अधर्मी को कड़वे सबक सिखाने होंगे यदि पुनः धर्मसम्मत सीजफायर टूटा तो!


अधर्मी को कड़वे सबक सिखाने होंगे यदि पुनः धर्मसम्मत सीजफायर टूटा तो!
@ डॉ दिनेश चन्द्र सिंह, आईएएस, जिलाधिकारी, जौनपुर, यूपी 

युद्ध, युद्ध होता है| इसमें दो विभिन्न वैचारिक भाव, संवेदना, नीति, गति, धर्म, प्रवृति, खानपान, मर्यादा की विविधता के बीच टकराव होता है| इसी के साथ अधर्मी पक्ष द्वारा किसी भाव और अहं की मनोवृति के कारण अपने को “तुच्छ होते हुए भी तुच्छ और अभागा न मानते हुए” केवल कट्टरवादिता और आतंकवाद की अमर्यादित पृष्ठभूमि को बढ़ावा दिया जाता है| इस प्रकार  अकल्याणकारी अधर्म पर आधारित पाकिस्तानी अनीति के कारण वह अपने राष्ट्र को वेदना, पीड़ा और आतंक के साये में लाकर विकास विरोधी नीति के कारण भारत जैसे धार्मिक राष्ट्र की नीतियों और युद्ध विराम की शर्तों का उल्लंघन किया है| यह स्थिति पाक नागरिकों की कब्रगाह बनने का द्योतक है, क्योंकि इस्लाम में मृतकों को भूमि में दफन की मान्यता है| परन्तु अधर्म और आतंकवाद के साये में पाकिस्तान द्वारा लड़े जाने वाले युद्ध में जब करोड़ों नागरिकों की अकाल मृत्यु का गवाह पाकिस्तान बनेगा, तब उसे पीड़ा समझ में आयेगी|

इस बात में कोई दो राय नहीं कि भारत एक सहिष्णु राष्ट्र है| वह धर्म आधारित युद्ध की सफलता के मानक एवं परिणाम को जानता है| इसलिए भारत ने युद्ध विराम पर अपनी सहमति लोकतांत्रिक मूल्यों की परिकल्पना में एवं भारत के सूत्र वाक्य “वसुधैव कुटुम्बकम” के आलोक में उदारता भाव को पुनर्स्थापित करने के लिए दी है| वैसे भी भारतीय सांस्कृतिक पद्धति और सनातनी धार्मिक आस्था के आलोक में “भारतीय लोकतंत्र की जनमत की भावना पंचायती मध्यस्तता” को उचित मानती है, इसलिए यह स्वाभाविक बात है कि जिसकी मध्यस्तता यूएसए जैसे सर्वशक्तिशाली राष्ट्र ने की हो, उसके यश और वैभव का क्या कहना| उसी क्रम में “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया| सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःख भाग भवेत्|” ॐ शांति: शांतिः शांतिः| का भाव पुनः जागृत होता है| अंग्रेजी भाषा में कहें तो “May all be happy, may all be in good health. May all see good, and may no one share in suffering.” Om Shanti: Shanti: Shanti. अर्थात “सभी खुश रहें, सभी अच्छे स्वास्थ्य में रहें, सभी अच्छाई देखें, और कोई भी दुख में भागीदार न हो।” ओम शांति: शांति: शांति| कहना न होगा कि यह उदात्त भाव ही भारत की विराटता और सहिष्णुता का दर्शन है| परन्तु अधर्मी धर्म में परिभाषित दर्शन और संदेश को कायरता मानते हैं|

शायद इसलिए धर्म आधारित दर्शन पर बहुत ही कठोर हृदय से भारत सरकार के यशस्वी और देवतुल्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, जो आयु के उस पड़ाव पर हैं जिस पड़ाव पर व्यक्ति कभी अनीति और अधर्म पर नहीं चलता है, का सीजफायर का फैसला सराहनीय है| क्योंकि उन्होंने भारत के विकास और पाकिस्तान की अधोगति के लिए एवं पाक नागरिकों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण के कारण युद्ध विराम का निर्णय लिया है| हालाँकि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उसका उल्लंघन पुनः पाक की बर्बादी का सबब बनेगा| वह भारत के धर्म आधारित युद्ध में भारतीय सेना के पराक्रम, शौर्य और भारतीय नागरिकों के राष्ट्रप्रेम के जज्बाती तेवर से निश्चय ही नेस्तनाबूद हो जायेगा| तत्पश्चात पाक की भूमि कम पड़ेगी ही कब्रगाह में दफन के लिए| और उन्हें पुनः उसी नीति रीति के अंतर्गत अंतिम संस्कार करना पड़ेगा, जिस धर्म के वह पूर्व में अनुयायी थे और अब भी कोशिश है कि वह पुनः अपने सनातन धर्म में लौटें|

परन्तु आतंकवाद और अधर्म की नीति के चलते लाचार, गरीब और बेसहारा पाकिस्तान अब भारत के समक्ष टिक नहीं पाएगा| क्योंकि भारत की धार्मिक नीति, संस्कृति के वंशानुगत होने के कारण और हृदय से प्रेम करने के बावजूद भी उसने शत्रुतापूर्ण व्यवहार नहीं छोड़ा और बर्बादी के कगार पर पहुंच चुका है| पाक की कट्टरपंथी व जिहादी इस्लामिक मानसिकता और आतंकवादी नीति की विभीषिका के चलते भारत को उसे ठोकना पड़ा| इसकी अंतहीन वेदना और पीड़ा में उसने अपने कुछ कट्टरपंथियों को भी खोया है| इसलिए सवाल है कि क्या उसके साथ अधिकांश युद्ध विराम की नीति विफल नहीं हो गई, जबकि उसके प्रति सहमत पाक नागरिकों को जहन्नुम में ले जाने के लिए भी वह तत्पर है| इसलिए यक्ष प्रश्न वही कि तो फिर ऐसा क्या करें? ताकि उसकी नीयत सुधर जाए|

हम तो मानते हैं कि- “होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥“ अर्थात होना वही है जो राम ने रच रखा है| इसलिए अधर्म का नाश होगा| अधर्म की नीति पर चलने वाले पाक की हुकूमत एवं उसके प्रशिक्षित आतंकवादियों का नाश तय है| क्योंकि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब प्रभु विभिन्न रूप धारण करके सज्जनों की पीड़ा हरते हैं| श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ अर्थात मै प्रकट होता हूं, मैं आता हूं, जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मैं आता हूं, जब जब अधर्म बढता है तब तब मैं आता हूं, सज्जन लोगों की रक्षा के लिए मै आता हूं, दुष्टों के विनाश करने के लिए मैं आता हूं, धर्म की स्थापना के लिए में आता हूं और युग युग में जन्म लेता हूं। 

यूँ तो मैं ज्ञानी या धर्मशास्त्र का मर्मज्ञ नहीं हूँ, परन्तु मैं कबीर के ज्ञान की उस कसौटी पर कसा हुआ हूँ जिसके अंतर्गत प्रेम की महत्ता है| कहा गया है कि “पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।“ कहना न होगा कि पाकिस्तान को न प्रेम पढना है और न ही प्रेम की महत्ता को समझना है| क्योंकि वह अहंकार में डूबा व्यक्ति और छेद हुए जहाज में बैठे नागरिकों के समान है, जिसकी मृत्यु सुनिश्चित हो जाती है|

इस बात में कोई दो राय नहीं कि धन्य हैं भारत के धर्म की रक्षा के प्रहरी, हमारे राष्ट्र के कर्णधार, जो सदैव भारत के आन बान शान की रक्षा करने को तत्पर रहते हैं और युद्ध के मैदान में ऐसी शूरवीरता दिखाते हैं कि दुश्मनों के होश फाख्ता हो जाते हैं| परन्तु यह भी कड़वा सच है कि धर्म की बात, धर्म आधारित समझौता उससे करना चाहिए जो धर्म को जानता व मानता हो| अतः युद्ध विराम समझौते के उल्लंघनकर्ता पाकिस्तान को ऐसा पाठ पढ़ाना चाहिए कि सबको उनकी नानी याद आ जाए| क्योंकि धर्म पर आरूढ़ व्यक्ति की नौका कभी नहीं डूबती है| इसलिए पाकिस्तान को अब अंतिम रूप से सबक सिखाना होगा| शायद इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अब आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा| 

कहा भी गया है कि, “युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वह भी बड़े अभागे होंगे| या तो प्रण को तोड़ा होगा, या तो युद्ध से भागे होंगे|” जबकि भारत न तो युद्ध से डरता और घबराता है और न ही अपने प्रण को तोड़ता है| क्योंकि यह भारत है राम-कृष्ण का और यहाँ दर्शन, मर्यादा और प्रण का अस्तित्व है यानी कि उसी पर आधारित शासकीय प्रणाली कायम है| कहा जाता है कि “रघुकुल रीति सदा चली आई| प्राण जाए पर वचन न जाई||” परन्तु यहाँ धर्मराज युद्धिष्ठिर और महाधनुर्धर अर्जुन भी हैं| जिसने अभिमन्यु की आतंकवादी तरीके से हुई हत्या/मृत्यु के बाद संकल्प लिया था कि सूर्य डूबने से पूर्व अभिमन्यु की असामयिक मृत्यु के कारक जयद्रथ का बद्ध करूँगा और वही किया भी था|

कहना न होगा कि भारत की भूमि में अर्जुन सरीखे महारथी अभी भी सेना में होंगे या हैं| मुझे पता नहीं कि वह जल, थल, नभ सेना में कौन हैं? परन्तु जल, थल, नभ सेना में धर्म की रक्षा के सजग प्रहरी अर्जुन रूपी महारथी किस रूप में, किस नाम से, धर्म, जाति का विभेद करके मौजूद हैं जो पाकिस्तान के उस जयद्रथ का बद्ध सूर्य डूबने के पूर्व वह अवश्य करेंगे, बशर्ते कि वह ठान लें| इसलिए हम सभी भारतीय अपने यशस्वी, धर्म के प्रतीक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ हैं| लिहाजा धर्म आधारित जो भी निर्णय आपका होगा, सम्पूर्ण भारत आपके साथ रहेगा| 

चूँकि मैं धर्म को मानता हूँ| इसलिए अपनी वैवाहिक जीवन की वर्षगांठ को वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में किसी भी प्रकार के आयोजन को निरस्त करता हूँ| भारत मां की जय होगी तो हर दिन दीपावली, होली और करोड़ों नागरिकों की वैवाहिक वर्षगांठ होगी| जय मां भारती, स्वतंत्रता पुकारती| जय होगी मां भारती|

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ

जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया