष्ट्रवाद, शांति, आर्थिक उदारीकरण, एकता और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित थे। उन्होंने इन सिद्धांतों को अपनी नीतियों और भाषणों के माध्यम से लागू किया। निःसन्देह ये सिद्धांत भारतीय जनसंघ से भाजपा तक उनकी राजनीतिक यात्रा को परिभाषित करते हैं, साथ ही साथ जनमानस को अनुप्राणित भी करते हैं। 

पूर्व प्रधानमंत्री बाजपेयी ने लोगों को संकल्प और संघर्ष का मूलमंत्र दिया। उनका मानना था कि संकल्प पर दृढ़ रहना चाहिए और संघर्ष से भागना आवश्यक नहीं है, क्योंकि संघर्ष ही जीवन की मिठास लाता है। उन्होंने कहा, "संघर्ष से भागो मत, क्योंकि संघर्ष से ही जीवन की मिठास आती है।" गलतियों को छिपाने के बजाय स्वीकार करना आत्मविकास का मार्ग है। उन्होंने जनमानस को एकता और शांति की शिक्षा दी और कहा कि राष्ट्र की एकता सर्वोपरि है, सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन देश स्थायी रहना चाहिए। विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जो विश्व के लिए सबक है। शांति के लिए धैर्य, लगन और पारस्परिक सम्मान जरूरी है। 

जहां तक उनकी नीति और नैतिकता की बात है तो उन्होंने दो टूक कहा था कि नीतियां करुणा से निर्देशित होनी चाहिए तथा आर्थिक शक्ति नैतिक जिम्मेदारी के साथ हो। सत्य को छिपाना व्यर्थ है और बंदूकें नहीं, भाईचारा ही समस्याओं का समाधान है। राष्ट्र का सच्चा धन उसके लोग हैं, संसाधन नहीं। वहीं राष्ट्रवाद और एकता का स्वर भी उन्होंने बुलंद किया। राष्ट्रवाद को सर्वोपरि मानते हुए वाजपेयी ने "एकात्म मानववाद" को अपनाया, जो पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित था। वहीं, विविधता में एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी बहुलता है। पकिस्तान और चीन के साथ संबंध सुधारने के प्रयासों से उन्होंने शत्रुता से मित्रता की नीति अपनाई। 

जहां तक शांति और कूटनीति की बात है तो परमाणु परीक्षण के बाद भी शांति की पहल करते हुए पोखरण-टू को राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक बनाया। लाहौर बस यात्रा और आगरा शिखर सम्मेलन से पड़ोसी देशों के साथ संवाद को प्राथमिकता दी। "शांति ही हमारी प्राथमिकता" उनका मूल मंत्र था, जो युद्ध से बचाव पर केंद्रित था। वहीं आर्थिक और सामाजिक सुधार के भी वे प्रणेता बने। उन्होंने आर्थिक उदारीकरण को गति देते हुए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से बुनियादी ढांचे का विकास किया। साथ ही गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास पर भी उन्होंने जोर दिया, जैसे आईआईटी और आईआईएम का विस्तार। साथ ही सुशासन को ईमानदारी और पारदर्शिता से जोड़ा, जो अच्छे शासन दिवस या सुशासन दिवस के रूप में आज भी उनकी विरासत से जुड़ी हुई है। 

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि भाजपा की छवि निर्माण में भी वाजपेयी का अद्वितीय योगदान है, क्योंकि उन्होंने  भाजपा को कट्टर छवि से मुक्त कर मुख्यधारा में लाया, जिससे 1998-2004 में गठबंधन सरकारें संभव हुईं। उनके समावेशी दृष्टिकोण ने हिंदुत्व को राष्ट्रवाद से जोड़ा, जो आज भाजपा की चुनावी रणनीति का आधार है। वो विकास पुरूष थे। उनकी आर्थिक और बुनियादी ढांचा सम्बन्धी नीतियों के आज भी देशवासी कायल हैं। उनकी स्वर्णिम चतुर्भुज और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने आर्थिक उदारीकरण को गति दी, जिसका प्रभाव वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर बूम में दिखाई देता है। वहीं सुशासन दिवस उनकी ईमानदारी की विरासत है, जो आज पारदर्शिता पर जोर देता है। 

जहां तक उनकी विदेश नीति और शांति पहल की बात है तो लाहौर बस यात्रा और पोखरण परीक्षण ने उसे बेहद मजबूत किया लेकिन शांतिपूर्ण विदेश नीति का मॉडल भी दिया, जो समकालीन भारत-पाक संबंधों को प्रभावित करता है। उनकी कूटनीति ने पड़ोसी-प्रथम नीति को मजबूत किया, जो आज की नीतियों में प्रतिबिंबित है। सच कहूं तो मोदी सरकार की उड़ान में उनकी नितियों का योगदान भी अंतर्निहित है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ

जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया