सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित 'वीबी-जी राम जी योजना' के सियासी मायने को ऐसे समझिए

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित 'वीबी-जी राम जी योजना' के सियासी मायने को ऐसे समझिए
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक

वीबी-जी राम जी योजना, जिसका पूरा नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' है, मनरेगा को प्रतिस्थापित करने वाले नए विधेयक के रूप में जब भारतीय संसद में पेश की गई तो विपक्षी दलों ने भारी एतराज जताया। फलस्वरूप यह योजना संसद में भारी विवाद का कारण बनी क्योंकि विपक्ष ने इसे महात्मा गांधी के नाम वाली ऐतिहासिक योजना का अपमान माना। विपक्षी दलों का आरोप है कि योजना का नाम 'जी राम जी' रखकर गांधीजी के नाम को हटाया गया, जिसे वे 'गोडसे राम' विधेयक कह रहे हैं। 

शायद इन विपक्षी राजनेताओं को याद नहीं है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और हे राम शब्द एक दूसरे के पूरक समझे जाते हैं, क्योंकि हे राम! उनके जीवन के अंतिम शब्द हैं जो उनकी स्मृति स्थल 'राजघाट' पर मोटे अक्षरों में खुदे हुए हैं।इसलिए चाहे मनरेगा और या फिर वीबी-जी राम जी इससे जनसेवा की सोच में कोई खास अंतर नहीं पड़ता है।हां, यदि तुष्टीकरण की सियासत करना हो, तो केंद्र सरकार ने अपनी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा पर पुनः बल देते हुए विपक्ष को जानबूझकर एक आत्मघाती मुद्दा थमा दिया है, जिससे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम को शाश्वत बनाया जा सके।यूँ तो हर हिन्दू की अंतिम यात्रा में 'राम नाम सत्य है' का सामूहिक उद्घोष किया जाता है। लेकिन अब मनरेगा के नए नामकरण से वीबी- जी राम जी का नाम लेने को वो गैर हिन्दू भी बाध्य हो जाएंगे, जिन्हें वंदे मातरम तक पर एतराज होता आया है। 

इसलिए गहन रणनीति पूर्वक भाजपा नीत एनडीए सरकार ने लोकप्रिय मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन वीबी- जी राम जी का जो दांव चला है, वह उसे जन जन तक पहुंचाएगा।और दिलचस्प तो यह कि हिन्दू मतों से लाभान्वित टीडीपी नायडू और जदयू जैसे सियासी दल भी एक सीमा के बाद विरोध नहीं कर पाएंगे और यदि ऐसा कुछ होगा तो उसकी रणनीति भी साफ होगी- सेफ्टी वॉल्ब वाली। इसके  अलावा, जहां मनरेगा में केंद्र 90% और राज्य 10 ℅ खर्च वहन करते थे, वहीं अब नए कानून में केंद्र 60 प्रतिशत और राज्यों पर 40% बोझ डाला जाएगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों के लिए भले ही चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन उनके अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाएगा ही।

यही वजह है कि सरकार ने अपना तर्क दिया है कि 20 साल पुरानी मनरेगा को अपडेट कर 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूत करेगा। इससे गरीबों को काफी लाभ मिलेगा। वहीं इस जनयोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार कम करने और निगरानी बढ़ाने के लिए बदलाव जरूरी बताए गए हैं, क्योंकि हाल के आंकड़ों में गबन और कम उपयोगिता की बात सामने आई है। 

बताते चलें कि लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बिल पेश होते ही कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसदों ने गांधीजी की तस्वीरें लहराईं और विरोध प्रदर्शन करते हुए जो संसदीय हंगामा खड़ा किया, उससे भाजपा के मनोरथ पूर्ण हो गए। क्योंकि वह पुनः राष्ट्रवादी एक्शन के मूड में आ चुकी है। ऐसे में टीडीपी जैसे सहयोगी दलों ने भी जो राज्यों के वित्तीय बोझ पर चिंता जताई, उससे संसद में कोहराम मच जाना लाजिमी है।

बताते चलें कि वीबी-जी राम जी योजना, जिसका पूरा नाम 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' या VB-G RAM G है, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुनिश्चित करने वाली नई सरकारी योजना है। यह मनरेगा (MGNREGA) की जगह लाई जा रही है, जिसमें रोजगार की गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इस योजना में ग्राम पंचायतों को स्वयं योजनाएं तैयार करने का अधिकार दिया गया है, जो पीएम गति शक्ति जैसे सिस्टम से जुड़ेंगी। वहीं बुआई-कटाई के मौसम में 60 अतिरिक्त दिन का प्रावधान जोड़ा गया है, वह आवश्यक है ताकि किसानों को मजदूर मिल सकें और फर्जी मजदूरी रुके।

जहां तक नाम परिवर्तन का कारण का सवाल है तो मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) योजना इसलिए किया गया, ताकि 2047 के विकसित भारत विजन से जोड़ा जाए और योजना को आधुनिक रूप दिया जाए। यह संसद में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पेश विधेयक का हिस्सा है, जो पुरानी कमियों को दूर करता है। वहीं नाम बदलाव पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है, क्योंकि जॉब कार्ड, बोर्ड, स्टेशनरी और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे—जैसे 25 करोड़ कार्ड पर 375 करोड़ तक। हालांकि, सरकार इसे अपग्रेड मान रही है।

चूंकि वीबी-जी राम जी योजना (VB-G RAM G/विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) योजना मनरेगा (MGNREGA) का अपग्रेडेड संस्करण है, जिसमें रोजगार गारंटी, कार्यान्वयन और निगरानी में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यह 2047 के विकसित भारत विजन से जुड़ी है।  इससे मजदूरों को अधिक रोजगार और पारदर्शिता मिलेगी, जबकि किसानों को मौसमी मजदूरी कमी और फर्जीवाड़ा रुकने से फायदा होगा। योजना में आपदा राहत और बेहतर जवाबदेही पर जोर है।

वीबी-जी राम जी योजना (VB-G RAM G) योजना में लाभार्थी चयन प्रक्रिया मनरेगा (MGNREGA) से अधिक डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी, जिसमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीयो-टैगिंग और AI-आधारित सत्यापन मुख्य बदलाव हैं। चयन प्रक्रिया के मुख्य बदलाव के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जहां परिवार की जरूरतों को स्थानीय विकास योजनाओं (PM गति शक्ति से जुड़ी) के साथ जोड़ा जाएगा। पहले जॉब कार्ड पर निर्भर प्रक्रिया अब रीयल-टाइम डैशबोर्ड और मोबाइल ऐप से जुड़ेगी, जिससे फर्जी लाभार्थी रुकेंगे। वहीं निगरानी और पात्रता के तहत बायोमेट्रिक और GPS से उपस्थिति दर्ज होगी, जबकि साप्ताहिक ग्राम सभाओं में शिकायत निवारण होगा। पात्रता अब ग्रामीण गरीब परिवारों पर केंद्रित रहेगी, लेकिन फंड वितरण जरूरत-आधारित और वस्तुनिष्ठ मानकों पर होगा।

वहीं, वीबी-जी राम जी योजना (VB-G RAM G) योजना में 60:40 फंडिंग मॉडल (केंद्र 60%, राज्य 40%) राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ाएगा, जिससे लाभार्थी चयन प्रक्रिया अधिक कठोर और जरूरत-आधारित हो जाएगी। इसलिए फंडिंग का चयन पर प्रभाव के तहत राज्यों को अपनी 40% हिस्सेदारी के कारण ग्राम पंचायतों को फंड पारदर्शी ढंग से आवंटित करना पड़ेगा, जिससे पात्र लाभार्थियों का चयन स्थानीय विकास जरूरतों (जैसे जल संरक्षण, सिंचाई) पर केंद्रित होगा। इससे फर्जी या राजनीतिक आधारित चयन कम होगा, लेकिन कमजोर राज्य चुनिंदा लाभार्थियों तक सीमित रह सकते हैं। इससे जवाबदेही में बदलाव आएगा। राज्य स्तर पर श्रेणीबद्ध पंचायतों के आधार पर फंड वितरण अनिवार्य होगा, जो AI निगरानी और ग्राम सभाओं से जुड़ेगा। विशेष राज्य (उत्तर-पूर्वी, हिमालयी) 90:10 पर रहेंगे, लेकिन सामान्य राज्यों में यह चयन को वस्तुनिष्ठ बनाएगा।

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