पक्षीराज मयूर से सदप्रेरणा लीजिए, आपका भी मन मयूर नृत्य कर उठेगा

पक्षीराज मयूर से सदप्रेरणा लीजिए, आपका भी मन मयूर नृत्य कर उठेगा

@ आईएएस डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, जौनपुर जनपद

अपने जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं आदि से खास लगाव रखना चाहिए। फुर्सत मिलते ही अपने जीवन के कुछ पल उन्हें भी देना चाहिए। उनके कल्याण के बारे में हमेशा सोचना चाहिए। क्योंकि हमारे ग्रामीण जनजीवन से शहरी जनजीवन तक उनका अपना महत्व है, लौकिक उपयोगिता है। बेहतर होता कि हमलोग उसे शिकार की दृष्टि से नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से देखिए। प्रकृति के नयनाभिराम स्वरूप इनके बिना कतई नहीं निखर सकते। 

जब भी हम मानवीय पर्यावरण की कल्पना संजोते हैं, भूमंडलीय वातावरण के बारे में सोचते-विचारते हैं, प्राकृतिक जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए प्रयत्न करते हैं तो पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं आदि की याद बरबस आ जाती है। वैसे भी गाय-भैंस, भेड़-बकरियों, कुत्ते-शेर, तोता-मैना, कोयल-मोर आदि से जुड़ी उपदेशात्मक बाल कहानियों के बिना जीवन में रोमांच कहाँ। इसलिए तो मोर पक्षी को देखते ही हर किसी का मनमयूर खिल उठता है। इसलिए मोर के बहाने मैं यहाँ पर जीवन के गूढ़ तथ्यों को उद्घाटित कर रहा हूँ, जो सबके लिए चिंतनीय पहलू हो सकती है।

जीव जंतुओं के प्रति भारतीय संविधान में दी गई व्यवस्था के अनुरूप उनकी सेवा, सुरक्षा और पर्यावरण के उत्कृष्ट मापदंडों को स्थापित करने के लिए भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्व में (डायरेक्टिव प्रिंसिपल में) विस्तार से उनका समावेश किया गया है। जनजीवन में प्रत्येक व्यक्ति का उत्तरदायित्व है कि वह जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम करे, उनके प्रति हिंसा का भाव न रखे, और उनके साथ मानवोचित, उनकी सवेदनाओं के अनुसार स्नेह, प्यार का भाव प्रदर्शित करे, तो जीव जंतु हमें जीवन में खुश रहने की प्रेरणा देते हैं और हमारे उत्साह और साहस को बढ़ाकर राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति और निजी व्यक्तिगत जीवन में हमें उत्साहवान बनाकर कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। तथा यदि हम उनके भाव से प्रेरणा लें, उनकी जीवन शैली से प्रेरणा ले, तो वह मनुष्य के कई प्रकार के अवसादों को, जिसको  डिप्रेशन कहा जाता है, पाश्चात्य सभ्यता में अधिकांश लोग डिप्रेशन के शिकार हैं, उससे उभारने, संवरने और संभलने की भी प्रेरणा देते हैं। इसी पर आधारित मैंने मोर पक्षी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए आपको जीवन के कुछेक अनछुए पहलुओं से अवगत कराने का प्रयास किया है। उम्मीद है कि वह आपको पसंद आएगी।

मेरा स्पष्ट विचार है कि जिंदगी को पूरी ऊर्जा और उल्लास के साथ जीना चाहिए। उत्साह से जीना चाहिये। आप कोई भी कार्य करो, उत्सव के रूप में करो, मन से करो, कर्तव्यपरायणता से करो, निष्ठा से  करो। मैंने आपके ग्रुप में एक मोर के, उसके खुशी के आधार का एक वीडियो आपसे शेयर किया है। वह अपने बच्चों के साथ किस प्रकार से खुशी पूर्वक नाच रहा है और अपने बच्चों को जीवन की विविध कलाएं सीखा रहा है। उसी प्रकार हम सबका जीवन है। शासकीय योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए, फलीभूत करने के लिए पात्र व्यक्तियों में विभिन्न योजनाओं के प्राप्त लक्ष्यों को सुसंतृप्त करने के लिए जो लक्ष्य दिया गया है, वह इसी कड़ी का हिस्सा है।

इसी प्रकार यदि हम सब भी उत्साह के साथ कार्य करेंगे, पात्रों के बीच में जाकर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करेंगे तो हमारा जीवन एक उत्सव के रूप में सबके लिए यादगार रहेगा और हम भी अपने जीवन में उसी प्रकार की खुशी की अनुभूति करेंगे, जिस प्रकार मोर अपने बच्चों के साथ खुशी से नाच रहा है। क्योंकि ईमानदारी पूर्वक कार्य करने के बाद एक व्यक्ति खुशी का एहसास अवश्य करता है, चाहे वह नाचे या न नाचे, लेकिन उसका मन अवश्य नाचता है। धन्यवाद मुझे विश्वास है कि आप मेरे भाव को अच्छे से अवश्य समझ रहे होंगे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ

जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया